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सीसीटीएनएस पूछे जाने वाले प्रश्न

सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्न – सीसीटीएनएस व सीएएस

सीसीटीएनएस: जनपदों द्वारा उठाई समस्याएं एवं निदान (यहाँ क्लिक करें)

 

प्रश्न :कार्यक्रम बहुत धीमा चल रहा है (या) पेज लोड होने में बहुत समय लग रहा है (या) कार्यक्रम प्रदर्शन बहुत धीमा है ?

उत्तर: कार्यक्रम प्रदर्शन की समीक्षा एनसीआरबी द्वारा केंद्रीयकृत रूप से की जा रही है। प्रदर्शन के नतीजों के आधार पर सुधार के उपाय किए जाएंगे। इस संबंध मेन आवश्यक जानकारी राज्यों/संघ शासित प्रदेशों से साझा की जाएगी।

 


1. एकसाथ कई सेवाओं के दृष्टिकोण का क्या महत्व है ?

इस दृष्टिकोण के तहत राज्यों/संघ शासित प्रदेशों के स्तर पर क्रियान्वयन के सभी तत्व एक साथ मिला दिये जाते हैं और एक एकल सिस्टम इंटीग्रेटर (एसआई) को सौंप दिये जाते हैं जो संपर्क के एकल सूत्र के तौर पर काम करता है और सीसीटीएनएस के क्रियान्वयन, एकीकरण और निष्पादन के लिए जवाबदेह होता है।

2. सेवाओं और वस्तुओं के लिए क्या एक उप-ठेकेदार या सब-कोनट्रेक्टर का प्रयोग किया जा सकता है?

साइट तैयार करना, डेटा डिजिटाईजेशन/स्थानांतरण, क्षमता निर्माण (प्रशिक्षण कर्मी) और कार्य निष्पादन में मादड के लिए बोलीकर्ता एक भागीदार/सह-व्यवस्था के साथ काम कर सकता है। बोलीकर्ता सीसीटीएनएस कार्यान्वयन की मूल गतिविधियों, जैसे कि हार्डवेयर और आईटी संसाधन, अनुकूलन/निष्पादन, डेव्लपमेंट, नेटवर्क, कनेक्टिविटी व सीसीटीएनएस-सीएएस (राज्य) लागू करने में उप-ठेका कतई नहीं कर सकता है। हालांकि बोलीकर्ता मूल गतिविध्यों से परे अन्य कार्यों मे उप-ठेका कर सकता है, बशर्ते संबन्धित कंपनियाँ निम्नलिखित शर्तें पूरी करती हों :

  1. उप-ठेकेदार आवश्यक रूप से आईटीसेवाओं में आईएसओ 9001 हो। (जहां प्रासंगिक हो वहाँ आईएसओ 27001 प्रमाणीकरण)

  2. उप-ठेकेदार सूचना प्रौद्योगिकी व्यवसाय में कम से कम 5 वर्षों से काम कर रहा हो।

  3. उप-ठेकेदार के पास सेवा कर पंजीकरण नंबर/पैन नंबर/भविष्य निधि आयुक्तालय नंबर अवश्य हो।

  4. उप-ठेकेदार सरकार /सार्वजनिक उपक्रम के लिए 5 परियोजनाओं कों पूरा कर चुका हो जिसमें से एक परियोजना अधिमन्य रूप से राज्य पुलिस विभाग से संबन्धित हो जहां पुलिस स्टेशनों और उच्च कार्यालयों में क्रियान्वयन का काम किया गया हो।

  5. सिस्टम इंटीग्रेटर एजेंसी का प्रधान बोलीकर्ता ही उप-ठेकेदार के ठेके के कामों के लिए जिम्मेदार होगा। राज्य / संघ शासित प्रदेश सिस्टम इंटीग्रेटर एजेंसी (समूह/एकल एजेंसी) के अलावा किसी अन्य एजेंसी के संग किसी अनुबंध पर सीधे हस्ताक्षर नहीं करेंगे।


3. 3. क्या एमएचए/एनसीआरबी सिस्टम इंटीग्रेटर (एसआई) का पैनल तैयार कर रही हैं?

नहीं। सिस्टम इंटीग्रेटर के चयन के लिए पैनल तैयार करने का कोई उपक्रम नहीं किया जाएगा। राज्य/संघ शासित प्रदेश एसआई का चयन खुली बोली के जरिये करेंगे।

4. क्या राज्य/संघ शासित प्रदेश आरएफपी में अपनी पसंद की प्रौद्योगिकी का प्रस्ताव कर सकते हैं?

नहीं। राज्य/संघ शासित प्रदेश एसआई आरएफपी में अपनी पसंद की प्रौद्योगिकी का प्रस्ताव नहीं करेंगे। सीएएस विकसित करने के लिए एसडीए द्वारा उपयोग में लाये जा रहे दो अलग-अलग तकनीकी में से एक के बारे में एसआई से बोली लगाने कों कहा जाना चाहिए।

5. संचालन और रखरखाव (ओ एंड एम ) सेवाओं के अंतिम दो वर्षों (कुल 5 वर्षों में से) का पैसा कौन देगा?

5. संचालन और रखरखाव (ओ एंड एम ) सेवाओं के अंतिम दो वर्षों (कुल 5 वर्षों में से) का पैसा कौन देगा?

6.क्या एसडीए क्रियान्वयन और अन्य चरणों के दौरान एसआई कों सहयोग प्रदान करेगा?

हाँ। अनुकूलन, परिनियोजन और स्थिरीकरण के दौरान एसडीए राज्य/संघ शासित प्रदेश के एसआई कों हेल्पडेस्क सहयोग प्रदान करेगा जैसा कि एसआई आरएफपी में वर्णित है।

7. क्या पहले चरण के क्रियान्वयन में समस्त उच्च कार्यालय कवर किया जाएंगे?

पहला चरण पाइलट चरण माना जाना चाहिए। और इस चरण में लगभग 10 फीसदी पुलिस स्टेशन और उच्च कार्यालय कवर किए जाने चाहिए।

8. आंकड़ों के विस्थापन कों शुरू होने के लिए कौन सी सबसे महत्वपूर्ण गतिविधि पूरी कर ली जानी चाहिए?

राज्य/संघ शासित प्रदेश के विरासती तंत्र से समस्त डेटा सीएएस (राज्य) और सीएएस (केंद्र) में स्थानांतरित हो जाना चाहिए। यह एसडीए द्वारा उपलब्ध कराये गए डेटा माइग्रेशन यूटिलिटी के जरिये होना चाहिए। आंकड़ों के स्थानांतरण शुरू होने के लिए सीएएस (राज्य) एप्लिकेशन राज्य/संघ शासित प्रदेश में क्रियान्वयित हो जानी चाहिए। .

9. परियोजना नियोजन और प्रबंधन गतिविधियों के तहत क्या एस आई को बीएसएनएल के संग तालमेल करना चाहिए?

हाँ। एसआई और बीएसएनएल की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों के बारे में एनसीआरबी बता चुका है।

10. आंकड़ों के स्थानांतरण में कितना समय लगेगा?

दस साल। स्वीकृत धन से कुछ भी अधिक राशि होने पर उसे राज्य/ संघ शासित प्रदेशों द्वारा स्वयं फंड किया जाएगा।

11. ‘हाथ पकड़ कर काम करने’ का सहयोग कितनी अवधि तक रहेगा?

प्रति पुलिस स्टेशन ‘हाथ पकड़ कर काम करने’ वाला व्यक्ति छह महीने तक की अवधि तक रहेगा।

12. ऐसा सहयोग 6 माह से ज्यादा का हो सकता है?

हाँ। लेकिन केंद्र 15 हजार रुपये प्रति माह की दर से सिर्फ 6 महीने के लिए फंड प्रदान करेगा।

13. क्या ओ एंड एम सेवाएँ सभी स्थानों पर एक साथ शुरू होंगी?

नहीं। यह सेवाएँ प्रत्येक चरण के लिए अलग अलग शुरू होंगी। यह उस चरण के ‘लाइव’ होने के बाद शुरू होंगी।

14. ओ एंड एम सेवाएँ 5 साल की अवधि तक सीमित रहेंगी?

राज्य / संघ शासित प्रदेश लंबी अवधि का विकल्प ले सकते हैं। लेकिन केंद्र सिर्फ तीन वर्ष के लिए फंडिंग करेगा। इससे ज्यादा के लिए राज्यों/संघ शासित प्रदेशों को स्वयं इंतजाम करना होगा।

15. सिर्फ पुलिस स्टेशन को प्रदर्शित करते हुये नक्शे को उपलब्ध करना पर्याप्त है?

नहीं । सभी पुलिस स्टेशनों और उच्च कार्यालयों के विस्तृत पते उपलब्ध कराने होंगे।

16. ओ एंड एम के विभिन्न चरणों के क्रियान्वयन के बीच मूल्य का ब्रेक अप होना चाहिए?

नहीं। ओ एंड एम के चरणों के क्रियान्वयन के दौरान एस आई को देय धन एस आई द्वारा उक्त चरण के लिए बताए गए धन का सौ फीसदी होना चाहिए।

17. क्या राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के लिए यह अनिवार्य है कि डाटा "फॉर्म2: विस्तृत घटक-वार मूल्य निर्धारण” भरा जाए?

हां। राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश अनिवार्य रूप से जानकारी उपलब्ध करवाएं

  1. घटक के प्रकार और

  2. घटक/इकाई की संख्या जिनकी सेवा में जरूरत है।

इससे विसंगति कम होगी और इससे निविदाकर्ताओं को कुल कीमत तक पहुंचने में आसानी होगी।

18. राज्य/केंद्र शासित प्रदेश क्षमता निर्माण पहल के तहत पुलिस कर्मचारियों को बेसिक कम्प्यूटर ट्रेनिंग उपलब्ध करवाएगा। क्या यही ट्रेनिंग सिस्टम इंटीग्रेटर आरएफपी के लिए भी अनुरोध किया जाना चाहिए?

अगर प्रशिक्षण सभी कर्मचारियों का पूरा हो गया है, तो फिर इसके लिए नहीं कहा जा सकता। हालांकि, अगर कुछ कर्मचारी सिस्टम इंटीग्रेटर के आने तक अभी भी प्रशिक्षण से वंचित हैं और सीबी-ट्रेनिंग के स्वीकृत बजट में से राशि बची हुई है, क्षमता निर्माण के तहत काम करने के लिए एसआई इसे लागू कर सकता है।

19. राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के लिए यह अनिवार्य है कि डिस्काउंट कैश फ्लो (डीसीएफ) तकनीक का उपयोग वाणिज्यिक निविदाओं के मूल्यांकन के लिए किया जाए?

हां, चूंकि सिस्टम इंटीग्रेटर को छह साल की अवधि के लिए भुगतान किया जाएगा, डीसीएफ पद्धति का उपयोग विभिन्न प्रकार के भुगतान शर्तों की तुलना के लिए किया जा सकता है, इसमें सिस्टम इंटीग्रेटर को एडवांस भुगतान और प्रगति स्तर पर भुगतान भी शामिल है। इससे न्यूनतम बोली लगाने वाले की पहचान हो सकती है।

20. केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) द्वारा स्वीकृत राशि किसी विशेष मद के लिए राशि जैसे डाटा सेंटर में सेवाओं और सामग्री की लागत से कम है जितनी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश ने सिस्टम इंटीग्रेटर आरएफपी के माध्यम से मांग की है। इस अतिरिक्त भुगतान को कौन करेगा?

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा स्वीकृत राशि से किसी भी चीज के लिए अधिक फंड लगता है, उस राशि को संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश वहन करेगा।

21. किस आधार पर फंड वितरित होता है - राज्य योजना या नवीनतम पीआईएम रिपोर्ट के अनुसार?

केंद्रीय गृह मंत्रालय स्वीकृत पीआईएम रिपोर्ट के आधार पर फंड जारी करेगा।

22. क्या राज्य/केंद्र शासित प्रदेश विभिन्न मदों के फंड को दूसरे में आवंटित कर सकता है?

फंड का आपस में आवंटन की अनुमति नहीं है। ऐसी किसी तरह की जरूरत पर राज्य/केंद्र शासित प्रदेश केंद्रीय गृह मंत्रालय से संपर्क करेगा।

23. यह कौन सुनिश्चित करेगा कि आरएफपी के लिए उपलब्ध कार्यों की गुंजाइश तकनीक और कार्यकारी रूप से संभव है?

एसपीएमसी की जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करने की होगी कि विशिष्ट रूप से निर्मित सीएएस (राज्य), सीएएस (केंद्र) के अनुकूल काम हो।

24. क्या प्री-बिड कॉन्फ्रेंस अनिवार्य है?

प्री-बिड कॉन्फ्रेंस अनिवार्य नहीं है। हालांकि, इसके आयोजन से राज्य/केंद्र शासित प्रदेश को निविदाकारों की ओर से उठाने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों का सामना करने में मदद मिलेगी। इससे आरएफपी की जरूरतों में किसी कमी को भी समझने में मदद मिलेगी।

25. सिस्टम इंटीग्रेटर द्वारा अतिरिक्त और एकीकृत मॉड्यूल विकसित करने के बाद सीएएस (राज्य) के बौद्धिक संपदा अधिकार किसके पास रहेगा?

अतिरिक्त मॉड्यूल का बौद्धिक संपदा अधिकारी पूरी तरह से राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के स्वामित्व में रहता है।

 

1) सीसीटीएनएस क्या है?

सीसीटीएनएस का पूरा नाम क्राइम और क्रिमिनल ट्रेकिंग नेटवर्क और सिस्टम है। भारत सरकार के राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना का सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट मिशन मोड प्रोजेक्ट (एमएमपी) है। सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट पुलिस की पूरी कार्यप्रणाली के आधुनिकीकरण की अवधारणा है जिसमें देशभर के पुलिस संगठन और इकाइयों को वास्तविक समय में अपराध और अपराधियों की जानकारी साझा कर जांच/पड़ताल करने और अपराध रोकने में सहायक होगा।

सीसीटीएनएस का लक्ष्य एक विस्तृत और एकीकृत सूचना और तकनीक (इंफोर्मेशन एंड कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी-आईसीटी) प्लेटफॉर्म तैयार करना है जिससे पुलिसिंग विशेषकर थानों और सभी स्तर पर कार्यकारी क्षमता और प्रभाव को बढ़ाया जा सके जिससे ई-गवर्नेंस के सिद्धांतों को स्वीकार किया जा सके और राष्ट्रीय स्तर पर आधारभूत नेटवर्क तैयार करना, जिससे सूचना तकनीक के आधार पर अपराध और अपराधियों को पकड़ने का सिस्टम तैयार किया जा सके।

2) सीसीटीएनएस की शुरुआत क्या है?

प्रभावी तरीके से अपराध नियंत्रण और सार्वजनिक व्यवस्था को दुरुस्त रखना, विभिन्न पुलिस इकाइयों और संगठनों में अपराध और अपराधियों की जानकारी वास्तविक समय में साझा करने की चुनौती अनिवार्य है। देशभर के विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सभी पुलिस संगठनों और इकाइयों से इस तरह जानकारी साझा और प्रसार करने के लिए, सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में एकीकृत सूचना और तकनीक युक्त आधारभूत संरचना की राष्ट्रीय स्तर पर एक तरह के नेटवर्क का प्लेटफॉर्म तैयार करने जरूरत है।

सूचना तकनीक की मदद से पुलिस की कार्यप्रणाली के आधुनिकीकरण के लिए पूर्व में कई पुलिस संगठनों ने प्रयास किया। इनमें से कुछ एप्लीकेशन हैं नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा क्राइम क्रिमिनल इंफोर्मेशन सिस्टम (सीसीआईएस) सॉफ्टवेयर, आंध्र प्रदेश द्वारा ई-कोप्स सॉफ्टवेयर, तमिलनाडु द्वारा कारस (सीएएआरयूएस) साॅफ्टवेयर, पश्चिम बंगाल द्वारा थाना क्राइम ट्रेकर सिस्टम आदि। पश्चिम बंगाल का सीसीआईएस राष्ट्रीय स्तर पर अपराध और अपराधियों का डाटाबेस तैयार कर सभी राज्यों से साझा करने का बड़ा प्रयास था। सीसीआईएस सात एकीकृत जांच को इकट्‌ठा करने के इनपुट फॉर्म पर अाधारित था जैसे एफआईआर, अपराध का विवरण, गिरफ्तारी/समर्पण, संपत्ति की खोज और जब्ती, अंतिम रिपोर्ट/चार्जशीट, कोर्ट में निराकरण और अपील का परिणाम। हालांकि डाटा एंट्री जिलों में होती थी, फॉर्म मैनुअली पुलिस थानों में भरा जाता था।

विस्तृत परीक्षण पूर्व में हुए प्रयासों में निम्न बड़ी समस्याओं का संकेत देता है:

  1. अब तक हुए प्रयासों का उद्देश्य मॉनीटरिंग करने वाली एजेंसियों द्वारा जरूरी डाटा इकट्‌ठा करना था और प्राथमिक लक्ष्य विशिष्ट कार्य जैसे रिकॉर्ड प्रबंधन, सांख्यिकी विश्लेषण, कार्यालय स्वचालन आदि था।

  2. तैयार सिस्टम से उम्मीद की गई थी कि भविष्य में उपयोग के लिए अधिकतम डाटा इकट्‌ठा करें, काम कर रहे स्टाफ पर अधिक बोझ डालना, कार्यभार बढ़ाना था, इसके बाद सूचना तकनीक दूसरी प्राथमिकता थी।

  3. समर्पित कर्मचारी को पुलिस स्टेशन में सभी कार्यों के लिए डाटा कम्प्यूटर में डालने के लिए लगाया गया था। यह मॉडल दूसरे सेक्टर में अप्रभावी पाए गए।

  4. अन्य राज्यों से संभव जाानकारी साझा करने और बाहरी एप्लीकेशन के साथ संभव इंटरफेस पर लक्ष्य केंद्रीत नहीं किया गया था (कुछ हद तक एनसीआरबी के सीसीआईएस को छोड़कर)। क्राइम और क्रिमिनल इंफोर्मेशन सिस्टम का मूल उद्देश्य राज्यों में और बड़े स्तर पर, प्रत्येक राज्य की रणनीति और प्राथमिकता, एकदम अलग-अलग कर दिया गया था। सामान्य तौर पर आंतरिक निगरानी और प्रबंधन को प्राथमिकता थी इसलिए, अपराध और अपराधियों की जानकारी सिस्टम बनाने के लिए सूचना तकनीक को लागू करना बड़ी रणनीति की जरूरत है, इसमें निम्न सुझाव हैं:

    a) प्रक्रिया को स्वचालित करने के बंधन द्वारा केंद्रीय स्तर पर डाटा इकट्‌ठा करने के सिद्धांत काे समझने की जरूरत है। एक बार डाटा के प्राथमिक स्रोत जैसे पुलिस स्टेशन से प्रक्रिया स्वचलित हो जाएगी तो जिला, राज्य और केंद्रीय स्तर पर जरूरी डाटा स्वत: इकट्‌ठा होने लगेगा।

    b) प्रक्रिया को फिर से तैयार कर जहां तक संभव हो, आंतरिक रूप से स्वचालित किया जाए, मैनुअल और अनावश्यक रिकॉर्ड रखने को कम किया जाए और उसके अनुसार लिखित प्रक्रिया में बदलाव किया जाए।

3) सीसीटीएनएस कैसे कार्य करेगा?

क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रेकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) का लक्ष्य विस्तृत और एकीकृत सिस्टम तैयार करना है जिसमें ई-गवर्नेंस सिद्धातों को अपनाते हुए पुलिस स्टेशन स्तर पर पुलिसिंग को और कुशल और प्रभावी बनाना है। राष्ट्रीय स्तर पर सूचना तकनीक आधारित आधारभूत संरचना तैयार करना है जिससे वास्तविक समय में "अपराध की जांच और अपराधियों की पहचान” की जा सके, जो आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से वर्तमान में बहुत ही महत्वपूर्ण है। सीसीटीएनएस लागू करने के कुछ दिशानिर्देश इस प्रकार हैं:

  • पूरे कार्यक्रम को लागू करने का स्वामित्व राज्य सरकार को है, आधारभूत संरचना, एप्लीकेशन और डाटाबेस, उसी के साथ सूचना प्रणाली में एकरुपता लाने का प्रबंध करना ताकि राज्यों और राष्ट्रीय स्तर पर मांगी गई आैर उपलब्ध जानकारी साझा की जा सके।

  • इस वृहत प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए जरूरी है कि अनुभवी एजेंिसयों से समन्वय कर मदद ली जाए ताकि उन्हें स्पष्ट रूप से प्रदाय करने के लिए जिम्मेदारी दी जा सके।

  • हार्डवेयर और नेटवर्क के घटकों को सिंक्रोनाइज करने के साथ अन्य बराबर के महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर घटकों जैसे ट्रेनिंग, क्षमता निर्माण और बदलाव प्रबंधन को भी अनिवार्य रूप से तैयार करने की जरूरत है।

  • पुलिस संबंधी सूचना तकनीक सिस्टम के क्रांतिकारी पथ को अनिवार्य रूप से नियमित बनाए रखने की जरूरत है

  • सीसीटीएनएस को लागू करने के लिए एनईजीपी के दिशानिर्देश “केंद्रीय स्तर पर योजना और विकेंद्रीय स्तर पर लागू” का पालन करना है।


4) क्यों एनईजीपी के तहत एक एमएमपी है?

नेशनल ई-गवर्नेंस प्लान (एनईजीपी) भारत सरकार ने तैयार किया है जिसमें 8 तत्व व 27 मिशन मोड प्रोजेक्ट (एमएमपीएस) को केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकार स्तर पर लागू करना है। इन एमएमपीएस प्रोजेक्ट का समावेश किया जाता है, जो कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार के लाइन मंत्रालय/विभागों में लागू किया जाता है और एकीकृत परियोजनाओं को कई मंत्रालय, विभागों और एजेंसियों में विस्तार किया जाता है, और समान उद्देश्य प्राप्त करने के लिए सामान्य विजन के तहत मार्गदर्शन दिया जाता है।

पुलिस को भी नेशनल ई-गवर्नेंस प्लान में शामिल किया गया है जिसके तहत लोगों में आतंक का भय कम करने और अपराध का ग्राफ कम करने का जिम्मा दिया गया है। यह पुलिस बल की दक्षता बढ़ाने की दिशा में काम करता है। इस दिशा में एक बड़ा कदम है अपराध और अपराधियों का डाटाबेस तैयार करना और उसे साझा करना। सीसीटीएनएस योजना को लागू करना और आवश्यकता के अनुसार योजना बनाने में मदद करने के लिए, नेशनल ई-गवर्नेंस प्लान मॉडल को उपयुक्त रूप से स्वीकार किया गया था जो उन गतिविधियों को परिभाषित करता है। प्रत्येक चरण के लिए प्रोजेक्ट शुरू करने के परिकल्पना चरण से उसे लागू करने और संचालन और संधारण (ओ एंड एम) चरण तक का दिशानिर्देश है।

5) क्या लक्ष्य और उद्देश्य हैं – तत्काल, मध्यावधि और दीर्घावधि?

सीसीटीएनएस स्कीम को मिशन मोड में लागू करने का प्रस्ताव है और इसके निम्न उद्देश्य हैं:-

तत्काल

  • जांच अधिकारी को एक साधन, तकनीक और जानकारी देना जिससे वह जल्दी और त्वरित अपराध की जांच कर अपराधियों की पहचान कर सके।

  • मैनुअल और निरर्थक रिकॉर्ड रखने में कमी लाना।

  • जानकारी साझा करने के लिए पुलिस स्टेशन और उच्च अधिकारियों के बीच नेटवर्क तैयार करना

  • नागरिकों द्वारा आसानी से शिकायत दर्ज कर पाना

  • प्रशिक्षण के बुनियादे ढांचे को मजबूत करना

मध्यावधि

- डाटा और जानकारी संग्रह, भंडारण, उसे पुन: प्राप्त करना, विश्लेषण, स्थानांतरण और साझा करने की सुविधा पुलिस स्टेशन, जिला, राज्य मुख्यालय और अन्य संगठन/एजेंसियों के बीच, भारत सरकार के स्तर तक इसमें शामिल है।

  • पुलिस कार्यालयों में प्रशिक्षण द्वारा क्षमता निर्माण करना

  • आसानी से निर्णय लेने के लिए एमआईएस तैयार करना

  • जांच करने वाली एजेंसियों के बीच बाधारहित जानकारी साझा करना

  • अपराध और अपराधियों की जांच की प्रगति और अभियोजन केस जिसमें कोर्ट के केस की प्रगति को ट्रैक किया जा सके।

दीर्घावधि

  • पुलिस की कार्यप्रणाली को नागरिकों के मित्रवत, पारदर्शी, विश्वसनीय, प्रभावी अौर कुशल बनाने के साथ पुलिस स्टेशन और अन्य अधिकारियों के स्तर तक प्रक्रिया और प्रणाली को स्वचालित करना

  • नागरिक केंद्रीत सेवाओं को सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तकनीक (आईसीटी) का प्रभावी तरीके से उपयोग कर और बेहतर बनाना

  • पुलिस की कार्यप्रणाली को विभिन्न क्षेत्रों जैसे कानून और व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन, संगठित अपराध को रोकना, संसाधन प्रबंधन आदि को बेहतर बनाना

  • वरिष्ठ पुिलस अधिकारियों को पुलिस बल का बेहतर प्रबंधन करने में सक्षम बनाना और सहयोग करना

  • पुलिस की कार्यप्रणाली और प्रक्रिया को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना

6) क्या प्रदाय होगा और मील का पत्थर साबित होगा? तात्कालिक, मध्यावधि और दर्घावधि?

तात्कालिक माइलस्टोन
 

  • कार्यस्थल की तैयारी

    - कम्प्यूटर इंस्टॉल होंगे विशेष सॉफ्टवेयर के साथ

    - यूपीएस और जनरेटर लगाकर नियमित बिजली सप्लाई

     

  • कनेक्टिविटी

पुलिस स्टेशन (पीएस), जिला पुलिस कार्यालय (डीपीओ) स्तर और पुलिस संगठन के अन्य नामित उच्च अधिकारियों को सीसीटीएनएस एप्लीकेशन उपयोग करने की क्षमता होगी।

पुलिस स्टेशन और जिला पुलिस कार्यालय के बीच इंट्रानेट से ईमेल भेजने और प्राप्त करने की क्षमता

सीसीटीएनएस एप्लीकेशन से एनसीआरबी से कनेक्ट होने की क्षमता


ऐतिहासिक दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन
a. प्रासंगिक ऐतिहासिक रिकॉर्ड को डिजिटाइज किया जाएगा (या पुराने सिस्टम से यहां लाया जाएगा) और राज्य के डाटाबेस में उपलब्ध किया जाएगा
b. इन रिकॉर्ड से संबंधित जिज्ञासाओं को सीसीटीएनएस एप्लीकेशन के माध्यम से निराकरण करने की क्षमता


 क्षमता निर्माण
• प्रत्येक पीसी में कम से कम 6 कर्मचारियों को सीसीटीएनएस का प्रशिक्षण दिया जाएगा और वे दैनिक कामकाज में सीसीटीएनएस का उपयोग करने में सक्षम होंगे
• “प्रशिक्षक को प्रशिक्षण” कार्यक्रम शुरू करना, पहला बैच ट्रेनिंग सत्र को स्वतंत्र रूप से संभालने में सक्षम होगा
• जिला पुलिस केंद्र और पुलिस स्टेशन में वरिष्ठ अधिकारियों को अपनी जरूरतों- स्थिति, रिपोर्ट आदि देखने के लिए सीसीटीएनएस का उपयोग
 हैंडहोल्डिंग (दक्षता)
•एप्लीकेशन को चलाने से संबंधित किसी जिज्ञासा/मामले के लिए संबंधित व्यक्ति की पहचान करना, स्वीकार सेवा स्तर पर सहयोग उपलब्ध करवाना
 हेल्पडेस्क सहयोग परिचालन
मध्यवधि माइलस्टोन
 कुछ जिलों में सिस्टम स्थायी बनाना, जिसका तात्पर्य है- –
• तकनीकी या प्रबंधकीय मामलों का सख्ती से पालन करवाना
• लगातार प्रदर्शन और समय-समय पर परिणाम का परीक्षण (ऑडिट, निगरानी और निरीक्षण के द्वारा)
 परिचालन के नजरिये से
• कुछ अपेक्षित परिणाम के साथ बाकी बचे जिलों में सीसीटीएनएस को लागू करना
• राज्य-राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी रखने वाले अधिकारियों को सीसीटीएनएस एप्लीकेशन उपयोग करने का प्रशिक्षण
 नेटवर्क नजरिया
• जिला स्तर पर प्रासंगिक अपराध और अपराधियों के डाटा को खोजने की क्षमता
• जिलों में पुलिस मैसेजिंग सिस्टम का उपयोग करने की क्षमता
 सांख्यिकी नजरिया
• राज्य स्तरीय निगरनी रखने वाले अधिकारियों (सुपरविजिंग ऑफिसर्स) में जिले और पुलिस स्टेशनों की स्थिति संयुक्त रूप से देखने की क्षमता
• एनसीआरबी स्तर पर राज्य का डाटा सम्मिलित करना
• अनियमित/अस्थायी आउटपुट रिपोर्ट सीसीटीएनएस उपयोग कर पुलिस स्टेशन द्वारा तैयार किया गया डाटा
दीर्घकालिक माइलस्टोन
 राज्य में सीसीटीएनएस लागू करना
 एक समान फॉर्मेट और मानक में एससीआरबी और एनसीआरबी के लिए डाटा समेकित करना है
 परिभाषित सेवा स्तर पर सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही है 
 बाहरी इंटरफेस विकल्प प्रदान किया गया है, जिससे अच्छी तरह से परिभाषित इंटफेस से जब संभव हो बाहरी एजेंसियों के साथ सूचना का आदान-प्रदान करने में प्रयोग किया जा सके। 
 

7) लागू करने की रणनीति क्या है?


सीसीटीएनएस को लागू करने के लिए निम्न रणनीति का पालन करना है: 
a) सीसीटीएनएस को लागू करने के अधिकतर भाग में प्रस्ताव राज्यों पर छोड़ दिया गया है और केंद्र की भूमिका वृहत रूप से सीएएस के विकास और प्रबंधन तक सीमित किया गया है। समीक्षा व निगरानी से संबंधित पहलुओं का भी केंद्र से संबंध है।
b) साइट तैयार करने और हार्डवेयर को इंस्टॉल, नेटवर्किंग, एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (राज्य स्तर पर विशेष रूप से निर्माण करना), ट्रेनिंग, हैंडहोल्डिंग, ऐतिहासिक डाटा का डिजिटाइजेशन, उपयोग योग्य सामान आदि का प्रस्ताव बनाना और इसके साथ ही सूची को पूरा करना। राज्य को इसकी छूट है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशानिर्देश के अनुसार सिस्टम को शुरू करने के लिए जरूरी घटकों का चयन कर सके। 
c) राज्य स्तर पर प्रोजेक्ट को लागू करने के नजरिये से जैसे प्रयास ऊपर (बी में बताया गया है, राज्य को सिस्टम इंटीग्रेटर के रूप में प्राइवेट एजेंसी को शामिल करने की रियायत है हालांकि इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों और मार्गदर्शन का पारदर्शी रूप से पालन करना होगा।.
d) प्रोजेक्ट के परिणाम को प्रदेय (डिलेवेरेब्लस) के साथ जोड़ा जाएगा और एक अनिश्चित भुगतान को प्रदर्शन को लागू करने के आधार पर इन प्रदेय से जोड़ा जाएगा।
e) मौजूदा राज्य के सफल एप्लीकेशन और सीआईपीए के अनुभव का लाभ लेते हुए सीएएस को विकसित करना है, सीएएस में इसकी विशेषताओं और बनावट को शामिल करना है। जरूरी मानक और स्वरूप को आश्वस्त करने के लिए राज्यों और भारत सरकार के बीच पारस्परिकता और एकरूपता का पालन करना है।
f) मौजूदा राज्य के सफल एप्लीकेशन और सीआईपीए के अनुभव का लाभ लेते हुए सीएएस को विकसित करना है, सीएएस में इसकी विशेषताओं और बनावट को शामिल करना है। जरूरी मानक और स्वरूप को आश्वस्त करने के लिए राज्यों और भारत सरकार के बीच पारस्परिकता और एकरूपता का पालन करना है।
g) बाहरी कुशल एजेंसी द्वारा गुणवत्ता और सुरक्षा का प्रमाणीकरण करने के बाद ही केवल राज्य को सीएएस जारी किया जाएगा। 
h) प्रोजेक्ट को लागू करने की निगरानी सेंट्रल प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट (सीपीएमयू) करेगी जो केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत एनसीआरबी के अधीन है।
i) नए सीसीटीएनएस एप्लीकेशन को विकसित करने तक वर्तमान सीआईपीए एप्लीकेशन को एनआईसी जारी रखते हुए उसका रखरखाव करेगा और राज्यों में लागू करेगा। इसके बाद जो पुलिस स्टेशन सीआईपीए के तहत आ चुके हैं, वहां सीसीटीएनएस को एकीकृत किया जाएगा। 
j) प्रोजेक्ट की निगरानी और समीक्षा समिति, केंद्रीय गृह मंत्रालय स्तर पर गठित किया गया है जिसमें गृह सचिव अध्यक्ष हैं, प्रगति की निगरानी और कार्यान्वयन सिद्धांतों की समीक्षा और अगर पूरे प्रोजेक्ट के हित में जरूरी हुआ तो होने वाले बदलावों पर नजर रखेगी। अधिकार प्राप्त समिति जिसमें अतिरिक्त सचिव (सीएस) अध्यक्ष के रूप में होंगे, केंद्रीय गृह मंत्रालय स्तर पर गठन किया गया है जो जांच, स्वीकृति और प्रोजेक्ट की समीक्षा करेगी जिसमें राज्यों के प्रस्ताव भी शामिल हैं। इसी तरह संस्थागत व्यवस्था राज्य स्तर पर किए जा रहे हैं ताकि प्रोजेक्ट काे उपयुक्त तरीके से लागू किया जा सके। 
 

8) राज्य स्तर पर बनने वाला शासकीय संरचना क्या है?


निम्न सरकारी समिति, डीआईटी की अनुशंसा पर प्रगति की समीक्षा, कार्यान्वयन और उसका पालन करेगी, फंड के उपयोग की निगरानी और सीसीटीएनएस प्रोेजेक्ट की पॉलिसी के निर्देशों/मार्गदर्शन की निगरानी करेगी।
a. राज्य की शीर्ष समिति
b. राज्य की अधिकार प्राप्त समिति 
c. राज्य की मिशन टीम
d. जिले की मिशन टीम
निम्न दिशानिर्देशाें के आधार पर समिति का गठन किया जाएगा। यह अनुरोध किया जाता है कि राज्यों में कार्यान्वयन के लिए सभी टीमों के गठन के बाद, उन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय/एनसीआरबी को सूचित करना होगा। /NCRB.
 

9)प्रास्तावित प्रोजेक्ट को कैसे फंड दिया जाएगा?


सीसीटीएनएस 100 प्रतिशत केंद्र की ओर से वित्त पोषित योजना है, वर्तमान योजना अवधि से 2011-12 तक कार्यक्रम के संचालन के लिए जरूरी फंड सभी राज्यों को दिया जाएगा। 
योजना के तहत सीसीटीएनएस में निम्न घटकों में फंड दिया जाएगा: सीसीटीएनएस एप्लीकेशन पुलिस की कार्यप्रणाली से सीसीटीएनएस के तहत जुड़ा है, सरकारी खरीदी और हार्डवेयर के इंस्टॉलेशन (पीसी और अन्य सहायक उपकरण शामिल हैं), कनेक्टिविटी के आधारभूत संरचना के लिए, राज्य स्तरीय डाटा सेंटर को समृद्ध करने, साइट तैयार करने और उसे शुरू करने, क्षमता निर्माण और सिद्ध होने, ऐतिहासिक डाटा का डिजिटाइजेशन, पुराना डाटा (अगर कोई हो तो) का स्थानांतरण और विशेषज्ञ एप्लीकेशन और आधारभूत संरचना (जो सीसीटीएनएस योजना के तहत स्वीकृत हो) को शामिल किया गय है। ये घटक "सेवाओं के समूह” के रूप में उपलब्ध करवाए जाते हैं, उसे राज्य स्तर पर सिस्टम इंटीग्रेटर की ओर से लागू किया जाता है। फंड केवल निर्धारित "सेवाओं के समूह” के विरुद्ध ही खरीदी करने के लिए जारी किया जाता है और अलग-अलग घटकों की खरीदी के विरुद्ध नहीं किया जाएगा। 
 

10) केंद्र की क्या भूमिका और जिम्मेदारी होगी?


केंद्रीय गृह मंत्रालय/एनसीआरबी केंद्र में निम्न गतिविधियों के लिए जिम्मेदार है:
 बजट जारी करना: एप्लीकेशन के हार्डवेयर, कनेक्टिविटी, क्षमता निर्माण के लिए फंड जारी करना
 प्रोग्राम का प्रबंधन: पूरी तरह से योजना बनाना, निगरानी और केंद्रीय पीएमयू के माध्यम से कार्यक्रम का प्रबंधन
 सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन: कोर साॅफ्टवेयर एनसीआरबी विकसित करेगा
 हार्डवेयर और कनेक्टिविटी:
एनसीआरबी में जरूरत के अनुसार हार्डवेयर प्राप्त करना और लागू करना
राज्यों के लिए उचित दिशानिर्देश जारी करना
 क्षमता निर्माण:
क्षमता निर्माण और बदलाव प्रबंधन के लिए खाका तैयार करना और उसे राज्यों से साझा करना
जरूरत के अनुसार उचित प्रशिक्षण सामग्री उपलब्ध करवाना
 सिस्टम का स्वामित्व और प्रबंधन: केंद्र और एनसीआरबी में सिस्टम लागू करने का स्वामित्व और प्रबंधन।
 

11) राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की क्या भूमिका और जिम्मेदारी है?


राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशाें को निम्न गतिविधियों की जिम्मेदारी होगी:
 बजट जारी करना:
ऑपरेटिंग/ पुनरावृत्ति लागत (मानवशक्ति भी शामिल है)
योजना अवधि से बाहर सिस्टम का प्रबंधन करना
 प्रोग्राम प्रबंधन: 
राज्य स्तर पर योजना का क्रियान्वयन
राज्य स्तर पर क्रियान्वयन, निगरानी और मूल्यांकन और प्रोग्राम का प्रबंधन
 सॉफ्टवेयर प्रबंधन:
कोर सॉफ्टवेयर का अनुकूलन और लागू करना
कोर का संवर्द्धन और विस्तार
 हार्डवेयर और कनेक्टिविटी: राज्य स्तर पर अाधारभूत संरचना के लिए सरकारी खरीदी, इंस्टॉल करना, क्रियान्वयन प्रबंधन और आधारभूत ढांचा का प्रबंधन 
क्षमता निर्माण: 
बदलाव प्रबंधन और क्षमता निर्माण कार्यक्रम लागू करना
राज्यों में प्रशिक्षण कार्यक्रम की योजना बनाना और लागू करना
 स्वामित्व और सिस्टम का प्रबंधन: राज्य के सिस्टम की पूरी तरह से स्वामित्व लेना और प्रबंधन करना
 

12) सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट में और कौन हितधारक शामिल हैं?


अन्य हितधारक इस तरह से हैं:
केंद्र में:
• सेंट्रल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (सीपीएमसी)
• सेंट्रल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (सीपीएमयू)
• सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट एजेंसी (एसडीए)
राज्य में
• स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (एसपीएमसी)
• स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (एसपीएमयू)
• सिस्टम इंटीग्रेटर (एसआई)
विभिन्न हितधारकों की निम्न भूमिका और जिम्मेदारियां हैं:
• सेंट्रल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (सीपीएमसी):सेंट्रल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (सीपीएमसी):
• कार्यान्वयन की रूपरेखा को परिभाषित करना और राज्यों के लिए कार्यान्वयन दिशानिर्देश विकसित करना
• बिजनस प्रक्रिया का नया स्वरूप
• राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर श्रेष्ठम अभ्यास का अध्ययन
• कार्यात्मक आवश्यकताओं काे विकसित करना
• समाधान संरचना का प्रस्ताव
• सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट एजेंसी (एसडीए) के चयन के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल तैयार करना
• राज्यों में सिस्टम इंटीग्रेटर का चयन करने के लिए आरएफपी मॉडल तैयार करना
• बदलाव प्रबंधन और क्षमता निर्माण की रुपरेखा तैयार करना
• कोर सीमा का विकास और कोर निवेश की योजनाएं
• स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी (एस-पीएमसी) के लिए कंसल्टेंट का पैनल तैयार करने में एनसीआरबी की मदद करना
• निगरानी और मूल्यांकन की रूपरेखा को परिभाषित करना जिसमें सेवा का स्तर परिभाषित करना भी शामिल है: The सेंट्रल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (सीपीएमयू): सीपीएमयू निम्न गतिविधियों के लिए जिम्मेदार है:
• प्रोजेक्ट को लागू करने की निगरानी
• एपपीएमसी और एसपीएमयू में समन्वय
• सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट एजेंसी (एसडीए)
• सीसीटीएनएस के कोर एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (सीएएस) का डिजाइन और विकास
• राज्यों में सीएएस (राज्य) में सिस्टम इंटीग्रेटर लागू करने में सहयोग करना
• सीएएस के लिए एप्लीकेशन प्रबंधन सेवाएं
• स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (एसपीएमसी)
• राज्य की जरूरतों और मौजूदा सिस्टम का व्यापक अध्ययन
• प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन रिपोर्ट (पीआईएम) तैयार करना और केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा स्वीकृत और मूल्यांकन में राज्य को मदद करना
• राज्य में स्टेट इंटीग्रेटर के चयन के लिए आरएफपी तैयार करना
• सिस्टम इंटीग्रेटर चयन के लिए निविदा प्रक्रिया प्रबंधन में राज्य की मदद करना
• स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (एसपीएमयू) :
• लागू करने के स्तर में मदद करना
• पूरे प्रोजेक्ट का प्रबंधन और समन्वय
• सिस्टम इंटीग्रेटर द्वारा उपलब्ध प्रदेय की समीक्षा
• नियमित आईटी ऑडिट
• निगरानी की स्वीकृति परीक्षण और गो-लाइव की तत्परता
• लागू करने के बाद की स्थिति में सहयोग करना
• सेवा स्तर को उपयोगकर्ता के नजरिये से संतुष्ट करने की निगरानी और एप्लीकेशन का नियमित उपयोग
• एप्लीकेशन और आधारभूत ढांचे में बदलावों के प्रबंध का बदलाव नियंत्रण और उसका हिस्सा 
• नतीजों की निगरानी और मूल्यांकन और राज्य और सिस्टम इंटीग्रेटर को फीडबैक उपलब्ध करवाना
• नतीजों की निगरानी और मूल्यांकन और राज्य और सिस्टम इंटीग्रेटर को फीडबैक उपलब्ध करवाना
• एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (अनुकूलन और वृिद्ध)
• नेटवर्किंग, आधारभूत ढांचा का संचार और डाटा सेंटर
• हार्डवेयर (आपूर्ति और इंस्टॉलेशन)
• विशेषज्ञ आधारभूत ढांचा और निराकरण
• ऐतिहासिक डाटा का डिजिटाइजेशन
• उपयोग योग्य (कंज्यूमेब्लस)
• क्षमता निर्माण और बदलाव प्रबंधन
• हैंडहोल्डिंग
 

13) प्रोजेक्ट में कैसे प्रस्तावित सूचना एवं संचार तकनीक का उपयोग करना है?


सूचना तकनीक (आईटी) अपराध की जांच और अपराधियों की पहचान के क्षेत्र में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पुलिस संगठन के अन्य कार्यों में मदद करता है, आसानी से रिकॉर्ड रखने में, उसे फिर से प्राप्त करने में, विश्लेषण और एकत्रित जानकारी को साझा करने में मदद करता है। त्वरित और समय पर विभिन्न तथ्यों की जानकारी पुलिस के कार्यप्रणाली को सही दिशा में ले जाती है और अपराध और अपराधियों को पकड़ने के साथ संबंधित कार्यों और प्रशासनिक प्रक्रिया में बड़ा बदलाव लाती है। डिजिटल तरीके से अपराध और अपराधियों के डाटाबेस को बनाने और रखरखाव से सिस्टम में शामिल सभी साझेदार से इसे साझा किया जा सकता है। अपराध नियंत्रण की चुनौतियों और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए इसका प्रभावी तरीके से रखरखाव बहुत जरूरी है। इसे प्राप्त करने के लिए, सभी राज्यों को मिलकर आईटी के उपयोग की न्यूनतम सामान्य सीमा तय करनी चाहिए, विशेषकर अपराध और अपराधियों से संबंधी कार्यों के लिए। सीसीटीएनएस का लक्ष्य एक व्यापक और एकीकृत व्यवस्था तैयार करना है। सभी स्तर पर पुलिस की क्षमता और प्रभाव को बढ़ाना है, विशेषकर पुलिस स्टेशन स्तर पर ई-गवर्नेंस के सिद्धांतों को अपनाते हुए और राष्ट्रीयस्तर पर सूचना तकनीक आधारित आधारभूत नेटवर्क तैयार करना है। इससे “अपराध की जांच और अपराधियों की पहचान” वास्तविक समय में किया जा सकेगा, जो आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से वर्तमान परिप्रेक्ष्य में गंभीर रूप से जरूरी है।


14) क्या इस क्षेत्र में हमने दुनिया की सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रणाली को शामिल किया गया है?


क्या इस क्षेत्र में हमने दुनिया की सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रणाली को शामिल किया गया है?
इस उद्देश्य के लिए अमेरिका, ब्रिटेन, अॉस्ट्रेलिया, सिंगापुर और न्यूजीलैंड में पुलिसिंग सिस्टम का सर्वे किया गया। 
सेंट्रल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट की ओर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ अभ्यास का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।


15) सीसीटीएनएस की रूपरेखा के पीछे वैश्विक सीख क्या-क्या मिली?


अंतरराष्ट्रीय अनुभवों के आधार पर निम्न क्षेत्रों में मिले इनपुट को सीसीटीएनएस के स्वरूप में शामिल किया गया है: 
कार्यान्वयन मॉडल 
 कार्यान्वयन में एकत्रित पद्धति से एकल वेंडर की विश्वसनीयता और सरकार के लिए कार्यक्रम प्रबंधन को आसान बनाने में जवाबदेही सुनिश्चित करता है।
 बदलाव प्रबंधन, क्षमता निर्माण और सूचना तकनीक प्रणालियों के साथ संयोजन के रूप में प्रक्रिया के पुनर्रचना का क्रियान्वयन।
कार्यक्षमता
 सिस्टम के आउटपुट पर फोकस जो पुलिस को कोर पुलिस कार्यान्वयन में बेहतर परिणाम देने में मदद करता है, जैसे जांच के उपकरणों पर फोकस आदि। 
वरिष्ठ अधिकारियों को अपराध और अपराधियों से संबंधित जानकारी, खास सवाल, डाटा का ग्राफिकल प्रस्तुति आदि उपलब्ध करवाकर विश्लेषण की क्षमता प्रदान करना।
डाटा की डुप्लीकेट एंट्री को समाप्त करना
 

16) किस तरह की सरकारी प्रक्रिया रीइंजीनियरिंग में शामिल है?


सीसीटीएनएस की प्रक्रिया पुनर्रचना में निम्न पहलु का हिस्सा बनेंगी: 
 पुलिस स्टेशन और अन्य उच्च कार्यालयों में मैनुअल रजिस्टर के रखरखाव में कमी और धीरे-धीरे उन्मूलन 
 Eपुलिस स्टेशनों में मैनुअली रिपोर्ट (साप्ताहिक और मासिक अपराध रिपोर्ट आदि) तैयार करने की परंपरा को खत्म करना 
 पुलिस पोर्टल के माध्यम से नागरिकों और अन्य एजेंसियां को पुलिस सेवाओं तक पहुंच बनाना 
 वास्तविक समय या वास्तविक समय के आसपास डाटा पुलिस स्टेशन और उच्च अधिकारियों के बीच साझा करना, वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मजबूत सवालों और एमआईएस क्षमताओं काे संयोजित कर जरूरत आधारित और लचीला समीक्षा सत्र (मासिक अपराध समीक्षाओं के वर्तमान मॉडल की तुलना में शुद्ध प्रभावशीलता को बढ़ाना) तैयार करना
 प्रक्रिय का सरलीकरण और मानकीकरण और डाटा एंट्री के अतिरेक को खत्म करना 
सेंट्रल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ अभ्यास का एक विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।
 

17) हितधारकों को जरूरी जानकारी के लिए यह कैसे मदद करेगा, जैसे पुलिस, नागरिक और अन्य विभाग


क्राइम और क्रिमिनल ट्रेकिंग नेटवर्क और सिस्टम (सीसीटीएनएस)से हिस्सेदार इन तरीकों से मदद ले सकता है:


1. नागरिक


 Mकई माध्यमों से पुलिस की सेवा ले सकते हैं
 साधारण तरीके से याचिकाओं और एफआईआर का पंजीयन और उसकी स्थिति पर नजर रख सकते हैं
 Sसामान्य सेवाओं जैसे प्रमाण-पत्र, सत्यापन और अनुमति लेने के लिए सरलीकृत प्रक्रिया
 पुलिस के खिलाफ शिकायत पंजीयन करने की सरल प्रक्रिया
 सुनवाई के दौरान केस की प्रगति को जानने की सरल प्रक्रिया
 लावारिश/ बरामद वाहन की रिपोर्ट/देखने की सरल प्रक्रिया
 

क्र.सं. हिस्सेदार को लाभ


 पीड़ित और गवाहों के बीच बेहतर संबंध प्रबंधन
 ट्रैफिक संबंधी शिकायतों को दर्ज करने के लिए ट्रैफिक पुलिस के पास श्रेष्ठ पहुंच
 किसी भी इमरजेंसी कॉल पर मदद के लिए पुलिस द्वारा तेजी और निश्चित प्रतिक्रिया देना
 

2. पुलिस विभाग


 जांच के लिए बड़ा सहायक संसाधन
 केंद्रीयकृत सूचना भंडार जिसमें अपराध और अपराधियों से संबंधित जानकारी के साथ अपराधी की तस्वीर और फिंगरप्रिंट मौजूद है जिसे उन्नत तकनीक से खोजने की सुविधा भी है
 अपराध के तरीके का विश्लेषण और उसे सुलझाने का बेहतर कौशल 
 दुर्घटना और अन्य सड़क दुर्घटनाओं के विश्लेषण की क्षमता को बढ़ाना
 दुर्घटना और अन्य सड़क दुर्घटनाओं के विश्लेषण की क्षमता को बढ़ाना
 पुलिस स्टेशन के कार्यालयीन कामकाज जैसे नियमित और तदर्थ रिपोर्ट बनाने और थाने के रिकॉर्ड का प्रबंधन के दबाव को कम करना 
 पेट्रोलिंग, इमरजेंसी में प्रतिक्रिया, याचिकाओं की पूछताछ और अन्य सामान्य ड्यूटी के लिए संसाधनों के आवंटन को अनुकूल करना
 संयुक्त रूप से ज्ञान आधारित वातावरण उपलब्ध करवाना जहां विभिन्न क्षेत्र और इकाई से इसे साझा किया जा सके
 इलेक्ट्राॅनिक इंफोर्मेशन एक्सजेंच सिस्टम के माध्यम से बाहरी हिस्सेदार के साथ बेहतर समन्वय और संचार
 

3. पुलिस कर्मचारी


 प्रदर्शन का संतुलित मूल्यांकन ढांचा और मापक
 विभाग के अंदर की शिकायतों को पंजीयन करने की सरल प्रक्रिया
 कर्मचारियों की प्रशासनिक सेवा जैसे अवकाश, पेरोल, ऋण और बिल क्लेम के लिए सरल प्रक्रिया
 Iसेवा के रिकॉर्ड का एकीकृत दृश्य जाे कार्य के प्रदर्शन काे दिखाने के साथ ट्रेनिंग की जरूरत काे बताता है
 

4. पुलिस अधिकारियों के लिए


 अपराध और अपराधियों के डाटा का देशभर के पुलिस स्टेशनों से लेने का मानकीकृत साधन
 देशभर से अपराध और अपराधियाों की जानकारी आसानी एवं त्वरित लेने के साथ उसकी प्रवृत्ति व तरीके का विश्लेषण
अपराध की प्रवृत्ति को पहचानने के साथ राज्य में उसके सक्रिय हाेने की जानकारी लेना और राज्य पुलिस विभाग को अपराध रोकने के लिए बातचीत की क्षमता बढ़ाना

5. बाहरी विभाग

 पुलिस व्यवस्था के साथ मिलकर निरंतर बेहतर नागरिक सेवा देने और कानून पालन करवाने में सहायक
 

6. भारत सरकार

 समय पर सूचना की पहुंच
 सूचना आधारित निर्णय लेना


18) राज्य स्तर पर यह पुलिस व्यवस्था को सुधारने और पुलिस-नागरिक संबंधों को मजबूत बनाने के साथ शासन पर यह कैसे दीर्घकालिक असर डालेगा?
क्राइम और क्रिमिनल ट्रेकिंग नेटवर्क और सिस्टम (सीसीटीएनएस) का लक्ष्य ई-गवर्नेंस के सिद्धांतों को अपनाते हुए पुलिस स्टेशन स्तर पर पुलिस व्यवस्था काे अधिक प्रभावशील और व्याापक बनाना है। साथ ही राष्ट्रीयस्तर पर नेटवर्क तैयार करना जिसमें सूचना तकनीक के आधार पर अपराध और अपराधियों को घटना के समय ही पहचान कर पाने की तकनीक विकसित करना है। यह आंतरिक सुरक्षा के मामले में वर्तमान समय की जरूरत है। 
सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट का लक्ष्य पुलिस स्टेशन को कम्प्यूटीराइज्ड और स्वचालित करना है जिससे नागरिकों को दी जाने वाली सेवा की गुणवत्ता बढ़ेगी। नागरिकों को दी जाने वाली कुछ ई-सेवा इस तरह है:
 संबंधित पुलिस स्टेशन को शिकायत/सूचना दर्ज करना/ पुलिस स्टेशन में दर्ज शिकायत या केस की स्थिति की जानकारी लेना 
एफआईआर की प्रति लेना, पोस्टमार्टम रिपोर्ट समेत अन्य अनुमति प्राप्त दस्तावेज लेने की सुविधा
 गिरफ्तार व्यक्ति/वांछित अपराधी और अन्य अवैध गतिविधियों आदि का विवरण गुमशुदा/अपहृत व्यक्ति और गिरफ्तार व्यक्ति, अज्ञात और लाश के साथ उनका मिलान करने का विवरण 
 चोरी/बरामद वाहन, हथियार और अन्य संपत्ति का विवरण
 विभिन्न अनापत्ति प्रमाण-पत्र, मंजूरी और अनुमति के लिए ऑनलाइन आवेदन और एेसे अनुरोधों की स्थिति की जानकारी
 नौकरी, रोजगार, पासपोर्ट, वरिष्ठ नागरिक पंजीयन आदि के लिए सत्यापन अनुरोध 
 जानकारी साझा करने का पोर्टल जहां नागरिक जरूरी फॉर्म/प्रमाण-पत्र आदि डाउनलोड कर सकते हैं
ये कुछ ई-सेवा बस सांकेतिक हैं और ई-सेवा की अंतिम सूची में सभी हिस्सेदार से संबंधित परामर्श है। प्रत्येक सेवा के लिए सेवा का स्तर सभी हिस्सेदार के परामर्श से अंतिम रूप दिया गया है। 
 

19) How are we planning to tackle the problem of re-skilling, capacity building and change management?

क्षमता निर्माण सीसीटीएनएस का एक अत्यधिक महत्वपूर्ण घटक है। सीसीटीएनएस में क्षमता निर्माण (सीबी) का उद्देश्य उपयोगकर्ता और सीसीटीएनएस के अन्य हिस्सेदार को सशक्त बनाने की पहल है जिससे वे स्वत: सीसीटीएनएस का उपयोग कर सकें और इसका असर अपराध के अन्वेषण में हो। अपराधियों को पकड़ने और पुलिस के अन्य कोर कार्यों में मदद है। इसके साथ ही सीसीटीएनएस आसानी से कार्य करते रहे। 
 

उनकी जरूरतों और सीसीटीएनएस के उद्देश्यों को देखते हुए निम्नलिखित विषयों के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं:
 

1. आईसीटी और बुनियादी कम्प्यूटर कौशल के लाभ के बारे में जागरुकता प्रदान करना
2. सीसीटीएनएस एप्लिकेशन की भूमिका आधारित प्रशिक्षण
3. प्रशिक्षक को प्रशिक्षण कार्यक्रम, जिसमें पुलिस स्टाफ के सदस्य प्रशिक्षण लेते हैं ताकि वे आगे प्रशिक्षण कार्यक्रम चला सकें। इससे प्रशिक्षण कार्यक्रम को मापनीय बनाने में मदद मिलती है और प्रशिक्षण के लिए बाहरी वेंडर पर निर्भरता कम होती है।
4. सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर की ट्रेनिंग: पुलिस स्टाफ के कुछ उच्च योग्य सदस्यों को सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर और सीसीटीएनएस में आने वाली परेशानियों को दूर करने वाले के रूप में प्रशिक्षित किया जाता है।
5. तकनीकी भूमिका के लिए योग्य योग्यता वाले सदस्यों की पहचान करने के अलावा रंगरुट प्रशिक्षण के दौरान भी तकनीकी योग्यता रखने वाले लोागें की पहचान करना है और उन्हें अधिक तकनीकी भूमिका (तकनीकी कैडर के लिए विकसित करने की क्षमता हो) निभाने के लिए मार्गदर्शन देना है। 
 

मौजूदा पुलिस प्रशिक्षण केंद्र और संस्थान के बुनियादी संरचना को मजबूत करने के लिए फंड जारी किया जाएगा। निम्नलिखित संस्थान बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के अंतर्गत आएंगे:


• सभी जिला मुख्यालय
• 5 आरपीसीटीसी (क्षेत्रीय पुलिस कम्प्यूटर प्रशिक्षण केंद्र)
• एससीआरबीएक्स (स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो)
• रंगरुट ट्रेनिंग केंद्र और पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज (सभी 110)


20) सेवा स्तर पर इसकी कोई व्याख्या है और इसके अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए कौन से उपाय हैं?


कुछ सेवा और प्रोजेक्ट के तहत सेवा स्तर पर नागरिक सेवा को बेहतर करने की पहचान की गई है। इसमें एफआईआर करने, एफआईआर की स्थिति की जानकारी- ऑनलाइन 24 घंटे चोरी/गुमशुदा/लावारिश वाहन की जानकारी, गुमशुदा बच्चे, अज्ञात/लावारिश शवों, वाहन चोरी, दुर्घटना, भगोड़ा/अत्यधिक वांछित अपराधी- ऑनलाइन 24 घंटे तत्काल पुलिस स्टेशन तक अनापत्ति प्रमाण-पत्र, पूर्ववर्ती, सत्यापान आदि के लिए पहुंच शामिल है। ऑनलाइन फॉर्म के माध्यम से सुव्यवस्थित जांच और अभियोजन पक्ष के लिए एकीकृत जांच प्रपत्र (आईआईएफ) की सुविधा जिससे अपराध की जांच और अपराधी को पकड़ने में सहायक साबित होना वाला एडवांस सर्च का विकल्प और उच्चस्तरीय विश्वसनीय और एकीकृत एमआईएस डाटाबेस है। इसमें अपराध, अपराधी, संपत्ति और अन्य केस से संबंधित जानकारी बायोमेट्रिक डाटा के साथ सर्च कर सकते हैं। संसद, विधानसभा, आरटीआई के सवाल और अन्य एजेंसियों द्वारा मांगी गई जानकारी का सटिक और समय पर जवाब देना। मांग पर परिष्कृत संचालन दक्षता और संबंधित अधिकारियों तक एफआईआर का वितरण। वास्तविक समय पर अपराध की रिपोर्ट की सूचना और उसकी उपलब्ध प्रवृत्ति। वास्तविक समय पर स्वत: एमआईएस और महत्वपूर्ण समय में रिपोर्ट जारी करना जिससे कोर पुलिस सक्रिय हो जाती है। बैक ऑफिस से डाटा के सिंगल एंट्री और स्वत: रिपोर्ट जारी होने से राज्य की पुलिस सेवा स्तर पर निगरानी और मूल्यांकन हो पाएगा।


21) हम राज्य के सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट के विशिष्ट ई-मेल आईडी तक कैसे पहुंच सकते हैं?
 

ई-मेल आईडी तक निम्न तरीके से पहुंच सकते हैं:


• वेब ब्राउजर पर https//mail.ncrb.nic.in/exchange टाइप करें और एंटर बटन दबाएं एक नया सिक्योरिटी अलर्ट विंडो सामने आएगा (नीचे देखें), हां बटन पर क्लिक करें अब उपयोगकर्ता का नाम, पासवर्ड और डोमन लिखने का विकल्प आएगा। इसमें आप अपना यूजर नेम, पासवर्ड जो जारी हुआ है, उसे टाइप करें। डोमन की जगह पर webdom (छोटे अक्षरों में) लिखें और ओके बटन को दबाएं। 
• उपयोगकर्ता का खाता खुल जाएगा।


22) राज्य की विशिष्ट सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट में ई-मेल आईडी का पासवर्ड कैसे बदल सकते हैं?


ई-मेल आईडी के पासवर्ड को बदलने के लिए निम्न प्रक्रिया का पालन करें:


बायीं ओर पैनल में नजर आ रहे बटन को क्लिक करें
चेंज पासवर्ड बटन को दबाएं 
एक नया विंडो खुलेगा जिस पर इंटरनेट सर्विस मैनेजर विंडो लिखा नजर आएगा
इसमें डोमेन नेम की जगह webdom लिखें और पुराना व नया पासवर्ड लिखें
पासवर्ड बदलने के लिए ओके पर क्लिक करें


23) राज्य मनोनीत एजेंसी के लिए किस नाम से बैंक अकाउंट होना चाहिए?


बैंक अकाउंट “सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट- “राज्य के नाम” से बनाएं।


24) राज्य में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए सक्षम अधिकारी कौन है?


अनुबंध पर साइन करने के लिए राज्य में आमतौर से गृह सचिव या मुख्य सचिव सक्षम अधिकारी होता है।


25) हितधारकों की तैयारी की क्या स्थिति होनी चाहिए?


केंद्र की ओर से निम्न गतिविधियां की जाती हैं:


• राज्य के नोडल अधिकारियों की कार्यशाला आयोजित होती है।
• सीसीईए और योजना आयोग से सीसीटीएनएस योजना को स्वीकृति प्रदान करना
• राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को निम्न दस्तावेजों के साथ दिशानिर्देश पालन करने के लिए पत्र जारी करना:


 राज्य में सिस्टम इंटीग्रेटर (एसआई) के चयन के लिए मॉडल रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी)
 क्षमता निर्माण के लिए दिशानिर्देश
 कोर एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (सीएएस) के लिए फंक्शनल रिक्वायरमेंट स्पेसिफिकेशन (एफआरएस)
 

• राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को निम्न मदों और कुछ पूर्वनिर्धारित अर्हताओं को पूरा करने पर फंड जारी करने के लिए पत्र:
 एस-पीएमसी (25%)
 संस्थानों की क्षमता बढ़ाने के लिए (100%) 
- कर्मचािरयों के क्षमता निर्माण के लिए (10%) 
 

• परियोजना कार्यान्वयन और निगरानी रिपोर्ट तैयार कर भेजने के लिए राज्यों को खाका देना 
राज्यों को बुनियादी सुविधाओं के निर्माण के लिए तकनीकी विशेषताओं के संकेतक भेजना 
सभी राज्यों को फंड की पहली किश्त भेजना
पुलिस स्टेशन और उच्च अधिकारियों के यहां नेटवर्क डिजाइन को अंतिम रूप देने के लिए बीएसएनएल से चर्चा करना
•प्रोजेक्ट की निगरानी के लिए टेम्पलेट राज्यों को भेजा जा चुका है
• विभिन्न क्षेत्रों में पांच क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन हो चुका है
• सीएएस विकसित करने के लिए चयनित सात निविदाकारों की प्रतिक्रिया ली गई। तकनीकी मूल्यांकन जारी है। 
 

राज्यों में ये निम्न कार्य हो चुके हैं:


• 35 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने राज्य का प्लान भेज दिया है
35 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने राज्य मनोनित एजेंसियों की पहचान कर ली है
35 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने दिशानिर्देशों के पालन के लिए संचालन संरचना का गठन कर दिया है
• सात राज्यों ने स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट का चयन कर लिया है, अन्य जगह भी प्रक्रिया जारी है


26) केंद्र और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों का अगला कदम क्या होगा और उसके लिए कौन सी समय-सीमा तय की गई है?


केंद्र में: केंद्र की ओर से सीएएस विकसित करने के लिए सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट एजेंसी (एसडीए) के चयन की प्रक्रिया पूरी करने की समय-सीमा फरवरी 2010 रखी गई थी। पुलिस स्टेशनों और उच्च अधिकारियों के यहां नेटवर्किंग डिजाइन करने की समय-सीमा फरवरी 2010 रखी गई थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय में सेंट्रल प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट स्थापित करने के लिए मार्च 2010 तक की समय-सीमा तय थी। एनसीआरबी को मजबूत करने के लिए अनुबंध/प्रतिनियुक्ति आदि पर नई नियुक्ति के लिए मार्च 2010 समय-सीमा थी। सेंट्रल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (सी-पीएमसी) के माध्यम से पुलिस व्यवस्था की विस्तृत मूल्यांकन जून 2010 तक करना था।


राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में: राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की गतिविधियों में केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से भेजे गए दिशानिर्देशों के आधार पर प्रशिक्षण संस्थानों के आधारभूत संरचना करना और ट्रेनिंग कार्यक्रम को पूरा करने की तारीख 31 मार्च 2010 तय थी। राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन में सहायता के लिए राज्य स्तरीय परियोजना सलाहकार (एस-पीएमसी) की नियुक्ति फरवरी 2010 तक करनी थी। प्रोजेक्ट क्रियान्वयन और निगरानी रिपोर्ट (पीआईएम) एस-पीएमसी की मदद से तैयार करना और जमा करने की समय-सीमा मार्च/अप्रैल 2010 थी। राज्य स्तर पर एस-पीएमसी की मदद से सिस्टम इंटीग्रेटर के चयन के लिए प्रस्ताव अप्रैल/मई 2010 तक तैयार करना था। सिस्टम इंटीग्रेटर का चयन जून 2010 तक। अनुबंध के लिए मोलभाव और अंतिम अनुबंध पर हस्ताक्षर जुलाई 2010 तक करना था। सिस्टम इंटीग्रेटर की ओर से काम शुरू करने की समय-सीमा जुलाई 2010 थी। संसाधनों को जुटाने और प्रोजेक्ट की शुरुआत अगस्त 2010 तक करनी थी।

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर सभी मॉड्यूल्स क्षमता निर्माण कर नियमित डाटा राज्य/केंद्र शािसत प्रदेश की ओर से नवंबर 2010 तक भेजना था। सफलतापूर्वक उपयोगकर्ता परीक्षण, मैदानी अमले की ट्रेनिंग और प्रमाणित सीएएस की स्वीकार्यता राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों में फरवरी 2011 तक करनी थी। राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों में सीएएस को नए रूप में मार्च 2011 तक शुरू करना था।

27) एसपीएमसी क्या एसपीएमयू की तरह काम कर सकता है?

एसपीएमसी एसपीएमयू की तरह काम कर सकता है, हालांकि इसके लिए निर्णय राज्य की अधिकार प्राप्त समिति करती है। राज्य इनमें से किसी भी विकल्प को चुन सकता है:

a) राज्य/केंद्र शासित प्रदेश समान निविदा प्रक्रिया से एसपीएमसी और एसपीएमयू में से किसी एक एजेंसी का चयन कर सकता है। 
b) राज्य/केंद्र शासित प्रदेश समान निविदा प्रक्रिया से एसपीएमसी और एसपीएमयू में से किसी एक एजेंसी का चयन कर सकता है। 
c) अगर राज्य/केंद्र शासित प्रदेश एसपीएमसी और एसपीएमयू के लिए एक ही एजेंसी का चयन करती है तो यह स्पष्ट करना जरूरी होता है कि रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल में एसपीएमसी और एसपीएमयू के लिए एक ही एजेंसी का चयन किया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट करना होता है कि दोनों के लिए कार्यक्षेत्र और मानव शक्ति की जरूरत है। एसपीएमसी और एसपीएमयू के लिए एक ही निविदा से एजेंसी का चयन किया जा सकता है।
d) अगर राज्य/केंद्र शासित प्रदेश एसपीएमयू के लिए अलग से एजेंसी का चयन करना चाहता है तो मौजूदा एसपीएमसी की सेवा ले सकता है। एसपीएमयू का चयन निविदा प्रक्रिया से करना है। अगर एसपीएमसी खुद एसपीएमयू के चयन के लिए जारी निविदा प्रक्रिया में शामिल होना चाहता है तो राज्य/केंद्र शासित प्रदेश अलग स्वतंत्र एजेंसी नियुक्त कर सकता है।

28) एसपीएमसी के चयन के लिए किसी समिति के गठन की जरूरत है?

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की अधिकार प्राप्त समिति तकनीकी उपसमिति का गठन कर सकती है जिसमें सूचना प्रोद्यौगिकी विभाग के सदस्य रहेंगे या इसी तरह के अन्य विभाग के लोग रहेंगे जो एसपीएमसी/एसपीएमयू के चयन के लिए आई निविदा का तकनीकी रूप से मूल्यांकन कर सकें। यह उपसमिति अधिकारी प्राप्त समिति/ राज्य मिशन टीम, राज्य के सूचना प्रोद्यौगिकी विभाग के तकनीकी विशेषज्ञ या दूसरे विभाग के तकनीकी विशेषज्ञ रहेंगे तो आईटी उपकरण और सेवा उपलब्ध करवाने में अनुभवी हों।

29) एसपीएमसी के चयन में टीओआर के किन प्रावधान को राज्य/केंद्र शासित प्रदेश संशोधित कर सकता है?

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश निम्न जरूरतों को ध्यान में रखकर टीओआर को संशोधित कर सकता है:

i)राज्य/क्षेत्र में राज्य विशेष की जरूरतों जैसे अनुभव और वहां की अच्छी जानकारी हो।
ii) राज्य विशेष की जरूरतें जैसे राज्य का आकार और कम्प्यूटराइजेशन का स्तर इस तरह के संशोधन से एक या अधिक वेंडर और वेंडर की तटस्था के प्रभाव के साथ योग्यता मापदंड में कोई छूट नहीं दी जा सकती है। राज्य/केंद्र शासित प्रदेश इस तरह के सभी संशोधनों के बारे में एनसीआरबी और केंद्रीय गृह मंत्रालय को बताएगा। एसीएमसी के टीओआर प्रावधान में निम्न संशोधन किए जा सकते हैं। 
ए) धारा 2: परामर्श शामिल करने की गुंजाइश- राज्य/केंद्र शासित प्रदेश टीओआर के मौजूदा दायरे में और गतिविधियां जोड़ सकता है। राज्य/केंद्र शासित प्रदेश एक ही काम में एसपीएमयू के और दायरे को शामिल कर सकता है। 
b) धारा 5.1.2: विस्तृत समीक्षा- राज्य/केंद्र शासित प्रदेश “समीक्षात्मक क्षेत्र के भगौलिक प्रभाव ” के अधीन उपलब्ध करवाए गए टेबल का नवीनीकरण कर सकता है। 
c) धारा 5.1.3: कार्यात्मक विनिर्देश- राज्य/केंद्र शासित प्रदेश द्वारा समाधान के लिए उपलब्ध करवाए गए प्रावधान
डी) धारा 6.1: उत्पाद- राज्य/केंद्र शासित प्रदेश अपने क्षेत्र के आकार और जरूरतों के अनुसार प्रदाय परिणाम की समय-सीमा में बदलाव कर सकता है।
ई) धारा 6.2: मील का पत्थर- राज्य/केंद्र शासित प्रदेश काम की गुंजाइश के आधार पर मील का पत्थर साबित होने वाले परिणाम में सुधार कर सकता है।
एफ) धारा 6.5: समय सीमा- राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सहभागिता के आधार पर राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश की जरूरतों के अनुसार समय-सीमा में बदलाव कर सकता है।

जी) धारा 8: निविदा जमा करना- निम्न ब्योरे को राज्य/केंद्र शासित प्रदेश अपडेट कर सकता है
i) जरूरतों के अनुसार तकनीकी प्रतिक्रिया के पन्नों की संख्या
ii) नोडल अधिकारी का पता 
iii) जमा करने की अंतिम तिथि iv) आईटी प्रोजेक्ट के लिए परामर्श शुल्क की न्यूनतम जरूरत

v) राज्य/केंद्र शासित प्रदेश अन्य जरूरतों के अाधार पर प्रावधानों को अपडेट कर सकता है।
 

30) एसपीएमसी टोआर में निर्धारित जरूरी मानवशक्ति में बदलाव किया जा सकता है?

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट की जरूरतों के आधार पर निर्धारित एसपीएमसी के लिए टीओआर में मानवशक्ति के प्रावधान का पालन कर सकता है या अतिरिक्त मानवशक्ति का उपयोग कर सकता है या मानव शक्ति में कमी भी कर सकता है। परिणाम और समय-सीमा में एसपीएमसी के कार्यों को राज्य में पूरा करने के आधार पर राज्यों को अपनी जरूरत की पहचान करनी होगी।

31) एसपीएमसी के लिए जारी फंड में से राशि बचने पर क्या करना होगा?

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश निर्धािरत मद में जारी फंड को न तो दूसरे मद में खर्च कर सकता है और न ही दूसरी जगह लगा सकता है। राज्य/केंद्र शासित प्रदेश केवल राज्य के प्रोजेक्ट प्रबंधन परामर्श कार्य पर ही फंड का आवंटन कर सकता है। फंड में बची हुई राशि केंद्र सरकार को वापस करनी पड़ेगी और इसका विस्तृत विवरण प्रगति रिपोर्ट और उपयोगिता प्रमाण-पत्र में देना पड़ेगा।
 

32) प्री-बिड संबंधी सवालाें का जवाब कौन देगा?

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश पूरी निविदा प्रक्रिया को संभालेगा, जिसमें प्री-बिड जिज्ञासाएं के जवाब भी शामिल हैं। राज्य की अधिकार प्राप्त समिति द्वारा गठित उप समिति जिसमें राज्य के आईटी विभाग के प्रतिनिधि और या सरकारी विभागों के प्रतिनिधि रहेंगे जिन्हें सामान और सेवा की खरीदी का अनुभव हो, निविदा प्रक्रिया का प्रबंधन करेगी।

33) क्या स्थानों की विस्तृत सूची आईटी मूल्यांकन कर एसपीएमसी की पीआईएम रिपोर्ट तैयार करने के लिए उपलब्ध करवाई जाएगी?

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश को सभी कार्यात्मक इकाइयों (पुलिस स्टेशन/उच्च अधिकारियों/अन्य संबद्ध इकाइयां/संगठन) की सूची बनाकर और निविदाकारों को उत्तरदायी प्रस्ताव बनाने के लिए पुलिस विभाग में कार्य व्यवहार (नागरिक/आंतरिक) की संख्या की जानकारी देना है।

34) क्या एसपीएमसी के चयन के लिए भागीदार की अनुमति है?

भागीदार की अनुमति नहीं है। हालांकि कंपनियां राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश की जरूरत के अनुसार राज्य की अधिकार प्राप्त समिति की अनुशंसा से वैधानिक व्यक्तिगत समझौते के तहत व्यक्तिगत डोमेन विशेषज्ञ/कंसल्टेंट की सेवा ले सकती हैं।

35) सीबी-अधोसंरचना के लिए जारी फंड को अलग-अलग किस तरह बांटा गया है?

सीसीटीएनएस के तहत क्षमता निर्माण (अधोसंरचना) के तहत जारी फंड की पहली किश्त को राज्य/केंद्र शािसत प्रदेश में क्षमता निर्माण के लिए जारी दिशानिर्देश के अनुसार जिला प्रशिक्षण केंद्रों और एससीआरबी में आईटी अधोसंरचना विकसित करने पर खर्च किया जा सकता है। राज्य/केंद्र शासित प्रदेश एससीआरबी की अधोसंरचना जरूरतों के अनुसार संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में आईटी अधोसंरचना की खरीदी के आधार पर आंक सकता है। आरटीसी/पीटीसी/पुलिस एकेडमी में आईटी अधोसंरचना स्थापित करने के लिए राज्यों को अलग से फंड दिया जाएगा।

36) सीबी-इंफ्रास्ट्रक्चर की खरीदी के लिए क्या प्रक्रिया है?

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश जरूरत के अनुसार खरीदी प्रक्रिया अपना सकता है और इन तरीकों से खरीदी कर सकता है 
 खुली निविदा
डीजीएस एंड डी या एनआईसीएसआई ाज्य सरकार की मनोनीत खरीदी एजेंसी
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश राज्य की वित्त/खरीदी नियम का पालन कर सकता है और/या जीएफआर की खरीदी आईटी अधोसंरचना के लिए क्षमता निर्माण कर सकता है। राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की मौजूदा अधिकार प्राप्त समिति संस्थान की खरीदी समिति या नई उपसमिति बनाकर आईटी अधोसंरचना की खरीदी कर सकती है।

37) एनसीआरबी की ओर से हार्डवेयर की जो विशिष्टता बताई गई है, उसे बदला जा सकता है?

एनसीआरबी बेसलाइन हार्डवेयर की विशिष्टता डीजीएस एंड डी की ओर से उपलब्ध करवाई जाती है, जारी फंड के आधार पर न्यूनतम सीसीटीएनएस तकनीकी जरूरतों की पहचान की जाती है। हालांकि यदि कोई अत्याधुनिक/नवीनतम हार्डवेयर की विशेषता बाजार में उपलब्ध या डीजीएस एंड डी या अन्य किसी एजेंसी के पास है, जो सीमित बजट आवंटित किया गया है, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश को खरीदी के लिए उपलब्ध नवीनतम विशिष्टता वाले हार्डवेयर में बदलाव करने की स्वायतता है।

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश को एडवांस विशिष्टता वाले हार्डवेयर की खरीदी में स्वायतता है जो सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट के लिए जारी बजट राशि/इकाई दर से अलग है। हालांकि अन्य अतिरिक्त राशि एनसीआरबी की ओर से जारी इकाई दर से अतिरखर्च होता है तो उसे राज्य/केंद्र शासित प्रदेश को वहन करना होगा।

38) ) कर्मचारियों की ट्रेनिंग के लिए प्रारंभिक फंड जो जारी किया गया है उससे किस तरह की क्षमता निर्माण गतिविधियां करनी हैं?

क्षमता निर्माण (कर्मचारियों के प्रशिक्षण) के लिए जारी पहली किश्त की राशि कुल फंड का 10 प्रतिशत होता है जो क्षमता निर्माण के लिए है। इस फंड का उपयोग कर्मचारियों की ट्रेनिंग आयोजित करने और डिजाइन करने में दो तरह से की जा सकती है, 1) आईटी के लाभ के प्रति जागरुकता और 2) क्षमता निर्माण के लिए राज्यों को जारी दिशानिर्देश के अनुसार बुनियादी कम्प्यूटर जागरुकता प्रशिक्षण में। एनसीआरबी भी मूलभूत दिशानिर्देश में प्रशिक्षण मॉडल के बारे में बताया जा चुका है। राज्य/केंद्र शासित प्रदेश एनसीआरबी की ओर से जारी प्रशिक्षण मॉड्यूल के अनुसार अपने यहां कार्यक्रम तय कर सकता है।

39) क्षमता निर्माण की गतिविधियों के लिए कौन प्रशिक्षण उपलब्ध करवाएगा?

 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश आवंटित फंड (कुल सीबी फंड का 10%) के पहली किश्त से राज्य/केंद्र शासित पुलिस विभाग संगठन (डीटीसी/आरटीसी/पीटीसी/अकादमी) के अंदर ही प्रशिक्षण उपलब्ध करवाना है या राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के आईटी विभाग या राज्य/केंद्र शािसत प्रदेश का कोई सरकारी विभाग जो सरकारी कर्मचारियों को बेसिक कम्प्यूटर जागरूक कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध करवाता हो और ई-गवर्नेंस और आईटी के लाभ पर काम करता हो।
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए आवंटित फंड की पहली किश्त से पूर्णरूप से या आंशिक रूप से सरकारी या निजी बाहरी संस्था को प्रशिक्षण के लिए बुला सकता है जो सरकारी कर्मचारियों को बेसिक कम्प्यूटर जागरूक कौशल और आईटी के लाभ के लिए प्रशिक्षण देती हो। ये निजी या सरकारी सेक्टर की एजेंसी प्रतिष्ठित हो जिसके पास आईटी के क्षेत्र में प्रशिक्षण और प्रमाण-पत्र देने का तीन साल का अनुभव हो और उसके पास पर्याप्त मानवशक्ति हो और आईटी प्रशिक्षण योजना के लिए अधोसंरचना हो और ये सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट के तहत प्रशिक्षण देने में सक्षम हो। 
 

40) ट्रेनिंग मॉड्यूल और उसके पाठ्यक्रम को कौन तैयार करेगा?

एनसीआरबी ने सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को ट्रेनिंग मॉड्यूल दे दिया है। राज्य/केंद्र शासित प्रदेश अपनी जरूरतों को अनुसार समिति/टीम बनाकर प्रशिक्षण पाठ्यक्रम/ट्रेनिंग मॉड्यल में संशोधन कर सकता है। साथ ही राज्य/केंद्र शािसत प्रदेश जरूरत के अनुसार स्थानीय भाषा में प्रशिक्षण सामग्री का अनुवाद करवा सकता है।

41) जरूरी प्रशिक्षण का आंकलन कौन करेगा?

ए) राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की मिशन टीम या राज्य की अधिकार प्राप्त समिति की मंजूरी से नोडल अधिकारी द्वारा गठित समिति जरूरी प्रशिक्षण का आंकलन कर सकती है। क्षमता निर्माण दिशा-निर्देश के अनुसार बेसिक कम्प्यूटर जागरुकता और आईटी के लाभ की जानकारी को ध्यान में रखने हुए पहले चरण में प्रशिक्षुओं और पाठ्यक्रम का निर्धारण समिति कर सकती है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए अभ्यास/पाठ्य सामग्री का आंकलन राज्य/केंद्र शासित प्रदेश का पुलिस प्रशिक्षण विभाग मिशन टीम के साथ मिलकर कर सकती है। 
बी) एसपीएमसी द्वारा तैयार प्रोजेक्ट क्रियान्वयन और निगरानी (पीआईएम) रिपोर्ट में विस्तृत रूप से सीसीटीएनएस सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन ट्रेनिंग उपलब्ध करवाने के लिए सीबी (प्रशिक्षण कार्मचारी) के प्रावधानों को परिभाषित और आंकलन के अनुसार ट्रेनिंग की जरूरत का विवरण दे सकते हैं।

42) अगर किसी एक मद के लिए जारी फंड से उस काम को पूरा करने के बाद भी राशि बच जाती है तो क्या राज्य उस बचे हुए पैसे को दूसरे मद में लगा सकता है?

नहीं। जिस मद में फंड जारी किया गया है, उसे उसी मद में खर्च करना है। उस मद में राशि बचती है तो उसे भविष्य के भुगतान में फिर से शामिल करने के लिए केंद्र को वापस या उसकी जानकारी देना अनिवार्य है।

43) क्या यह संभव है कि राज्यों को ड्राफ्ट देने की जगह राज्यों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से फंड ट्रांसफर किया जाए?

हां। फंड इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से ट्रांसफर किया जा सकता है। (फंड ट्रांसफर के लिए सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सीसीटीएनएस बैंक खाते का आईएफएससी कोड देना अनिवार्य है)

44) राज्य प्रोजेक्ट की प्रगति की रिपोर्ट केंद्र को कैसे भेजेंगे?

प्रोजेक्ट रिपोर्ट की रूपरेखा और खाका तैयार कर केंद्र की ओर से सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेश को भेजा जा चुका है ताकि समय और सही प्रारूप में राज्य स्तर पर प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर भेजा जा सके। मासिक प्रगति रिपोर्ट, त्रिमासिक वित्तीय प्रगति रिपोर्ट और उपयोगिता प्रमाण-पत्र निम्न प्रारूप में राज्य भेज सकते हैं:
क्र.सं.
प्रोजेक्ट की निगरानी रिपोर्ट
जमा करने की तिथि
द्वारा हस्ताक्षरित/प्रमािणत 
1
मािसक प्रगति रिपोर्ट
हर माह में पहले सप्ताह के अंत तक
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश का नोडल अधिकारी
2
त्रैमािसक वित्तीय रिपोर्ट
प्रत्येक त्रैमािसक के पहले पखवाड़े के अंत तक या केंद्रीय गृह मंत्रलाय द्वारा तय की गई तारीख, दोनों में से जो पहले आए
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश का नोडल अधिकारी

3
उपयोगिता प्रमाण-पत्र
हर त्रैमािसक के पहले पखवाड़े के अंत तक या केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से तय की गई तारीख, दोनों में से जो पहले आए
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के गृह विभाग के प्राधिकृत अधिकारी





महत्वपूर्ण शंका/परेशानी


सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट को सभी राज्यों में अलग-अलग चरण में लागू करने से क्या प्राेजेक्ट को सफल तरीके से लागू कर सकते हैं?

सीसीटीएनएस को पूरे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में चरणबद्ध तरीके से लागू करना है न कि एक साथ। प्रत्येक राज्य के जिलों में लागू करना और एक सुनियोजित तरीके से आगे बढ़ता जाएगा। प्रत्येक राज्य के पायलट जिलों में पहले सीएएस की पहल हाेगी। इसके बाद पायलट जिलों की प्रतिक्रिया के अगले चरण में अन्य सभी जिलों में इसे लागू किया जाना है।

2. राज्य में सीएएस एप्लीकेशन जारी करने में देरी करने का असर राज्य में लागू करने वाली योजना पर कैसे पड़ेगा? अमल होने वाली योजना को किस तरह से बदला जाए कि निर्धारित कर सकें कि न्यूनतम देरी होगी?

वर्तमान कार्यक्रम के अनुसार, राज्यों को दिसंबर 2012 में सीएएस दिया जाएगा। राज्यों को सीएएस जारी करने में किसी तरह की देरी को कम करने के लिए, सभी राज्यों को सलाह दी गई है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय या नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्योरा द्वारा जारी की गई सलाह के आधार पर अन्य गतिविधयों को शुरू कर दे। इन गतिविधियों में आंकड़ों का डिजिटलाइजेशन, कर्मचारियों का प्रशिक्षण, साइट तैयार करना आदि शामिल है। इन सभी गतिविधियों को पायलट जिलों में 25 दिसंबर 2012 तक पूरा हो जाए, यह तय करना है। केंद्रीय गृह मंत्रालय/एनसीआरबी द्वारा जारी सभी सलाह एनसीआरबी की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

3. एप्लीकेशन के शुरू होने के बाद क्या पुलिस अधिकारियों को डाटा मैनुअल रजिस्टर के साथ कम्प्यूटर एप्लीकेशन (सीएएस) दोनों तरीके से रखना जरूरी है? यदि हां तो कब तक इसका पालन करना होगा?

प्रत्येक जगह सीएएस शुरू होने के बाद परिवर्तन का एक दौर शुरू होगा, उस दौरान संबंधित पुलिस अधिकारियों को डाटा ऑनलाइन सिस्टम (सीएएस) के साथ मैनुअल रजिस्टर में भी रखने की जरूरत पड़ेगी। परिवर्तन का यह दौर छह महीने से अधिक का नहीं होगा।

4. क्या कोर एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (सीएएस) डाटा एंट्री, स्टोर और उसे पुन:प्राप्त करने के दौरान एप्लीकेशन स्थानीय भाषा में मदद करेगा?

हां, सीएएस कई भाषाओं में डाटा एंट्री करने में मदद करता है और उपयोगकर्ता अपने यहां की अाधिकारिक भाषा में डाटा एंट्री कर सकता है।

5. फॉण्ट क्या है? सीएएस एप्लीकेशन कौन सा फॉण्ट सपोर्ट करता है? यूनिकोड का मतलब क्या है?

फॉण्ट संयोजन है अक्षरों समेत कई लिपि का, जिसमें अक्षराकृति, आकार, पीच और स्पेस शामिल है। फॉण्ट को एप्लीकेशन के अक्षरों के दिखने और महसूस करने के रूप में परिभाषित कर सकते हैं। 
सीएएस एप्लीकेशन यूनिकोड के सभी फॉण्ट सपोर्ट करता है। यूनिकोड फॉण्ट (इसे यूसीएस फॉण्ट और यूनिकोड टाइपफेस के नाम से भी जाना जाता है) एक कम्प्यूटर फॉण्ट है जिसमें वर्ण, अक्षरों, अंकों, ग्लिफ, संकेत, चित्रलिपि, लोगोग्राम का विस्तृत समूह रहता है, जो मानक यूनिवर्सल वर्णों का समूह है, जिसे दुनियाभर के अलग-अलग भाषाओं और लिपियों से तैयार किया गया है।

6.क्या एप्लीकेशन के एकीकृत/साझा डाटा को किसी बाहरी आवेदन जैसे सूचना का अधिकारी, कोर्ट केस आदि में चुनौती दी जा सकती है?

नहीं, राज्य के किसी अन्य आवेदन में सीएएस की एकीकृत डाटा को लेकर कोई मुद्दा नहीं है। सीएएस सीधे राज्य पुलिस विभाग द्वारा उपयोग किए जाने वाले अन्य एप्लीकेशन इंटरफेस हो जाता है। प्रत्येक राज्य के सिस्टम इंटीग्रेटर (एसआई) सीएएस और निर्धारित एप्लीकेशन के बीच जरूरी इंटरफेस बनाएगा। इसके अतिरिक्त सीएएस, स्टेट सर्विस डिलीवरी गेटवे (एसएसडीजी) के माध्यम से पुलिस विभाग के अलावा अन्य बाहरी एप्लीकेशन से डाटा रिसीव करेगा और भेजेगा।

7. एनएसडीजी और एसएसडीजी क्या है? हमारे साथ इनकी क्या प्रासंगिकता है?

एनएसडीजी (नेशनल ई-गवर्नेंस सर्विस डिलीवरी गेटवे) एक मानक आधारित मध्यस्थ है विभागीय एप्लीकेशन के बीच सुरक्षित और पारस्परिक संदेश भेजने का। अधिक जानकारी http:nsdg.gov.in से ले सकते हैं।
एसएसडीजी का पूरा नाम है स्टेट ई-गवर्नेंस सर्विस डिलीवरी गेटवे। एसएसडीजी एनएसडीजी का उत्पादक संस्करण है। एसएसडीजी परिकल्पित है राज्य स्तर पर राज्य के एप्लीकेशन के बीच संदेश आदान-प्रदान करने में असरदार तरीके से लगाया जाता है। एनएसडीजी का दृष्टकोण केंद्रीय एमएमपी और संबंधित मंत्री इसकी सेवा ले सकते हैं। राज्य का गेटवे राज्य के डाटा सेंटर्स में इंस्टाॅल किया जाता है और राज्य के सभी विभाग और संबंधित मंत्री इसकी सेवा ले सकते हैं। राज्य के गेटवे और नेशनल गेटवे मिलकर एक ऐसा गेटवे बनाएंगे जो पूरे देश के विभिन्न विभागों को जरूरतों के अनुसार सेवा दे सके। 
अधिक जानकारी :/www.nsdg.gov.in/administration/faq.jsp पर भी ले सकते हैं

8. एनडीसी और एसडीसी क्या है? ये हमारे लिए किस तरह प्रासंगिक हैं?

नेशनल ई-गवर्नेंस प्लान (एनईजीपी), राज्य डाटा सेंटर्स (एसडीसी) देश के सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में स्थापित किया गया है जो विभिन्न राज्यों के विभागों को जी2जी (सरकार से सरकार), जी2सी (सरकार से नागरिक) और जी2बी (सरकार से बिजनेस) के लिए उनके एप्लीकेशन की सेवा ले सकें। 
नेशनल डाटा सेंटर का प्रबंधन एनआईसी करती है, ये एसडीसी के लिए डिजास्टर रिकवरी (डीआर) साइट के रूप में भी काम करती है। सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट के अंतर्गत काम शुरू होने पर सीएएस (राज्य) में इन डाटा सेंटर के मेजबान के रूप में रहेगा।

9. कनेक्टिविटी के लगातार नुकसान होने पर इनबिल्ट क्या प्रावधान है? कनेक्टिविटी नुकसान का डाटा स्टोर के एप्लीकेशन पर क्या प्रभाव पड़ता होगा? क्या हम ऑफलाइन एप्लीकेशन का ही उपयोग कर सकते हैं?

सीएएस को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही तरीके से चलाने के तरीके से डिजाइन किया गया है। जब सिस्टम की कनेक्टिविटी चली जाती है तो एप्लीकेशन ऑफलाइन मोड में चला जाता है। इस दौरान सभी डाटा एक कम्प्यूटर में स्टोर हो जाता है जो सर्वर के रूप में काम करता है। जब कनेक्टिविटी आ जाती है तब एप्लीकेशन सिंक्रोनाइजेशन के तरीके से डाटा एसडीसी को ट्रांसफर कर देता है। वहीं ऑनलाइन तरीके में, सीएएस स्वत: स्टेट डाटा सेंटर से सिक्रोनाइज होकर सही डाटा भेजने के लिए आश्वस्त करता है। जब कनेक्टिविटी आ जाती है तब उपयोगकर्ता को ऑनलाइन मोड में ले आता है।

10.. पुलिस स्टेशन में सुचारु संचालन के लिए कम्प्यूर से जुड़े पर्याप्त संसाधनों (कम्प्यूटर, प्रिंटर भी शामिल) की जरूरत पड़ती है क्या?

इस प्रोजेक्ट के तहत, प्रत्येक राज्य के लिए पर्याप्त संख्या में जरूरी हार्डवेयर स्वीकृत किया गया है ताकि सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट का सुचारु संचालन हो सके। राज्यों जो हार्डवेयर उपलब्ध करवाए गए हैं, उनमें कम्प्यूटर, प्रिंटर, यूपीएस, जनरेटर, स्केनर, नेटवर्किंग के उपकरण, कंज्यूमेबल्स आदि।

11. तकनीक और इस बदलाव के प्रबंधन में पुलिस कर्मचारियों के कौशल का बढ़ाने के दौरान किस तरह की चुनौतियां आ रही हैं? कुशल मानवशक्ति के अभाव को दूर करने को लेकर प्रोजेक्ट में क्या लक्ष्य है?

प्रोजेक्ट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है क्षमता निर्माण और बदलाव के लिए प्रबंधन। इसके तहत मंत्रालय ने पुलिस कर्मचारियों की ट्रेनिंग कोर्स जैसे, बेसिक आईटी, सिस्टम एडमिनिस्ट्रेशन, नेटवर्किंग आदि को अनिवार्य कर दिया है। एनसीआरबी भी समय-समय पर प्रशिक्षकों को ट्रेनिंग (टीओटी) आयोजित करता है। प्रत्येक राज्य का सिस्टम इंटीग्रेटर भी कर्मचारियों को उनकी भूमिका के अनुसार ट्रेनिंग देने के साथ रीफ्रशर कोर्स भी आयोजित करता है।

12. पुलिस कर्मचारी सीएएस एप्लीकेशन और फील्ड के काम के बीच समय को कैसे मैनेज करेंगे? पुलिस कर्मचारी कैसे इस जरूरी बदलाव को लेंगे और एप्लीकेशन के तहत उन्हें जो भूमिका दी गई है, उस पर खरा उतरेंगे?

पुलिस कर्मचारी सीएएस एप्लीकेशन और फील्ड के काम के बीच समय को कैसे मैनेज करेंगे? पुलिस कर्मचारी कैसे इस जरूरी बदलाव को लेंगे और एप्लीकेशन के तहत उन्हें जो भूमिका दी गई है, उस पर खरा उतरेंगे?

13. क्या प्रोजेक्ट में बाहरी एजेंसियों जैसे स्टेट डीआईटी, बीएसएनएल, स्वान ऑपरेटर आदि से संचार और समन्वय महत्वपूर्ण है? किस अंतराल में समन्वय बैठक आयोजित करना है?

प्रोजेक्ट की सफलता विभिन्न घटकों जैसे सॉफ्टवेयर, नेटवर्क, स्टेट डाटा सेंटर, स्वान आदि से बिना बाधा बातचीत पर निर्भर है। इसलिए यह जरूरी है कि सभी एजेंसी मिलकर काम करें और निर्धारित समय पर बैठक कर किसी बकाया समस्या काे हल करे और यह सुनिश्चित करे कि प्रोजेक्ट का क्रियान्वयन तय समय पर ही हो। इन बैठकों का अंतराल जरूरत के अनुसार साप्ताहिक, पाक्षिक या मासिक हो सकता है या प्रोजेक्ट के क्रियान्यवन के चरण के आधार पर हो सकता है।

14. राज्य में प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के परिप्रेक्ष्य में डिस्ट्रिक्ट ई-मिशन टीम (डीईएमटी) की क्या भूमिका और जिम्मेदारी है?

इस प्रोजेक्ट का विकेंद्रीकृत मॉडल के आधार पर क्रियान्वयन किया जाएगा। इस नजरिए से प्रत्येक डिस्ट्रिक्ट ई-मिशन टीम संबंधित जिलों के सभी पुलिस स्टेशन और उच्च अधिकारियों तक प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन की निगरानी करेगी। 
डीईएमटी के कुछ काम इस तरह हैं:
डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट के प्रस्ताव को तैयार करना।
प्रत्येक चयनित पुलिस स्टेशन में प्रोजेक्ट सही तरीके से लागू हो, यह सुनिश्चित करना।
हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर स्थापित करना और प्रोजेक्ट का संचालन करना
जिले के सभी पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग
सभी जरूरतों के अनुसार साइट की उपलब्धता और उसे तैयार करना 
प्राेजेक्ट के लिए अलग खाता सुनिश्चित करना
दस्ते की नियुक्ति और कर्मचारियों का सही उपयोग
बेहतर प्रदर्शन करने वालों की पहचान करना

15. पुलिस स्टेशन की दिन-ब-दिन की गतिविधियों की निगरानी में एप्लीकेशन किस तरह सहायक होता है?

एप्लीकेशन में भूमिका आधारित एक्सेस दी गई है और सिस्टम में प्रत्येक उपयोगकर्ता की कार्य को स्पष्ट तरीके से निर्धारित किया गया है। यह एप्लीकेशन सभी गतिविधियों की प्रभावी तरीके से निगरानी की कई तरीके से रिपोर्ट तैयार कर सकता है। 
इसे और बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव 
1. नए रंगरुटों के लिए पीटीएस/पीटीसी स्तर पर ट्रेनिंग के लिए किस तरह के पाठ्यक्रम शामिल किए गए हैं?
नए रंगरुटों को कम्प्यूटर की बेसिक ट्रेनिंग देनी ही है जिसमें ऑफिस के उपकरणों की समझ के साथ उन्हें बताना है कि पुलिस की कार्यप्रणाली में सूचना तकनीक की विस्तृत भूमिका है। पुलिस विभाग के मौजूदा विरासत का परिचय करवाने के साथ ही ट्रेनिंग के पाठ्यक्रम में सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट के बारे में भी बताना है। 
2. विरास्त प्रणाली क्या है?
विरासत प्रणाली एक पुराना/प्रचलन से बाहर हो चुकी तकनीक या एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर है।
3. बेसिक आईसीटी कोर्स की निश्चित अवधि क्या है? क्या तीन दिन का प्रशिक्षण पर्याप्त है कम्प्यूटर और सॉफ्टवेयर के उपयोग के बारे में बताने के लिए?
बेसिक आईसीटी कोर्स कम से कम 60-80 घंटे की होनी चाहिए। सिस्टम इंटीग्रेटर ट्रेनिंग की जरूरतों का विश्लेषण कर प्रशिक्षण के समय और पाठ्यक्रम बताता है और उसी के हिसाब से पाठ्यक्रम में बदलाव किया जाता है। 
4. डीटीसी/पीटीएस/पीटीसी/आरपीटीसी स्तर पर प्रशिक्षण के दौरान ग्रुप ए, बी और सी के अधिकारियों के पाठ्यक्रम में कोई अंतर रहता है क्या? (ग्रुप ए, बी और का प्रशिक्षण डीटीसी/पीटीएस/पीटीसी/आरपीटीसी स्तर प्रस्तावित है) ग्रुप ए, बी और सी के लिए प्रस्तावित ट्रेनिंग कार्यक्रम इस तरह है:
1. ग्रुप ए- बदलाव प्रबंधन, प्रोजेक्ट प्रबंधन और दस्तावेज प्रबंधन सिस्टम और रिपोर्टिंग की नीति
2. ग्रुप बी- बदलाव का प्रबंधन, टीम वर्क कौशल, प्रोजेक्ट प्रबंधन, बेसिक आईटी, सीसीटीएनएस नीति, इंफाेरमेशन सिक्योरिटी, डाटाबेस नेटवर्किंग, एमआईएस, ट्रैफिक मॉड्यूल, फॉरेंसिंक मॉड्यूल, सीएएस कोर मॉड्यूल
3. ग्रुप सी- बदलाव का प्रबंधन, टीम वर्क कौशल, प्रोजेक्ट प्रबंधन, बेसिक आईटी, सीसीटीएनएस नीति, ट्रैफिक मॉड्यूल, फॉरेंसिंक मॉड्यूल, सीएएस कोर माड्यूल
5. बदलाव का प्रबंधन क्या है?
किसी भी व्यक्ति, टीम और संगठन में वर्तमान अवस्था से वांछित भविष्य की अवस्था में परिवर्तन/संक्रमण काल में अपनाए जाने वाले दृष्टकोण को बदलाव का प्रबंधन या चेंज मैनेजमेंट कहते हैं। यह एक संगठनात्मक प्रक्रिया है जिसका लक्ष्य बदलाव के दौरान उसमें शामिल हिस्सेदारों को उसी माहौल में उसे स्वीकार कर लेना है। सीएएस सभी पुलिस स्टेशन/उच्च अधिकारी उस बदलाव को अनिवार्य रूप से सफलतापूर्वक उसे स्वीकार कर लें।
6. डीटीसी/पीटीसी/पीटीसी/आरपीटीसी स्तर पर क्या हम सीएएस ऑफलाइन ट्रेनिंग को लागू कर सकते हैं?
हां, सीएएस ऑफलाइन कर्मचारियों के प्रशिक्षण के लिए राज्य के ट्रेनिंग सेंटर में इंस्टॉल किया जा सकता है।
7. बेसिक कम्प्यूटर आईटी नॉलेज के कोर्स में क्या सामग्री होनी चाहिए? क्या स्थानीय भाषा में टाइपिंग को ट्रेनिंग के पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से लागू किया जा सकता है?
राज्य ट्रेनिंग के पाठ्यक्रम में स्थानीय भाषा को शामिल कर सकता है। बेसिक कम्प्यूटर आईटी नोलेज ट्रेनिंग कोर्स से संबंधित जानकारी के लिए कृपया संलग्नक 1 में जाएं।
8. ट्रेनिंग के दौरान थ्योरी पर कितना जोर दिया जाता है और प्रैक्टिकल/अभ्यास के लिए कितना समय दिया जाता है?
अभ्यास/प्रैक्टिल ट्रेनिंग महत्वपूर्ण है और राज्य इस तरह के ट्रेनिंग को पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से शामिल करता है। प्रत्येक थ्योरी सत्र को प्रैक्टिकल सत्र सहयोग करता है प्रशिक्षण केंद्र इसे आश्वस्त करेगा कि प्रत्येक प्रशिक्षु अत्यधिक लाभांवित हुआ। 
9. रिफ्रेशर काेर्स कितने अंतराल में आयोजित करना है?
रिफ्रेशर कोर्स कम से कम तीन महीने में एक बार आयोजित होना ही चाहिए (शुरुआत में आदर्श स्थिति में हर महीने)।
10. रिफ्रेशर कोर्स का आयोजन कौन करेगा?
सिस्टम इंटीग्रेटर और एनसीआरबी, एससीआरबी स्तर या क्षेत्रीय स्तर पर प्रशिक्षकों के लिए ट्रेनिंग (टीओटी) आयोजित करेगा और प्रशिक्षक जो टीओटी में शामिल हुए थे वे पुलिस कर्मचािरयों को ट्रेनिंग देकर उनके लिए रिफ्रेशर कोर्स चलाएंगे। 
11. सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट को लेकर जागरुकता लाने कोई नियमितकालीन पत्रिका/प्रकाशन होगा और प्रोजेक्ट को लेकर देशभर की गतिविधियों के अपडेट को साझा किया जाएगा?
हां, राज्यों को सुझाव दिया गया है कि सभी पुलिस कर्मचारियों में नियमित अंतराल में पत्रिका भेजी जाए। इसमें सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट को लेकर जागरुकता लाने के साथ चेंज मैनेजमेंट में भी सहयोग होगा। इसके अतिरिक्त, नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की वेबसाइट में भी सभी नवीनतम जानकारी और प्रोजेक्ट की स्थिति से संबंधित जानकारी रहेगी। 
वेबसाइट तक इस लिंक के माध्यम से भी पहुंच सकते हैं http://ncrb.gov.in/cctns.htm
12. सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट के तहत आयोजित होने वाले ट्रेनिंग कार्यक्रम में बहुत अच्छा प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं को कोई प्रोत्साहन दिया जाता है?
एनसीआरबी की ओर से राज्यों को सुझाव दिया गया है कि ट्रेनिंग में बहुत अच्छा प्रदर्शन करने वालों को प्रशस्ति पत्र, अवार्ड, राशि क्षतिपूर्ति आदि दे। उच्च अधिकारी जैसे जिले के एसपी या एसएसपी के हाथों से सभी प्रशिक्षुआें को सर्टिफिकेट प्रदान किया जाए।
13. राज्य में सीएएस लागू करने के लिए पायलट फेज कैसे होता है?
प्रत्येक राज्य पहले पायलट जिलों में सीएएस लागू करने की शुरुआत करेगा। सभी राज्यों में एक या उससे अधिक जिलों की पहचान प्रोजेक्ट के लिए पायलट जिलों के रूप में होगा। पायलट जिलों में लागू करने के दौरान जो सिखने को मिलता है, उसे राज्य के अन्य जिलों में लागू करने की प्रक्रिया के दौरान उसमें सुधार और बेहतर करेगा। 
14. देशभर में कम्प्यूटर सिस्टम में कनेक्टिविटी कैसे आश्वस्त की जाती है? 
सीसीईए नोट के अनुसार, जहां भी उपलब्ध और संभव हो, स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (स्वान) और नेशनल इंफोर्मेटिक्स सेंटर्स एनआईसीएनईटी कनेक्टिविटी उपलब्ध करवाएगा, जो ज्यादा सुरक्षित होगा। पुलिस स्टेशन और अन्य फील्ड अधिकारियों को ब्रॉडबैंड, लीज लाइन और वीपीएनओबीबी (वीपीएन ओवर ब्रॉडबैंड) के माध्यम से क्षितिज समानांतर कनेक्टिविटी उपलब्ध करवाना आश्वास्त किया जाएगा। जहां कनेक्टिविटी अस्थायी हों वहां वाईमैक्स या वीएसएटी (वेरी स्मॉल एपेरेटर टर्मिनल) के माध्यम से बैकअप उपलब्ध करवाया जाएगा। स्टेट और नेशनल स्तर पर एनसीआरबी द्वारा इस प्रोजेक्ट की रािश के साथ फिर से मिलने वाले फंड से स्थापित स्टेट डाटा सेंटर, पुलिस डाटा सेंटर, एनआईसी डाटा सेंटर या डाटा सेंटर में स्थायी सक्षम सर्वर की व्यवस्था करना भी प्रस्तावित है। 15. इस एप्लीकेशन के उपयोग से कैसे अपराध और अपराधी पर नजर रख सकते हैं?
कोर एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (सीएएस) एक प्लेटफॉर्म तैयार करता है, राज्य विशेष के एप्लीकेशन में वहां और आसपास के अपराध और अपरािधयों की जानकारी राज्य के पुलिस स्टेशनों में उपलब्ध करवाता है। केंद्र (जीओआई/एनसीआरबी) स्तर पर एप्लीकेशन राज्यों में इकट्‌ठा किया गया डाटा को स्वीकार कर उन्हें व्यवस्थित करता है। राज्य स्तर पर एप्लीकेशन पुलिस स्टेशन, उच्च अधिकारियों और पुलिस के अन्य संगठनों से डाटा इकट्‌ठा करता है और केंद्र की जरूरत के अनुसार उसे एनसीआरबी से साझा करता है। इसमें एनसीआरबी द्वारा तैयार एकीकृत परीक्षण फॉर्म में विशेष डाटा भी शामिल है। सीएएस नागरिकों के साथ भी नियंत्रित और बाहरी तत्वों से सुरक्षित और नियंत्रित पहुंच कई मामलों जैसे पासपोर्ट, आव्रजन, मोटर गाड़ी आदि में सहायता प्रदान करता है।
16. सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर और ट्रबल-शूटर कोर्स कौन कर सकता है?
राज्य सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर की ट्रेनिंग के लिए कर्मचारी की पहचान करेगा और न्यूनतम योग्यता और प्रक्रिया तय करेगा। उदाहरण के लिए, वह कर्मचारी जो बेसिक और एडवांस आईटी कोर्स कर चुका है, ऐसे कोर्स के लिए उसके नाम की अनुशंसा कर सकता है।
17. सीसीटीएनएस कैसे सीआईपीए और सीसीआईएस से बेहतर है?
कॉमन इंटीग्रेटेड पुलिस एप्लीकेशन (सीआईपीए) कार्यक्रम वर्ष 2004-05 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने “राज्य पुलिस फोर्स के आधुनिकीकरण (एमपीएफ)” योजना के तहत लाया था। यह बहुत ही सीमित उपयोग और अकेला सिस्टम था सीसीटीएनएस के मुकाबले। सीसीटीएनएस का लक्ष्य कार्यकारी एप्लीकेशन को बढ़ाना, कार्यक्षेत्र को और विस्तृत करना और नेटवर्किंग क्षमताओं का निर्माण करना है। यह दोनों ही मैनेजमेंट इंफोरमेशन सिस्टम (एमआईएस) की जरूरतों और संग्रहण, तुलना करना, विश्लेषण और थाने, जिला, राज्य और केंद्र स्तर पर अपराध और अपराधियों से जुड़ी जानकारी को आगे बढ़ाना/साझा करना है। 
एनसीआरबी का क्राइम क्रिमिनल इंफोरमेशन सिस्टम (सीसीआईएस) राष्ट्रीय स्तर पर सभी राज्यों से साझा अपराध और अपरािधयों का डाटाबेस बनाने का बड़ा प्रयास है। सिस्टम इंटीग्रेटेड इंवेस्टीगेशन इनपुट फॉर्म के सात बिन्दु जो एफआईआर, अपराध का विवरण, गिरफ्तारी/समर्पण, संपत्ति की खोज और जब्त, अंतिम रिपोर्ट/चार्जशीट, कोर्ट में निराकरण, अपील के परिणाम पर आधारित है। हालांकि डाटा एंट्री जिला स्तर पर थानों में मैनुअली फॉर्म भरा जाता है, जो सीसीटीएनएस से बड़ा अंतर है।
18. सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद सीआईपीए और सीसीआईएस सिस्टम से इकट्‌ठा किए गए डाटा का क्या होगा?
सीआईपीए और सीसीआईएस सिस्टम में उपलब्ध सारा डाटा सीसीटीएनएस के डाटाबेस में चला जाएगा। उपयोगिता के आधार पर इसे सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट एजेंसी (एसडीए) विकसित करेगी।
19. डाटा के डिजिटाइजेशन की क्या प्रासंगिकता है? प्रोजेक्ट में इसे किस तरह उपयोग किया जाएगा?
डाटा डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया में उन ऐतिहासिक आंकड़ों को डिजिटल तरीके में बदलेंगे जो भौतिक स्वरूप में है। डाटा डिजिटाइजेशन में केस डायरी से संबंधित सभी दस्तावेजों को डिजिटल तरीके में रखा जाएगा। आईआईएफआई से आईआईएफ7 के डाटा को डिजिटल तरीके में करना अनिवार्य है। एक बार सभी प्रासंगिक आंकड़ों काे डिजिटल तरीके में बदल दिया जाएगा तो उसके बाद डाटा को मैनुअली रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे बहुत समय की बचत होगी और पुलिस की कार्यप्रणाली काे और कुशल बना देगी।
20. पुलिस स्टेशन में पुलिसकर्मियों की मदद करने वाला कौन होगा और वह कैसे मदद करेगा?
सीसीटीएनएस जिले में चरणबद्ध तरीके से लागू होने के बाद सिस्टम इंटीग्रेटर पुलिस थानों में मदद के लिए एक व्यक्ति को नियुक्त करेगा। वह व्यक्ति पुलिसकर्मियों को दैनंदिनी के कामकाज के साथ अाईटी संबंधी और सीएएस को ऑपरेट करने में मदद करेगा। इस मददगार व्यक्ति की नियुक्ति छह महीने से एक साल तक की हो सकती है, यह निर्भर करता है, उसे एक थाने की जिम्मेदारी दी गई है या दो थानों की।
21. कम्प्यूटर सिस्टम/सीएएस के काम नहीं करने संबंधी कोई मामला आता है जो किससे संपर्क करना होगा? अगर कनेक्टिविटी को लेकर कोई समस्या आती है तो क्या करना होगा? इस तरह के समस्या में क्या फिर से मैनुअल प्रक्रिया में वापस जाना पड़ेगा?
पुलिसकर्मी मदद के लिए थानों में नियुक्त व्यक्ति से सहयोग ले सकते हैं अौर हार्डवेयर संबंधी कोई मामला होने पर सिस्टम इंटीग्रेटर से संपर्क किया जा सकता है। कनेक्टिविटी को लेकर समस्या होने पर कर्मचारी सिस्टम इंटीग्रेटर हेल्पडेस्क से संपर्क कर सकते हैं, जो समस्या को दूर करने के लिए स्थानीय बीएसएनएल टीम से संपर्क करेगा।
जब नेटवर्क कनेक्टिविटी नहीं होगी, उस दौरान एप्लीकेशन ऑफलाइन मोड में चला जाएगा और पुलिस स्टेशन की गतिविधियां सामान्य तरीके से चलती रहेंगी। बीएसएनएल द्वारा सुधार के दौरान कनेक्टिविटी चली जाती है जो ऐसे केस में एप्लीकेशन काम करता रहेगा और यह ऑफलाइन मोड में चला जाएगा। इस दौरान सभी डाटा एक कम्प्यूटर में संग्रह हो जाएगा जो सर्वर की तरह काम करेगा। जब कनेक्टिविटी आ जाएगी तो एप्लीकेशन एसडीसी के साथ मिलकर डाटा ट्रांसफर कर देगा। कोई भी डाटा मैनुअली संग्रह कर रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
22. सीसीटीएनएस में बताया गया कि सभी पुलिस स्टेशन को चार कम्प्यूटर दिए जाएंगे। अगर इंक्वायरी ऑफिसर की संख्या चार से अधिक हो तो क्या करना होगा?
जांच अधिकारियों की संख्या चार से अधिक होने पर, बाकी के जांच अधिकारी मौजूद कम्प्यूटर सिस्टम का उपयोग करेंगे या चार सिस्टम का जरूरत के हिसाब से बारी-बारी उपयोग करेंगे। 
23. क्या हम सॉफ्टवेयर में अपराधियों के फिंगर प्रिंट स्टोर कर रख सकते हैं?
सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट के तहत, प्रोजेक्ट के चयनित जगह पर आटोमेटेड फेशियल रीकोगनेशन सिस्टम (एएफआरएस) लागू किया जाएगा, जिससे स्वत: व्यक्ति की पहचान और पुष्टि डिजिटल तस्वीर, फोटो, डिजिटल स्केच, वीडियो फ्रेम और वीडियो स्रोतों से चेहरे की चयनित विशेषता की तुलना पहले से मौजूद डाटाबेस की तस्वीर से करने से हो जाएगा। 
फिंगरप्रिंट नामांकन उपकरण: फिंगरप्रिंट इनरोलमेंट डिवाइस (एफईडी) का उद्देश्य आरोपियों, बंदी, संदिग्ध और अपराध से जुड़े अन्य व्यक्तियों जिनकी जरूरत कानून के अनुसार रिकॉर्ड सत्यापन/प्रमाणित करने में पड़ती है, उनका नामांकन करना है और फिंगरप्रिंट के मिलान/सत्यापन के दौरान उसे पढ़ने/सवाल उठता है। फिंगरप्रिंट नामांकन तंत्र के माध्यम से लेते हैं या घटना स्थल या उससे जुड़े अन्य स्थान से भी लेते हैं। 
24. अगर बिजली न हो तो सिस्टम कैसे काम करेगा?
प्रत्येक पुलिस स्टेशन को 2केवीए का जनरेटर सेट और यूपीएस उपलब्ध करवाया जाएगा, जो बिजली सप्लाई बाधित होने पर सिस्टम को चलाने के लिए बिजली उपलब्ध करवाएंगे।
25. अगर हम मैनुअल सिस्टम में आरामदेह हैं तो फिर इस एप्लीकेशन का उपयोग क्यों करेंगे?
सीसीटीएनएस को आगे चलकर जेल और कोर्ट से एकीकृत किया जाएगा। इस एकीकरण प्रक्रिया का हिस्सा होने के कारण कोर्ट को जानकारी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजनी होगी और यह अनिवार्य जरूरत होगी। कुछ राज्यों में तो कोर्ट की जरूरतों के अनुसार, शिकायत या एफआईआर से संबंधित जानकारी अगले दिन ही पुलिस की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाती है। सीसीटीएनएस लागू होने के बाद, नागरिक सीधे इंटरनेट की मदद से अपने केस और एफआईआर की स्थिति को देखने में सक्षम होंगे।
26. डिस्ट्रिक्ट ई-मिशन टीम (डीईएमटी) की क्या भूमिका रहेगी?
डिस्ट्रिक्ट ई-मिशन टीम (डीईएमटी) में जिले के एसएसपी/एसपी शामिल होंगे जो अध्यक्ष हों, डीसीआरबी, एनआईसी के जिला केंद्र के एक-एक अधिकारी और जिला पुलिस के अधिकारी जिसे कम्प्यूटर का ज्ञान है, प्रगति की समीक्षा, कोई मामला पेंडिंग हो तो उस पर काम करेंगे और सभी जरूरत के अनुसार साइट तैयार कर उपलब्ध करवाएंगे। सिस्टम इंटीग्रेटर को डीईएमटी मदद देगी या इसके प्रतिनिधि और पुलिस स्टेशन/उच्च अधिकारियों के लिए कमरे और साइट तैयार करने की गतिविधियों में मदद करेगी। डीईएमटी के प्रतिनिधि सिस्टम इंटीग्रेटर के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर पुलिस स्टेशन और उच्च अधिकारियों के यहां कम्प्यूटर/सिस्टम स्थापित करने कमरे के भौतिक स्थान का चयन करेंगे। लाइसेंस सर्टिफिकेट और उपकरण स्टोरेज के लिए भी डीईएमटी साइट सर्वे रिपोर्ट के आधार पर अनुशंसा करेगी (यदि हो तो)। सिस्टम इंटीग्रेटर डीईएमटी से हरी झंडी मिलने के बाद साइट तैयार करता है। डीईएमटी स्टाफ यह सुनिश्चित करते हैं कि जमीन पर अलग से गड्‌ढे तैयार हो गए हैं और एसआई की भूमिगत तैयारियों के लिए अन्य जरूरतों को पूरा करना है। डीईएमटी एक बार हरी झंडी दे देती है तब साइट तैयार करने का काम जरूरतों के अनुसार पूरा किया जाता है, आरएफपी दस्तावेजों में उसका उल्लेख होता है। डीईएमटी के सदस्य आरएफपी के अनुसार सिस्टम इंटीग्रेटर की अनुशंसा पर यह सुनिश्चित करते हैं कि कम्प्यूटर और सहायक उपकरण जैसे कम्प्यूटर टेबल और फर्निचर लग गए हैं। 
27. प्री-गो-लाइव स्टेज, गो-लाइव स्टेज अौर ओ एंड एम फेज में क्या अंतर है?
प्री गो-लाइव सीसीटीएनएस लागू करने के परिप्रेक्ष्य में उस चरण में चयनित प्रत्येक जिले के पुलिस स्टेशन/उच्च अधिकारियों के यहां निम्न गतिविधियां कम से कम 50% पूरा करने और स्वीकार करने से है। इसमें डाटा स्थानांतरण/डिजिटाइजेशन कैपिसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम चयनित कर्मचारियों के लिए, लक्ष्य किए गए कर्मचारियों के लिए बदलाव के प्रबंधन की पहल, साइट तैयार कर सौंपना और क्लाइंट की तरफ से नेटवर्किग की अधोसंरचना तैयार करना शामिल है। गो-लाइव सीसीटीएनएस लागू करने के परिप्रेक्ष्य में उस चरण में लक्ष्य किए गए जिलों में पुलिस स्टेशन/उच्च अधिकारियों के यहां िनम्न कार्य 100% पूरा करने और स्वीकार करने से है। इसमें डाटा स्थानांतरण/डिजिटाइजेशन कैपिसिटी बिल्डिंग प्राग्राम लक्ष्य किए गए कर्मचारियों को, लक्ष्य किए गए कर्मचारियों के लिए बदलाव के प्रबंधन की पहल, साइट तैयार कर सौंपना और क्लाइंट की तरफ से नेटवर्किंग अधोसंरचना तैयार करना, कॉन्फिगर करना, विशिष्ट रूप से निर्मित करना और सीएएस (राज्य) को विस्तृत करना शामिल है। पुलिस स्टेशन/उच्च अधिकारी पूरी तरह से नए एप्लीकेशन में आ गए हों और पुलिस स्टेशन और उच्च अधिकारी कार्यालय के कर्मचारी सफलतापूर्वक इसमें काम करने लगे।
संचालन और संधारण चरण:
अंतिम जिले में गो-लाइव के बाद तीन साल तक संचालन और संधारण चरण रहेगा। इस चरण में सिस्टम इंटीग्रेटर हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर आदि से जुड़े सभी जरूरी मुद्दों में मदद करेगा। सिस्टम इंटीग्रेटर यह सुनिश्चित करेगा कि सीएएस सिस्टम सही तरीके से काम कर रहा है और संचालन व संधारण चरण में बिजनेस नियमितता बरकरार है।
संलग्नक-1
आईटी बेसिक-1
(20 घंटे)
लक्षित समूह: कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल और नीचे के कर्मचारी जो पुलिस स्टेशन और जिले में कम्प्यूटर के प्राथमिक उपयोगकर्ता हैं
सीखने का उद्देश्य:
आईटी के प्रति व्यवहारिक प्रेरणा विकसित करने
कम्प्यूटर संचालन की प्राथमिक कौशल विकसित करना
विंडो/लिनक्स/विस्टा की बुनियादी समझ हो
एमएस वर्ड, वेब ब्राउजर, ईमेल और इंटरनेट के बुनियादी कार्य का कौशल हो
साधारण समस्याओं को दूर करने की तकनीक 
काम के प्रति सकारात्मक रवैया विकसित करने के लिए
निर्देशात्मक पद्धति: क्लासरूम लेक्चर के साथ अनुभव और काम। 
पाठ्यक्रम सामाग्री:
कम्प्यूटर- कम्प्यूटर का विवरण और सिस्टम (दो घंटे)
ए. कम्प्यूटर सिस्टम के तत्व, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर
बी. कम्प्यूटर का रूप, सीपीयू, मेमोरी, इनपुट/आउटपुट उपकरण
सी. माउस और कीबोर्ड
डी. माउस का उपयोग (सिंगल और डबल क्लिक और उनका काम)
ई. प्रिंटर, स्कैनर, मल्टी-फंक्शनल प्रिंटर
एफ. यूपीएस, जनरेटर
जी. सीडी, डीवीडी, यूएसबी ड्राइव (फ्लैश/पेन ड्राइव)
एच. विभिन्न प्रकार के केबल की पहचान करना
आई. नेटवर्किंग उपकरण- स्वीच, लेन केबल
जे. अप पीसी की सेटिंग- कम्प्यूटर के प्रत्येक घटक को जोड़ना जिसमें लेन भी शामिल है
के. काम शुरू करने से पहले और काम पूरा करने के बाद की प्रक्रिया को पूरा करना
एमएस विंडो एक्सपी/विस्टा/विंडो7/िलनेक्स- ऑपरेटिंग सिस्टम (6 घंटे)
ए. स्टार्ट, शटडाउन और रीस्टार्ट
बी. डेस्कटॉप, आईकॉन, रिसाइकिल बिन, माई कम्प्यूटर, माई डॉक्यूमेंट
सी. मिनिमाइज, मेक्सिमाइज, रिसाइजिंग और क्लोजिंग विडोज
डी. फाइल और फोल्डर, डायरेक्टरी ट्री, ड्राइव
ई. कॉपी/फोल्डर और ड्राइव के बीच फाइल को ले जाना
एफ. रीनेम, फाइल और फोल्डर डिलीट करना
जी. सर्च करना, फाइल और फोल्डर खोजना
एच. एक एप्लीकेशन शुरू करना और एक एप्लीकेशन को बंद करना
आई. टास्कबार- सेटिंग अप/ समय और तारीख बदलना
एमएस वर्ड (8 घंटे)
ए. नया वर्ड डॉक्यूमेंट बनाना
बी. पहले से मौजूद डॉक्यूमेंट को खोलना
सी. एक डॉक्यूमेंट में एडिटिंग करना और उसे सेव करना
डी. टेक्सट टाइप करना, डिलीट करना, इंसर्ट करना, खोजना, रिप्लेस करना, कॉपी करना और टेक्सट को दूसरी जगह ले जाना
ई. टेक्सट को जस्टीफाई करना
एफ. बोल्ड, ईटालिक, अंडरलाइन, स्ट्राइक, डबल स्ट्राइक और शब्दों में रंग भरना
जी. फॉण्ट का चयन और उसके साइज का चयन
एच. पेज को फॉर्मेट करना, मार्जिन रखना, पेज का साइज, पाेर्टेट और लेंडस्केप 
आई. संकेत और फोटो इंसर्ट करना
जे. बुलेट का प्रयोग
के. टेबल का प्रयोग, रो और कॉलम जोड़ना/डिलीट करना
एल. टेबल का वर्गीकरण करना
एम. हेडर और फूटर का प्रयोग, पेज नंबर डालना
एन. अक्षर की चौड़ाई को बदलना और स्पेस देना
ओ. डॉक्यूमेंट को प्रिंट करना, प्रिंट प्रीव्यू का प्रयोग
पी. दो अलग डॉक्यूमेंट में टेक्सट को कॉपी/ ले जाना
क्यू. एक ही टेक्सट में एक से अधिक भाषा में टाइप करना
आर. एमएस वर्ड में कई गतिविधियों के लिए शॉर्टकट
वेब ब्राउजर, ईमेल और इंटरनेट (2 घंटे)
ए. इंटरनेट से परिचय
बी. वेब सर्च करना
सी. ईमेल करना
ट्रबल शूटिंग (2 घंटे)
ए. कम्प्यूटर से संबंधित- पावर नहीं होना, विंडो स्टार्ट नहीं होना, विंडो हैंग होना
बी. प्रिंटर से संबंधित- प्रिंटर प्रिंट नहीं कर रहा है, प्रिंट अटक गया है, पेपर अटक रहा है, स्पष्ट प्रिंट नहीं हो रहा है, प्रिंटिंग गुणवत्ता खराब हो
सी. नेटवर्क से संबंधित- नेटवर्क काम नहीं कर रहा है, नेटवर्क में एक कम्प्यूटर नजर नहीं आ रहा हो
डी. पावर से संबंधित- यूपीएस काम नहीं कर रहा है, बैटरी चार्ज नहीं कर रहा है
आईटी बेसिक्स-II
(20 घंटे)
लक्षित समूह: सब इंस्पेक्टर, इंस्पेक्टर और पुलिस स्टेशन और जिले में कम्प्यूटर के प्राथमिक उपयोग करने वाले निजी स्टाफ
सीखने का उद्देश्य: 
आईटी के प्रति व्यवहारिक प्रेरणा विकसित करना
कम्प्यूटर ऑपरेट करने की प्राथमिक कौशल विकसित करना
विंडोज की बुनियादी समझ
एमएस वर्ड, एमएस एक्सेल और इंटरनेट/ईमेल पर काम करने की बुनियादी कौशल हो
साधारण समस्या उत्पन्न करने वाली तकनीक
काम के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना
जनता से सरलता से व्यवहार करने की बुनियादी कौशल विकसित करना
निर्देशात्मक पद्धति: क्लासरूम लेक्चर के साथ अनुभव और कार्य करने का मौका
पाठ्यक्रम सामग्री:
कम्प्यूटर- कम्प्यूटर का विवरण और सिस्टम (2 घंटे)
ए. कम्प्यूटर सिस्टम के घटक, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर
बी. कम्प्यूटर का रूप, सीपीयू, मेमोरी, इनपुट/आउटपुट डिवाइस
सी. माउस और कीबोर्ड
डी. माउस का उपयोग (सिंगल और डबल क्लिक और उनका काम)
ई. प्रिंटर, स्कैनर, मल्टी-फंक्शनल प्रिंटर
एफ. यूपीएस, जनरेटर
जी. सीडी, डीवीडी, यूएसबी ड्राइव (फ्लैश/पेन ड्राइव)
एच. विभिन्न प्रकार के केबल की पहचान करना
आई. नेटवर्किंग उपकरण- स्वीच, लेन केबल
जे. अप पीसी की सेटिंग- कम्प्यूटर के प्रत्येक घटक को जोड़ना जिसमें लेन भी शामिल है
के. काम शुरू करने से पहले और काम पूरा करने के बाद की प्रक्रिया को पूरा करना
एमएस विंडो एक्सपी – ऑपरेटिंग सिस्टम (2 घंटे)
ए. स्टार्ट, शटडाउन और रीस्टार्ट
बी. डेस्कटॉप, आईकोन, रिसाइकिल बिन, माई कम्प्यूटर, माई डॉक्यूमेंट
सी. मिनिमाइज, मेक्सिमाइज, रिसाइजिंग और क्लोजिंग विडोज
डी. फाइल और फोल्डर, डायरेक्टरी ट्री, ड्राइव
ई. कॉपी/फोल्डर और ड्राइव के बीच फाइल को ले जाना
एफ. रीनेम, फाइल और फोल्डर डिलीट करना
जी. सर्च करना, फाइल और फोल्डर खोजना
एच. एक एप्लीकेशन शुरू करना और एक एप्लीकेशन को बंद करना
आई. टास्कबार- सेटिंग अप/ समय और तारीख बदलना
एमएस वर्ड (6 घंटे)
ए. नया वर्ड डॉक्यूमेंट बनाना
बी. पहले से मौजूद डॉक्यूमेंट को खोलना, एक डॉक्यूमेंट में एडिटिंग करना और उसे सेव करना
सी. टेक्सट टाइप करना, डिलीट करना, इंसर्ट करना, खोजना, रिप्लेस करना, कॉपी करना और टेक्सट को दूसरी जगह ले जाना
डी. टेक्सट को जस्टीफाई करना
ई. बोल्ड, ईटालिक, अंडरलाइन, स्ट्राइक, डबल स्ट्राइक और शब्दों में रंग भरना
एफ. फॉण्ट का चयन और उसके साइज का चयन
जी. पेज को फॉर्मेट करना, मार्जिन रखना, पेज का साइज, पाेर्टेट और लेंडस्केप 
एच. संकेत और फोटो इंसर्ट करना
आई. बुलेट लिस्ट का प्रयोग
जे. टेबल का प्रयोग, रो और कॉलम जोड़ना/डिलीट करना
के. टेबल का वर्गीकरण करना
एल. हेडर और फूटर का प्रयोग, पेज नंबर डालना
एम. अक्षर की चौड़ाई को बदलना और स्पेस देना
एन. डॉक्यूमेंट को प्रिंट करना, प्रिंट प्रीव्यू का प्रयोग
ओ. दो अलग डॉक्यूमेंट में टेक्सट को कॉपी/ ले जाना
पी. एक ही टेक्सट में एक से अधिक भाषा में टाइप करना
क्यू. एमएस वर्ड में कई गतिविधियों के लिए शॉर्टकट
एमएस एक्सेल (6 घंटे)
ए. नया वर्कशीट बनाना
बी. मौजूदा वर्कशीट को खोलना
सी. वर्कशीट में एडिट और सेव करना
डी. वर्कबुक में वर्कशीट बनाना, रीनेम और डिलीट करन
ा ई. डाटा के प्रकार (नंबर, अक्षर आदि)
एफ. सेल में प्रवेश करना
जी. सेल, रो और कॉलम को बदलना (डिलीट, इंसर्ट, खोजना, रीप्लेस, कॉपी और दूसरी जगह ले जाना)
एच. सेल में जस्टीफाई करना, सेल और कॉलम को मर्ज करना
आई. जोड़ना, घटाना और फॉर्मूला का उपयोग करना
जे. फॉण्ट और फॉण्ट साइज का चयन करना 
के. टेबल का प्रयोग, रो और कॉलम जोड़ना/डिलीट करना
एल. टेबल का वर्गीकरण करना
एम. हेडर और फूटर का प्रयोग, पेज नंबर डालना
एन. सेल, रो और कॉलम में बोर्डर और शेड डालना
ओ. पेज फाॅर्मेट करना, मार्जिन रखना, पेज साइज, पोर्टेट और लेंडस्कैप
पी. प्रिंटिंग एरिया सेलेक्ट करना, प्रिंट प्रीव्यू का प्रयोग करना, वर्कशीट और वर्कबुक को प्रिंट करन
ा क्यू. दो अलग-अलग वर्कशीट और वर्कबुक से टेक्सट को कॉपी/दूसरी जगह ले जाना
आर. चार्ट विजार्ड का उपयोग, विभिन्न प्रकार के चार्ट का निर्माण करना
एस. एमएस एक्सेल में कई गतिविधियों के लिए शॉर्टकट
वेब ब्राउजर और इंटरनेट (2 घंटे)
ए. इंटरनेट से परिचय
बी. वेब सर्च करना
सी. ईमेल करना
ट्रबल शूटिंग (2 घंटे)
ए. कम्प्यूटर से संबंधित- पावर नहीं होना, विंडो स्टार्ट नहीं होना, विंडो हैंग होना
बी. प्रिंटर से संबंधित- प्रिंटर प्रिंट नहीं कर रहा है, प्रिंट अटक गया है, पेपर अटक रहा है, स्पष्ट प्रिंट नहीं हो रहा है, प्रिंटिंग गुणवत्ता खराब हो
सी. नेटवर्क से संबंधित- नेटवर्क काम नहीं कर रहा है, नेटवर्क में एक कम्प्यूटर नजर नहीं आ रहा हो
डी. पावर से संबंधित- यूपीएस काम नहीं कर रहा है, बैटरी चार्ज नहीं कर रहा है
आईटी बेसिक-III
(20 घंटे – ट्यूशन मोड)
लक्षित समूह: वरिष्ठ अधिकारी जो एमआईएस के लिए कम्प्यूटर का उपयोग करते हैं और निर्णय लेने में भागीदार होते हैं
सीखने का उद्देश्य: 
कम्प्यूटर ऑपरेट करने की प्राथमिक कौशल विकसित करना
विंडोज की बुनियादी समझ
एमएस वर्ड, एमएस एक्सेल और और एमएस पावर प्वॉइंट पर काम करने की बुनियादी कौशल हो
इंटरनेट और ईमेल करने की बुनियादी कौशल हो
काम के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना
निर्देशात्मक पद्धति: क्लासरूम लेक्चर के साथ कम्प्यूटर में भी प्रैक्टिस
पाठ्यक्रम सामग्री:
कम्प्यूटर- कम्प्यूटर का अवलोकन और सिस्टम (20 मिनट)
ए. कम्प्यूटर सिस्टम के घटक, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर
बी. कम्प्यूटर का रूप, सीपीयू, मेमोरी, इनपुट/आउटपुट डिवाइस सी. माउस और कीबोर्ड
डी. माउस का उपयोग (सिंगल और डबल क्लिक और उनका काम)
ई. प्रिंटर, स्कैनर, मल्टी-फंक्शनल प्रिंटर
एफ. यूपीएस, जनरेटर
जी. सीडी, डीवीडी, यूएसबी ड्राइव (फ्लैश/पेन ड्राइव)
एच. नेटवर्किंग उपकरण- स्वीच, लेन केबल
एमएस विंडो एक्सपी – ऑपरेटिंग सिस्टम (40 मिनट)
ए. स्टार्ट, शटडाउन और रीस्टार्ट
बी. डेस्कटॉप, आईकोन, रिसाइकिल बिन, माई कम्प्यूटर, माई डॉक्यूमेंट
सी. मिनिमाइज, मेक्सिमाइज, रिसाइजिंग और क्लोजिंग विडोज
डी. फाइल और फोल्डर, डायरेक्टरी ट्री, ड्राइव
ई. फोल्डर और ड्राइव के बीच फाइल को कॉपी करना/ले जाना
एफ. रीनेम, फाइल और फोल्डर डिलीट करना
जी. सर्च करना, फाइल और फोल्डर खोजना
एच. एक एप्लीकेशन शुरू करना और एक एप्लीकेशन को बंद करना
आई. टास्कबार- सेटिंग अप/ समय और तारीख बदलना
एमएस वर्ड (2 घंटे)
ए. नया वर्ड डॉक्यूमेंट बनाना
बी. मौजूद डॉक्यूमेंट को खोलना, एक डॉक्यूमेंट में एडिटिंग करना और उसे सेव करना
सी. टेक्सट टाइप करना, डिलीट करना, इंसर्ट करना, खोजना, रिप्लेस करना, कॉपी करना और टेक्सट को दूसरी जगह ले जाना
डी. टेक्सट को जस्टीफाई करना
ई. बोल्ड, ईटालिक, अंडरलाइन, स्ट्राइक, डबल स्ट्राइक और शब्दों में रंग भरना
एफ. फॉण्ट का चयन और उसके साइज का चयन
जी. पेज को फॉर्मेट करना, मार्जिन रखना, पेज का साइज, पाेर्टेट और लेंडस्केप 
एच. संकेत और फोटो इंसर्ट करना
आई. बुलेट लिस्ट का प्रयोग
जे. टेबल का प्रयोग, रो और कॉलम जोड़ना/डिलीट करना
के. टेबल का वर्गीकरण करना
एल. हेडर और फूटर का प्रयोग, पेज नंबर डालना
एम. अक्षर की चौड़ाई को बदलना और स्पेस देना
एन. डॉक्यूमेंट को प्रिंट करना, प्रिंट प्रीव्यू का प्रयोग
ओ. दो अलग डॉक्यूमेंट के बीच टेक्सट को कॉपी करना/ ले जाना
पी. एक ही टेक्सट में एक से अधिक भाषा में टाइप करना
क्यू. एमएस वर्ड में कई गतिविधियों के लिए शॉर्टकट
एमएस एक्सेल (2 घंटे)
ए. नया वर्कशीट बनाना
बी. पहले से मौजूदा वर्कशीट को खोलना
सी. वर्कशीट में एडिट और सेव करना
डी. वर्कबुक में वर्कशीट बनाना, रीनेम और डिलीट करना
ई. डाटा के प्रकार (नंबर, अक्षर आदि)
एफ. सेल में प्रवेश करना
जी. सेल, रो और कॉलम को बदलना (डिलीट, इंसर्ट, खोजना, रीप्लेस, कॉपी और दूसरी जगह ले जाना)
एच. सेल में जस्टीफाई करना, सेल और कॉलम को मर्ज करना
आई. जोड़ना, घटाना और फॉर्मूला का उपयोग करना
जे. फॉण्ट और फॉण्ट साइज का चयन करना
के. टेबल का प्रयोग, रो और कॉलम जोड़ना/डिलीट करना
एल. टेबल का वर्गीकरण करना
एम. हेडर और फूटर का प्रयोग, पेज नंबर डालना
एन. सेल, रो और कॉलम में बोर्डर और शेड डालना
ओ. पेज फाॅर्मेट करना, मार्जिन रखना, पेज साइज, पोर्टेट और लेंडस्कैप
पी. प्रिंटिंग एरिया सेलेक्ट करना, प्रिंट प्रीव्यू का प्रयोग करना, वर्कशीट और वर्कबुक को प्रिंट करना 
क्यू. दो अलग-अलग वर्कशीट और वर्कबुक से टेक्सट को कॉपी/दूसरी जगह ले जाना
आर. चार्ट विजार्ड का उपयोग, विभिन्न प्रकार के चार्ट का निर्माण करना
एस. एमएस एक्सेल में कई गतिविधियों के लिए शॉर्टकट
एमएस पावरप्वॉइंट (4 घंटे)
ए. नया प्रजेंटेशन बनाना
बी. पहले से मौजूद प्रजेंटेशन को खोलना
सी. प्रजेंटेंशन में एडिटिंग करना और उसे सेव करना
डी. प्रजेंटेशन को फॉर्मेट करना – स्लाइड का लेआउट, स्लाइड की डिजाइन, स्लाइड का बैकग्राउंड
ई. प्रतीक, चार्ट, टेबल, फोटो, वीडियो और आॅडियो इंसर्ट करना
एफ. पेज नंबर, तारीख और टाइम इंसर्ट करना
जी. अलग-अलग तरीके से दिखना
एच. एनिमेशन तकनीक से स्लाइड शो तैयार करना
आई. स्लाइड, हैंडआउट और नोट को प्रिंट करना 
इंटरनेट (1 घंटे)
ए. इंटरनेट से परिचय
बी. वेब सर्च करना
सी. ईमेल करना
आईटी बेसिक (एडवांस उपयोगकर्ता के लिए) (40 घंटे)
लक्षित समूह: कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल और नीचले स्तर पर काम करने वाले जो कम्प्यूटर की जानकारी रखते हैं और जो दिन प्रति दिन के काम में कम्प्यूटर का उपयोग करते हैं और पुलिस स्टेशन और जिले में कम्प्यूटर के प्राथमिक उपयोगकर्ता हैं
सीखने का उद्देश्य:
आईटी के प्रति व्यवहारिक प्रेरणा विकसित करने
डाटा प्रबंधन के कौशल को विकसित करना
एमएस वर्ड, एमएस एक्सेल और डाटाबेस पर काम करने का एडवांस कौशल
डाटा प्रबंधन में आने वाले साधारण ट्रबल शूटर की जानकारी
निर्देशात्मक पद्धति: क्लासरूम लेक्चर के साथ कम्प्यूटर तकनीक में अभ्यास (2 घंटे)
ए. स्टोरेज डिवाइस का परिचय (इंटरनल और एक्सटर्नल), एसएएन
बी. कम्प्यूटर मेमोरी का परिचय (बिट, बाइट, केबी, जीबी आदि)
सी. कम्प्यूटर के विभिन्न प्रकार जैसे सर्वर, डेस्कटॉप आदि से परिचय
डी. कम्प्यूटर के भौतिक सुरक्षा से परिचय
एप्लीकेशन एरिया (4 घंटे)
ए. वर्तमान में उपयोग हो रहे पुलिस एप्लीकेशन से परिचय
बी. जनता द्वारा उपयोग किए जा रहे एप्लीकेशन से परिचय (जैसे वेब आधारित रेलवे आरक्षण, बैंकिंग एप्लीकेशन)
एमएस वर्ड (2 घंटे)
ए. मेल मर्ज
बी. एमएस एक्सेल में डाटा इंटरचेंज
सी. लेबल, लिफाफे आदि की प्रिंटिंग
डी. विभिन्न तरीकों के दस्तावेज जैसे किताब, पत्रिका आदि तैयार करना
ई. एमएस वर्ड को पीडीएफ में कंवर्ट करना और पीडीएफ को एमएस वर्ड में
एमएस एक्सेल (6 घंटे)
ए. नया वर्कशीट बनाना
बी. पहले से मौजूद वर्कशीट को खोलना
सी. वर्कशीट में एडिट करना और उसे सेव करना
डी. वर्कबुक में वर्कशीट बनाना, रीनेम और डिलीट करना
ई. डाटा के प्रकार (नंबर, अक्षर आदि)
एफ. सेल में प्रवेश करना
जी. सेल, रो और कॉलम को बदलना (डिलीट, इंसर्ट, खोजना, रीप्लेस, कॉपी और दूसरी जगह ले जाना)
एच. सेल में जस्टीफाई करना, सेल और कॉलम को मर्ज करना
आई. जोड़ना, घटाना और फॉर्मूला का उपयोग करना
जे. फॉण्ट और फॉण्ट साइज का चयन करना
के. टेबल का प्रयोग, रो और कॉलम जोड़ना/डिलीट करना
एल. टेबल का वर्गीकरण करना
एम. हेडर और फूटर का प्रयोग, पेज नंबर डालना
एन. सेल, रो और कॉलम में बोर्डर और शेड डालना
ओ. पेज फाॅर्मेट करना, मार्जिन रखना, पेज साइज, पोर्टेट और लेंडस्कैप
पी. प्रिंटिंग एरिया सेलेक्ट करना, प्रिंट प्रीव्यू का प्रयोग करना, वर्कशीट और वर्कबुक को प्रिंट करना 
क्यू. दो अलग-अलग वर्कशीट और वर्कबुक से टेक्सट को कॉपी/दूसरी जगह ले जाना
आर. चार्ट विजार्ड का उपयोग, विभिन्न प्रकार के चार्ट का निर्माण करना
एस. एमएस एक्सेल में कई गतिविधियों के लिए शॉर्टकट
डाटाबेस प्रबंधन (6 घंटे)
ए) डाटाबेस और टेबल से परिचय
बी) एमएस ऑफिस में साधारण टेबल का निर्माण और उस पर काम करना और उसमें जोड़तोड़
सी) आरडीबीएमएस से परिचय और यह एमएस एक्सेस से कैसे यह अलग है
डी) डाटा स्टोरेज, आर्काइव और पुन:प्राप्ति से परिचय
ई) बैकअप और अलग मीडिया में उसे स्टोर करना ( टेप, सीडी/डीवीडी और एक्सटर्नल हार्डडिस्क)
आईटी बेसिक (एडवांस उपयोगकर्ताओं के लिए)
(20 घंटे)
लक्षित समूह: सब इंस्पेक्टर, इंस्पेक्टर और पुलिस स्टेशन और जिले में कम्प्यूटर के प्राथमिक उपयोग करने वाले निजी स्टाफ
सीखने का उद्देश्य: 
आईटी के प्रति व्यवहारिक प्रेरणा विकसित करना
डाटा प्रबंधन के कौशल को विकसित करना
एमएस वर्ड, एमएस एक्सेल और डाटाबेस पर काम करने का एडवांस कौशल
डाटा प्रबंधन में आने वाले साधारण ट्रबल शूटर की जानकारी
निर्देशात्मक पद्धति: क्लासरूम लेक्चर के साथ कम्प्यूटर तकनीक में अभ्यास (2 घंटे)
ए. स्टोरेज डिवाइस का परिचय (इंटरनल और एक्सटर्नल), एसएएन
बी. कम्प्यूटर मेमोरी का परिचय (बिट, बाइट, केबी, जीबी आदि)
सी. कम्प्यूटर के विभिन्न प्रकार जैसे सर्वर, डेस्कटॉप आदि से परिचय
डी. कम्प्यूटर के भौतिक सुरक्षा से परिचय
एप्लीकेशन एरिया (4 घंटे)
ए. वर्तमान में उपयोग हो रहे पुलिस एप्लीकेशन से परिचय
बी. जनता द्वारा उपयोग किए जा रहे एप्लीकेशन से परिचय (जैसे वेब आधारित रेलवे आरक्षण, बैंकिंग एप्लीकेशन)
एमएस वर्ड (2 घंटे)
ए. मेल मर्ज
बी. एमएस एक्सेल में डाटा इंटरचेंज
सी. लेबल, लिफाफे आदि की प्रिंटिंग
डी. विभिन्न तरीकों के दस्तावेज जैसे किताब, पत्रिका आदि तैयार करना
ई. एमएस वर्ड को पीडीएफ में कंवर्ट करना और पीडीएफ को एमएस वर्ड में
एमएस पावरप्वॉइंट (6 घंटे)
ए) नया प्रजेंटेशन तैयार करना
बी) पहले से मौजूद प्रजेंटेशन को खोलना
सी) एक प्रजेंटेशन में एडिटिंग और उसे सेव करना
डी) प्रजेंटेशन की फॉर्मेटिंग- स्लाइड लेआउट, स्लाइड की डिजाइन, स्लाइड का बैकग्राउंड
ई) प्रतीक, चार्ट, टेबल, तस्वीर, वीडियो और ओडियो को डालना
एफ) पेज नंबर, तारीख और समय डालना
जी) वर्ड डॉक्यूमेंट और एक्सेल वर्कशीट से कॉपी और पेस्ट करना
एच) अलग-अलग तरीके से दिखाना
आई) एनिमेशन तकनीक से स्लाइड शो तैयार करना
जे) स्लाइड, थिसिस और नोट्स के पन्नों का प्रिंट लेना
डाटाबेस प्रबंधन (6 घंटे)
ए) डाटाबेस और टेबल से परिचय
बी) एमएस ऑफिस में साधारण टेबल का निर्माण और उस पर काम करना और उसमें जोड़तोड़
सी) आरडीबीएमएस से परिचय और यह एमएस एक्सेस से कैसे यह अलग है
डी) डाटा स्टोरेज, आर्काइव और पुन:प्राप्ति से परिचय
ई) बैकअप और अलग मीडिया में उसे स्टोर करना ( टेप, सीडी/डीवीडी और एक्सटर्नल हार्डडिस्क)

प्रश्न 1: क्या सीसीटीएनएस से फोटो मिलान किया जा सकता है?

उत्तर: सीसीटीएनएस एप्लीकेशन फोटोग्राफ मिलान नहीं कर सकता हालांकि सीसीटीएनएस एप्लीकेशन में फोटोग्राफ अपलोड कर सकते हैं और इसके बाद उपयोगकर्ता के पास उपलब्ध फोटोग्राफ से मिलान कर सकते हैं।

प्रश्न 2: सीसीटीएनएस में पायलट जांच के दौरान बहुभाषी कार्यक्षमता है?

उत्तर: सीसीटीएनएस के पायलट एप्लीकेशन में हिन्दी और अंग्रेजी में एप्लीकेशन होगा?

प्रश्न 3: सीसीटीएनएस के अटैच किए जाने वाले दस्तावेज की साइज क्या होगी?

उत्तर: सीसीटीएनएस एप्लीकेशन में पांच दस्तावेज 200केबी तक के अपलोड करने का प्रावधान है। हालांकि राज्य अपने अनुकूलता के आधार पर अटैच होने वाले दस्तावेज की साइज को बदल पाएगा।

प्रश्न 4: सीआईपीए और सीसीटीएनएस में क्या अंतर है?

उत्तर: सीसीटीएनएस एप्लीकेशन राज्य स्तरीय नेटवर्क एप्लीकेशन है जो बिजनेस नियमों के आधार पर काम करती है।

प्रश्न5: सीसीटीएनएस एप्लीकेशन का कॉन्फिगरेशन प्रबंधन कैसे होता है?

उत्तर- सीसीटीएनएस एप्लीकेशन शुरू होने के बाद कॉन्फिगरेशन प्रबंधन का ध्यान राज्य स्तर पर सिस्टम इंटीग्रेटर को रखना है।

प्रश्न 6: सीसीटीएनएस एप्लीकेशन में डाटा में सुधार करने की क्या नीति होगी?

उत्तर: सुधार नीति को प्रत्येक राज्य सीसीटीएनएस एप्लीकेशन के सुचारु तरीके से काम करने के लिए हार्डवेयर प्रावधान के अनुसार परिभाषित करेगा।

प्रश्न 7: सीसीटीएनएस एप्लीकेशन में सीएएस स्टेट से सीएएस सेंटर में मेटा डाटा भेजने की आवृत्ति और समय क्या होगा?

उत्तर: सीएएस सेंटर में मेटा डाटा भेजने की आवृत्ति और समय को प्रत्येक राज्य प्रत्येक दिन आने वाले डाटा के विश्लेषण के बाद परिभाषित करेगा। यह नेटवर्क कनेक्टिविटी अौर उसके बैंडविथ पर निर्भर करता है। हालांकि एनसीआरबी ने राउंड रोबिन तकनीक की योजना डाटा ट्रांसफर के लिए बनाई है।

प्रश्न 8: पुराने डाटा को सीसीटीएनएस एप्लीकेशन के साथ कैसे सिंक्रोनाइज करते हैं?

उत्तर: विभाग के पहले के डाटा का सिंक्रोनाइज प्रत्येक एप्लीकेशन के बनावट पर निर्भर करता है। सीआईपीए और सीसीआईएस को डाटा स्थानांतरण करने के लिए एनसीआरबी डाटा माइग्रेनशन उपलब्ध करवाएगा।

प्रश्न 9: क्या सीएएस ऑफलाइन से सीएएस ऑनलाइन में दोनों ओर डाटा सिंक्रोनाइज हो जाएगा?

उत्तर: हां

प्रश्न 10: पुलिस स्टेशन में कितने कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा?

उत्तर- पुलिस स्टेशन के एसएचओ के साथ सभी जांच अधिकारियों को सीसीटीएनएस एप्लीकेशन की ट्रेनिंग दी जाएगी। एनसीआरबी की अपेक्षा है कि पुलिस स्टेशन के अन्य स्टाफ ईओ और स्टेशन राइटर को भी एप्लीकेशन की ट्रेनिंग दी जाए।

प्रश्न 11: सीसीटीएनएस एप्लीकेशन में भूमिका आधारित प्रशिक्षण में किन्हें लक्ष्य किया जाएगा?

उत्तर: एएचओ, सभी ईओ, सभी आईओ, स्टेशन राइटर। सीनियर अधिकारी जैसे एसपी, एसडीपीओ, सर्किल इंस्पेक्टर से भी एप्लीकेशन समझने की अपेक्षा की जाती है।

प्रश्न 12: पायलट डाटा भी एसडीसी में स्थानांतरण होगा?

उत्तर: हां

प्रश्न 13: एसटीक्यूसी सर्टिफिकेशन के बाद सीसीटीएनएस एप्लीकेशन को बंद कर दिया जाएगा?

उत्तर: एसटीक्यूसी सर्टिफिकेशन के बाद एसडीसी में एप्लीकेशन के नए वर्जन को लाया जाएगा। हालांकि पुलिस स्टेशन इस गतिविधि से अप्रभावित रहेंगे।

प्रश्न 14: सीएएस को लागू करने के कौन से कदम हैं?

उत्तर: सीएएस को लागू करने के कदम के बारे में सीएएस सप्लीकेशन जारी करने के दौरान दिए गए दस्तावेजों में जिक्र है। इसे एनसीआरबी की वेबसाइट से नोडल अधिकारी डाउनलोड कर सकते हैं।

क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रेकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम 
कोर एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर
अक्सर पूछ जाने वाले सवाल


1 कार्यात्मक..............................................3
1.1 सेवाएं................................................3
1.1.1 जेनेरिक.........................................5
1.1.2 पंजीयन सेवाएं...................................8
1.1.3 अन्वेषण सेवाएं.....................................11
1.2 मास्टर डाटा प्रबंधन................................14
2 तकनीकी..................................................14
2.1ऑपरेटिंग सिस्टम सहयोग...............................14
2.2 हार्डवेयर की जरूरत.....................................14
2.3 कोर एप्लीकेशन साॅफ्टवेयर...............................14
2.3.1 दस्तावेजीकरण..........................................14
2.3.2 डिजाइन..................................................14
2.3.3 इंस्टॉलेशन..............................................15
2.3.4 कोड.......................................................21
2.3.5 डाटाबेस..................................................21
2.3.6 क्या करें और क्या न करें.............................21
2.4 डाटा स्थानांतरण की उपयोगिता...............................21
2.4.1 डाटा डिजिटलाइजेशन एक्सएलएस......................21
3 हेल्पडेस्क..........................................................22

 

1 कार्यात्मक
 

1.1 सेवाएं

ए) पुलिस स्टेशन के कर्मचारियों काे क्या मूल कार्यक्षमता प्रदान किया जा रहा है?

क) घटनाएं (जैसे एफआईआर, एनसीआर, गुमशुदा व्यक्ति, एमएलसी आदि)/ शिकायत की रिकॉर्डिंग

ख) केस के संबंध में डाटा एंट्री

ग) विशेषज्ञों से जानकारी/टिप्पणी/ सुझाव लेना

घ) अभियोजन पक्ष/ कोर्ट के केस फाइल तैयार करना

च) एडवांस सर्च और क्वेरी

छ) डैशबोर्ड/करने वाले काम /कार्य सूची

ज) अलर्ट/संदेश


b) बी) क्या पुलिस के लिए डाटा एंट्री में नए क्षेत्रों के डाटा को भी जोड़ा जाएगा?

नहीं। शुरुआत में डाटा एंट्री में सिर्फ पारंपरिक क्षेत्रों पर ज्यादा जोर होगा। आगे चलकर अन्य बाहरी सिस्टम से इंटरफेस कर, डाटा का प्रमाणीकरण और जनसंख्या जुड़ेगा। इस वजह से, अन्य सरकारी स्रोतों से दर्ज केस में डाटा जुड़ेगा, जिसके लिए पारंपरिक तौर पर पुलिस अधिकारी साक्ष्य के रूप में जोड़ते हैं जैसे राशन कार्ड, डीवीएलए, पार्सपोर्ट, मतदाता पहचान पत्र आदि।


सी) सुरक्षा के मद्देनजर खुद पुलिस अधिकारियों द्वारा डाटा चोरी/दुरुपयोग की आशंका को लेकर क्या विचार किया जा रहा है?

प्रत्येक पुलिस अधिकारी को सिस्टम में लॉगइन करने के लिए यूनिक यूजरनेम और पासवर्ड दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त सिस्टम के द्वारा प्रत्येक लॉग का भी ऑडिट होगा, इससे प्रत्येक अधिकारी की जानकारी के साथ यह भी सुनिश्चित होगा कि उचित तरीके से लॉगइन हो रहा है। सुपरवाइजर के रूप में काम करने वाले अधिकारी कनिष्ठ अधिकारियों के डाटा तक पहुंच की निगरानी करने में सक्षम होंगे।


डी) अधिकारी एक दिन में लगभग 16 घंटे फील्ड में रहते हैं। उन्हें अपने केस के संबंध में डाटा एंट्री करने का समय कब मिलेगा। साथ ही क्या सिस्टम बैक डेट में डाटा एंट्री करने की अनुमति देगा?

सिस्टम को इस तरह से प्रोग्राम किया गया है कि घटना के समय की सीरीज को दर्ज कर लेता है, इस कारण यह जरूरी है कि जब घटना होती है तभी जरूरी डाटा की एंट्री कर दें। मानव सीमा को ध्यान में रखते हुए सिस्टम को डिजाइन किया गया है। पुलिस कर्मचारी एक विशिष्ट फॉर्म का चयन करते हैं जिसमें उनको जानकारी दर्ज करनी होती है और घटना के समय का भी चयन करना होता है।


राज्य का सीएएस


ए) राज्य के सीएएस तैयार करते समय किन इनपुट पर विचार किया जाता है?

i. निम्न इनपुट पर विचार किया जाता है

10 राज्यों का दौरा
2. अधिकारियों की अत्याधुनिक कार्यशाला
3. बीपीआर (बिजनस प्रोसेस री-इंजीनियरिंग) दस्तवेज से अनुशंसाएं
4. पीसीआर (प्रोसेस चेंज रिपोर्ट) दस्तावेज से अनुशंसाएं
5. सीआरपी - कॉन्फ्रेंस रूम के पायलट

राज्य के नोडल अधिकारी के साथ
b. बी. बाहरी एजेंसियों के साथ

6. एफआरएस – फंक्शनल रिक्वायरमेंट स्पेसिफिकेशन रीव्यू

ए. राज्यों के साथ 8 दौर की समीक्षा 
बी. विषय विशेषज्ञों के साथ विशेषज्ञ
सी. बाहरी एजेंसियां

7. एसआरएस – सिस्टम रिक्वायरमेंट स्पेसिफिकेशन रीव्यू


ए. राज्यों के साथ 8 दौर की समीक्षा
बी. विषय विशेषज्ञों के साथ विशेषज्ञता
सी. बाहरी एजेंसियां


. सीसीसी - सीएएस कोर कमेटी वर्कशॉप
9. सीटीसी - सीएएस टेक्निकल कमेटी वर्कशॉप
10. डीआईटी - डिपार्टमेंट ऑफ इंफोरमेशन टेक्नोलॉजी


बी) क्या हम ऐसा सोच सकते हैं कि भविष्य या मौजूदा प्रक्रिया साधारण तरीके से स्वचालित हो जाए?

दोनों। दरअसल सीएएस एप्लीकेशन की कार्यप्रणाली ऐसी है कि राज्यभर के पुलिस स्टेशन के कामकाज स्वत: चलेगा। इसमें एडवांस फीचर जैसे रिपोर्टिंग, अलर्ट जारी करना, डैशबोर्ड, मोबाइल समर्थक, बायोमेट्रिक्स उपकरणों के साथ एकीकरण और खुफिया डाटाबेस से इंटरफेस जैसे यूआईडी, पासपोर्ट, आव्रजन आदि के साथ भविष्य में जानकारी भंडार/उसे दोबारा निकालने के संबंध में भविष्य में लंबी छलांग लगाने के लिए है।

सी) राज्य आपस में कैसे डाटा आदान-प्रदान करेंगे?

राज्यों का डाटा एसडीसी (स्टेट डाटा सेंटर) में जमा होता है, यह एसएसडीजी (स्टेट सर्विस डिलिवरी गेटवे) से जुड़ा रहता है, जिसे एनएसडीजी (नेशनल सर्विस डिलिवरी गेटवे) से जोड़ा जाएगा। डाटा लेने के लिए एक राज्य को सर्विस रिक्वेस्ट जारी करना होगा। यह पुलिस स्टेशन से एसडीसी तक जाएगा, वहां से एसएसडीजी तक, वहां से एनएसडीजी और इसके बाद फिर से राज्य के एसएसडीजी (जहां से डाटा के लिए कहा गया है) और वहां से जिस राज्य से डाटा की मांग की गई है वहां के एसडीसी में। डाटा का इसी मार्ग से आना-जाना होगा।

डी) सिस्टम इतना कठिन है कि इसे समझा नहीं जा सकेगा? और पुराने पुलिस अधिकारियों के लिए भी इसे करना जरूरी होगा?

किसी भी नए सिस्टम को समझने के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण की जरूरत पड़ती है। शुरुआत में पुलिसकर्मियों को बताने के लिए तकनीकी कर्मचारियों की जरूरत पड़ेगी जो बताएंगे कि सिस्टम का कैसे उपयोग होता है। इस उद्देश्य के लिए, प्रशिक्षण और बदलाव के प्रबंधन की योजना को रखा जाता है, साथ ही राज्य में सिस्टम इंटीग्रेटर पुलिस स्टेशन के अधिकारियों को मदद करने के लिए तकनीकी स्टाफ को उपलब्ध करवाता है। 
 

केंद्र का सीएएस

ए) केंद्र का सीएएस क्या है और इसकी जरूरत क्यों है? इसकी क्या विशेषताएं होंगी?

केंद्र के सीएएस का प्राथमिक उद्देश्य राज्यों से डाटा मिलान करना और पुलिस विभाग और दूसरे बाहारी खुफिया एजेंसियों द्वारा मांगी गई विशेष जानकारी देने के लिए प्राप्त डाटा का विश्लेषण करना। इसकी विशेषताओं में निम्न शामिल हैं:

1. एडवांस सर्च और क्वेरी
2. मिलान करने और बदलाव करने का सिस्टम
3. अनुरोध क्रम/ डाटा का लेन-देन
4. निगरानी/डाटा आदान-प्रदान करने का परीक्षण

बी) केंद्र के सीएएस का कौन उपयोग कर सकता है?

राष्ट्रीय स्तर के सभी अधिकारियों और बाहरी एजेंसियों द्वारा जरूरी जानकारी के लिए।

सी) नेशनल डाटा सेंटर के फेल होने की स्थिति में क्या होगा? आकस्मिक योजना क्या है?

ऐसी स्थिति के लिए डिजास्टर रिकवरी सेंटर उचित कदम उठाते हैं।

डी) किस प्रकार की रिपोर्टिंग उपलब्ध है?

रिपोर्टिंग

i. सभी पुलिस स्टेशन स्तर पर आवधिक और तदर्थ रिपोर्टिंग को कवर किया जाता है
ii. विशिष्ट उपयाेगकर्ता के विशिष्ट जिज्ञासाओं को शामिल किया जाता है
iii. राज्यों की रिपोर्ट और रजिस्टर का अध्ययन कर परामर्श तैयार करना
iv. एसआरएस के लिए राज्य की सहमति का ध्यान रखा जाता है

ई) किस प्रकार के एडवांस क्वेरी उपलब्ध हैं?

i. गुमशुदा व्यक्ति का मिलान बरामद शव से करना, एमएलसी, आशंका/गिरफ्तारियां
ii. गुमशुदा/खोया/चोरी/बरामद/प्राप्त संपत्ति का मिलान
iii. उसी तरह के अपराध में पहले के अपराध/अपराधी के विवरण के साथ मिलान करना
iv. अपराध के विवरण संबंधी सवाल – व्यक्ति, सामान, स्थान और घटना

नागरिक सेवाएं

ये शामिल हैं

i. याचिका के लिए अनुरोध
ii. शिकायतें
iii. स्थिति का पता लगाना
iv. डाटा बैंक के सवाल


1. गुमशुदा व्यक्ति
2. खोया/चोरी/छोड़ी हुई संपत्ति आदि


1.1.1 जेनरिक

ए)पूरे समय के लिए क्या इंटरनेट कनेक्शन जरूरी है?

नहीं इंटरनेट कनेक्शन की कभी जरूरत नहीं है। पहली बार ऑफलाइन एप्लीकेशन की व्यवस्था करने के लिए आपको सीसीटीएनएस नेटवर्क की जरूरत पड़ेगी। ऑफलाइन मॉड्यूल पुलिस कर्मचारियों के लिए उपलब्ध है, इससे वे निर्बाध रूप से अपना काम कर पाएंगे और एक बार जब कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी तो बैकअप से डाटा स्थानांतिरत हो जाएगा।

ए) सीसीटीएनएस सीएएस का मैं कैसे उपयोग कर सकता हूं?

उपयोगकर्ता के पास सीसीटीएनएस सीएएस उपयोग करने के लिए वैध यूजरनेम और पासवर्ड होना चाहिए।

बी) यूजरनेम और पासवर्ड मैं कैसे हासिल कर सकता हूं?

यूजरनेम और पासवर्ड के लिए अपने सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर से संपर्क करना होगा।

सी) मैं पासवर्ड भूल गया हूं, कैसे मैं नया पासवर्ड ले सकता हूं?

उपयोगकर्ता लॉगइन पेज पर "फोरगॉट पासवर्ड" लिंक पर क्लिक करेगा और सुरक्षा सवालों का जवाब देगा।M

डी) मेरा ट्रांसफर दूसरे पुलिस स्टेशन में हो गया, कैसे मैं अपने सीएएस के मौजूदा यूजरनेम और पासवर्ड का उपयोग कर सकता हूं?

सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर एप्लीकेशन में उपयोगकर्ता की जानकारी को अपडेट करेगा और इसके बाद आप लॉगइन कर सकते हैं।

ई) मैं ऑनलाइन एप्लीकेशन में काम कर रहा था, अचानक से कनेक्शन चला गया। मुझे क्या करना चाहिए?

ऑनलाइन कनेक्शन चले जाने की स्थिति में उपयोगकर्ता अपने काम को पूरा करने के लिए ऑफलाइन एप्लीकेशन में चला जाएगा।

एफ) मैंने फॉर्म में गलत जानकारी डाल दी है, प्रत्येक फील्ड में उसे हटाने की जगह एक साथ सभी विवरण को कैसे हटा सकते हैं?

प्रत्येक पेज में क्लियर का ऑप्शन उपलब्ध है, जिससे सभी फील्ड खाली हो जाएंगे।

जी) स्कैन फाइल को सेव करने के लिए फोल्डर का स्वरूप क्या होगा?

चूंकि फाइल डाटाबेस में सेव होते हैं इस वजह से फोल्डर के स्वरूप का अनिवार्य/सुझाव भी नहीं है।

एच) स्कैन फाइल को सेव करने के लिए फाइल का प्रारूप क्या होगा

एप्लीकेशन में फाइल के प्रारूप का उल्लेख है। एप्लीकेशन .डोक, .एक्सएलएस, .जेपीईजी, .टीआईएफएफ, .पीएनजी, .पीडीएफ को सपोर्ट करेगा।

आई) फाइल की अधिकतम साइज क्या होगी, जिसे सेव किया जा सके?

फाइल की अधिकतम साइज 200 केबी से अधिक न हो और प्रत्येक अपलोड में अधिकतम1एमबी हो।

जे) फाइल को सुरक्षित रखने के लिए क्या किसी फाइल में पारंपरिक नाम देना होगा?

राज्य की जरूरत के अनुसार फाइल का पारंपरिक नाम दिया जा सकता है।

के) कुछ कार्यों के लिए रिमाइंडर तैयार करने की जरूरत है, यह मैं कैसे कर सकता हूं?

उपयोगकर्ता अपने डैशबार्ड में किसी भी कार्य को रिमाइंडर में टास्क ऑप्शन के माध्यम से जोड़ सकते हैं।

एल) किसी भी राज्य के विशिष्ट मैनुअल को मैं कैसे देख सकता हूं?

उपयोगकर्ताओं को विभिन्न दस्तावेज देखने के लिए लाइब्रेरी का विकल्प उपलब्ध करवाया गया है।

एम) क्या मैं कार्य (एफआईआर) को काम करने के दौरान सेव कर सकता हूं?

हां, आप काम करने के दौरान एफआईआर को सेव कर सकते हैं, स्क्रीन में दार्यी ओर नीचे सेव बटन में क्लिक करें।

एन) ऑफलाइन एप्लीकेशन में कुछ मॉड्यूल गायब हो जाते हैं?

केवल कोर मॉड्यूल ही ऑफलाइन एप्लीकेशन में उपलब्ध करवाए गए हैं इसलिए ऑनलाइन एप्लीकेशन का कनेक्शन चले जाने के बाद भी पुलिस के बुनियादी काम में बाधा नहीं आती।

ओ) मेरे बकाया काम के प्रति मुझे कैसे ध्यान दिलाएगा, अगर मैंने किसी अलर्ट को गलती से छोड़ दिया?

डैशबोर्ड में माई टास्क से उपयोगकर्ता बकाया कार्यों की सूची देख सकता है।

पी) कृपया सीएएस के कार्य की भूमिका और अधिकार के बारे में बताएं। पुलिस महानिदेशक पूरा राज्य का डाटा देख सकते हैं

सीएएस एप्लीकेशन में भूमिका और अधिकार का सार ब्योरा है

ए) सीएएस भूमिका आधारित एप्लीकेशन है जहां राज्य की जरूरत के अनुसार कई भूमिका बनाई जा सकती है। 
बी) प्रत्येक भूमिका के लिए कई अधिकार जारी किए जाते हैं, सीएएस एप्लीकेशन में प्रत्येक अधिकार कुछ स्क्रीन/कार्यात्मक के समान होता है।
सी) अधिकारों के किसी भी संयोजन को विशिष्ट भूमिका के लिए जारी किया जाता है
डी) भूमिका का निर्माण और उसमें बदलाव एडमिनिस्ट्रेशन मॉड्यूल के द्वारा किया जाता है
पुलिस महानिदेशक पूरे प्रदेश के अपराध और अपराधियों की जानकारी देख सकते हैं। अन्य नामित अधिकारियों को भी इस तरह की सूचनाा उपलब्ध करवाई जाती उनकी भूमिका और अधिकारों के अनुसार।

क्यू) सीएएस एप्लीकेशन में कई ड्रॉपडाउन है जैसे मॉडस ऑपरेंडी के पास मान्यताओं की विस्तृत सूची नहीं है।

सीएएस एप्लीकेशन के एडमिनिस्ट्रेशन मॉड्यूल से ड्रॉपडाउन को प्रसारित कर सकते हैं।

आर) क्या फॉर्म के ड्राफ्ट वर्जन का प्रिंटआउट ले सकते हैं?

हां, फॉर्म के ड्राफ्ट वर्जन का प्रिंट ले सकते हैं हालांकि इस डॉक्यूमेंट में एक वाटरमार्क जुड़ा होगा जिस पर “ड्राफ्ट” का लेवल लगा रहेगा। यह भी सलाह दी जाती है कि डाॅक्यूमेंट के फाइनल वर्जन का ही प्रिंटआउट लिया जाए। चूंकि सीएएस एप्लीकेशन का उद्देश्य पेपरलेस वातावरण बनाना है, ड्राफ्ट वर्जन का प्रिंटआउट के लिए हतोत्साहित किया जाता है। इसके परिणामस्वरूप पुलिस विभाग में इको-फ्रेंडली कामकाज होगा।

एस) कनेक्टिविटी नहीं होने पर कब तक ऑफलाइन एप्लीकेशन काम करेगा?

सीएएस का ऑफलाइन एप्लीकेशन केवल आपात स्थिति में पुलिस के कामकाज में सीमित समय के लिए काम करेगा। पुलिस स्टेशन में कनेक्टिविटी नहीं होने पर यह केवल सीमित समय के लिए चलेगा। जितनी जल्दी कनेक्टिविटी आ जाएगी, सिस्टम उपयोगकर्ता को सीएएस ऑफलाइन एप्लीकेशन के उपयोग से रोकेगा।

टी) क्या सिस्टम ऑफलाइन एप्लीकेशन में किसी घटना को रिकॉर्ड में समय लेगा? इस टाइम स्टाम्पिंग के लिए कोई प्रशासनिक नियंत्रण भी है?

हां, पुलिस स्टेशन में सिस्टम के प्रशासनिक अधिकार डिसएबल किया जा सकता है। सिस्टम के टाइम को बदलने का कोई भी प्रयास रिकॉर्ड हो जाएगा और डाटा स्थानांतरण के दौरान िपछली तारीख से रिकॉर्ड करने के प्रयास को स्वीकार नहीं करेगा। इस तरह के केस के लिए केंद्रीय स्तर पर ऑडिट लॉग भी किया जाएगा।

यू) सर्च की सुविधा चालू करने के लिए क्या मापदंड हैं? इस एप्लीकेशन के प्रयोग से कैसे किसी छद्म नाम वाले अपराधी को खोजा जा सकता है?

सर्च की कार्यक्षमता उपलब्ध करवाने का मापदंड खोज के प्रकार, एसआरएस डॉक्यूमेंट से लिए गए विवरण, धारा 7.1.2.1 – केस और अपराधियों की रिपोर्ट पर निर्भर करता है। वर्तमान में अपराधी उपनाम और अन्य मापदंड जैसे नाम, उम्र, शारीरिक विशेषताअों के आधार पर खोजा जा सकता है।

वी) सीएएस एप्लीकेशन का हिस्सा विशेष सामाधान कब होगा?

विशेष सामाधान सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में शामिल किया जाएगा, उसके लिए समय-सीमा तय करना बाकी है।


1.1.2 पंजीयन सेवाएं

ए) साधारण डायरी के जैसे अापराधिक मामलों में, राज्य की विशेष विधि और धारा नहीं आता?

कृपया विधि और धाराओं में बदलाव के लिए सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर से संपर्क करें।

बी) क्या पिछले तारीख के जीडी का उपयोग कर सकता हूं?

नहीं। जीडी सिर्फ वर्तमान तारीख का होता है।

सी) एक शिकायत कैसे दर्ज होती है?

पुलिस स्टेशन में पुलिसकर्मी आॅफलाइन या ऑनलाइन शिकायत दर्ज करता है।

जनता सिटीजन पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकती है।

डी) मैं एफआईआर दर्ज कर रहा हूं लेकिन राज्य का कानून और धारा विशेष ड्रॉपडाउन में नहीं आ रहा है।

कानून और धारा के मास्टर में इसे जोड़ने के लिए कृपया सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर से संपर्क करें।

ई) मैं एफआईआर के साथ गुमशुदा व्यक्ति को लिंक करना चाहता हूं। इसै कैसे कर सकते हैं?

जब एफआईआर दर्ज करते हैं, उपयोगकर्ता को एफआईआर के साथ गुमशुदा व्यक्ति/अज्ञात और अप्राकृतिक मौत/मेडिको लीगल केस को लिंक करने का ऑप्शन आता है।

एफ) एक अभियुक्त का विवरण एफआईआर में मैं डालता हूं लेकिन जांच के दौरान उसका वास्तविक नाम का पता चलता है और अब उसके विवरण को एडिट करना चाहता हूं?

जांच अधिकारी अभियुक्त के विवरण को अपराध विवरण में अपडेट कर सकता है।

जी) मैं एक एफआईआर दर्ज कर रहा हूं लेकिन निश्चित नहीं हूं कि कुछ विवरण सही है या नहीं।

अंतरिम सेव का विकल्प आधी भरी इंट्री को सेव करने के लिए उपलब्ध है। उपयोगकर्ता रजिस्ट्रेशन पेज को फिर से खोल सकता है और अधूरे डाटा को भर सकता है।

एच) फॉर्म जमा करने से पहले एफआईअार के प्रारूप को कैसे देख सकते हैं?

प्रीव्यू का विकल्प फॉर्म में है जिससे भरे हुए प्रारूप का विवरण देख सकते हैं

कुछ जगह हैं जहां खास फील्ड जैसे आरोपी की गिरफ्तारी तारीख और सरेंडर फॉर्म में रिश्तेदार का नाम भरना अनिवार्य है, जो रजिस्ट्रेशन के समय अनिवार्य नहीं किया जाता क्योंकि उस समय यह उपलब्ध नहीं होता।

इन फील्ड में अनिवार्य का चिन्ह हटा दिया जाएगा और जरूरी बदलाव सीएएस एप्लीकेशन अगले वर्जन में उपलब्ध करवाया जाएगा।

जे) घटनास्थल से एफआईआर/सादे कागज पर एफआईआर दर्ज करने से कैसे कार्यवाही की जाएगी?

स्पॉट/सादे कागज पर एफआईआर दर्ज करने को स्वीकार करने के लिए निम्न प्रक्रिया को अपनाना जरूरी है।

ए) जब आगे बढ़ेंगे घटनास्थल पर रिकॉर्ड होने वाली फआईआर मैनुअली की जाएगी
बी) इस एफआईआर के लिए डाटा एंट्री सीएएस एप्लीकेशन में एसएचओ/डीओ के पुलिस स्टेशन वापसी के बाद होगी
सी) एसएचओ घटनास्थल पर दर्ज एफआईआर की मूल कॉपी को स्कैन कर एफआईआर के अटैच करेगा। एक बार एफआईआर दर्ज हो जाए, प्रिंटआउट लेकर प्रार्थी को दे सकते हैं। 

के) असंज्ञेय अपराध के दौरान गवाह और शिकायत की जानकारी की प्रासंगिकता क्या होगी, जब जांच अस्वीकार कर सकती है?

गवाह और शिकायत की जानकारी अनिवार्य फील्ड नहीं हैं और यह तब ही जरूरी होता है जब पुलिस अधिकारी यह महसूस करे कि असंज्ञेय अपराध (नॉन कांगनिजेबन आॅफेंस एनसीआर) को आगे की जांच के लिए एफआईअार में परिवर्तित करे।

एल) सीएएस एप्लीकेशन में खाेए संपत्ति का रजिस्ट्रेशन करने के दौरान, खोए हुए सामान की अनुमािनत कीमत भरने का फील्ड अनिवार्य है। हालांकि कई ऐसे केस हैं जहां खोए सामान की कीमत नहीं उपलब्ध करवाया जा सकता है उदाहरण स्वरूप दस्तावेज जैसे पासपोर्ट या सर्टिफिकेट। इस तरह के केस सीएएस एप्लीकेशन में कैसे रजिस्ट्रेशन करेंगे?

इस तरह के केस के रजिस्ट्रेशन में अनुमानित लागत की फील्ड में “0” भर सकते हैं।

एम) गुमशुदा व्यक्ति के रजिस्ट्रेशन में जाति की जानकारी दर्ज करने का विकल्प सिस्टम नहीं देता।

सीएएस एप्लीकेशन में गुमशुदा व्यक्ति की जाति की जानकारी भरने का फील्ड पहले से उपलब्ध है। यह फील्ड रजिस्ट्रेशन फॉर्म में “अन्य जानकारियों” के तहत है।

एन) सीएएस में एफआईआर दर्ज करने वाले के विवरण को जानने की अनुमति नहीं है

इसे सीएएस एप्लीकेशन के अगले वर्जन में उपलब्ध करवाया जाएगा।

ओ) सिस्टम स्वत: प्रत्येक दो घंटे में जीडी तैयार कर उपलब्ध करवाएगा जब इस दौरान जीडी दायर नहीं किया गया हो

सीएएस एप्लीकेशन के अगले वर्जन में स्वत: जीडी तैयार करने का प्रावधान किया जाएगा। इस विशेषता को इस तरह लागू किया जाएगा:

पुलिस स्टेशन में समय विशेष में कोई गतिविधि नहीं होने की स्थिति में, जब उपयोगकर्ता सिस्टम में लॉग करेगा तो अलर्ट जारी हो जाएगा। एक बार जब उपयोगकर्ता इसकी पुष्टि कर देगा कि उस समय विशेष में कोई गतिविधि नहीं हुई, सिस्टम स्वत: जीडी इंट्री “रिक्त” विवरण के साथ उत्पन्न कर लेगा।

पी) कानून और व्यवस्था बनाने के दौरान पुलिस स्टेशन से बाहर एसएचओ कैसे एफआईआर दर्ज करेगा?

निम्न कदम उठा सकता है:

ए) उस समय एसएचओ एक पुलिस अधिकारी को इंचार्ज (ड्यूटी ऑफिसर) नियुक्त कर सकता है
बी) एसएचओ के सभी अधिकार नियुक्त उपयोगकर्ता को सौंपा जाएगा
सी) नियुक्त अधिकारी अब एसएचओ की ओर से एफआईआर दर्ज कर सकता है

क्यू) प्रश्न 33: सीएएस एप्लीकेशन में क्या जीडी की इंट्री को मासिक आधार पर फिर से तय किया जा सकता है

फिलहाल सीएएस एप्लीकेशन में यह फीचर उपलब्ध नहीं है। जीडी रोजाना के आधार पर तय किया जाता है इसलिए सीएएस एप्लीकेशन में समय फिर से सेट किया जा सकता है। आवधिक जीडी को फिर से तय करने का फीचर सीएएस एप्लीकेशन के अगले वर्जन में उपलब्ध करवाया जाएगा। इस फीचर के माध्यम से राज्य अवधि (रोजाना, साप्ताहिक, मासिक, वार्षिक आदि) को तय कर सकता है।

आर) अलग जिलों के दो एफआईआर को लिंक करना संभव है?

हां, सीएएस के ऑनलाइन एप्लीकेशन में यह संभव है। हालांकि सीएएस ऑफलाइन में यह फीचर नहीं है जब तक कि उस विशेष पुलिस स्टेशन का डाटा सीएएस ऑफलाइन के डाटाबेस सर्वर में हो।

एस) क्या यह संभव है कि एफआईआर और चार्जशीट काउंटर वार्षिक आधार पर रीसेट किया जाए?

एफआईआर काउंटर वार्षिक आधार पर रीसेट किया जाता है हालांकि चार्जशीट को प्रत्येक केस के साथ रीसेट किया जाता है (आवधिक नहीं किया जा सकता)

टी) संपत्ति के संबंध में कई अनिवार्य फील्ड हैं। अधिकतर बार देखा जाता है कि एफआईआर दर्ज करने के दौरान यह जानकारी नहीं होती जैसे गाड़ी के मामले में चेचिस नंबर, इंजन नंबर, पैसे के मामले में नोट की संख्या कितनी थी। यह सलाह दी जाती है कि एफआईआर दर्ज करने के दौरान संपत्ति के संबंध में जानकारी अनिवार्य न किया जाए।

एनसीआरबी में इस पर चर्चा हो रही है और सीएएस एप्लीकेशन के अगले वर्जन में यह उपलब्ध हो सकता है।

यू) सिस्टम इसकी स्वीकृति नहीं देता कि एफआईआर दर्ज होने के समय से पहले गिरफ्तारी का समय दर्ज किया जा सके, इस वजह से उपयोगकर्ता एरेस्ट मेमो जमा नहीं कर पाता। ऐसे केस में जब जांच अधिकारी घटनास्थल का दौरा करता है और मौके पर मिले व्यक्ति को गिरफ्तार करता है और उसके बाद एरेस्ट मेमो जीडी और एफआईआर के बाद जमा करता है, सिस्टम तब तक इसके लिए अनुमति नहीं देता जब तक गिरफ्तारी समय (वह समय जब व्यक्ति मौके से गिरफ्तार किया गया था) एफआईआर दर्ज करने के समय से कम हो (पुलिस स्टेशन में)।

इस मान्यता को हटा दिया जाएगा और सीएएस एप्लीकेशन के अगले वर्जन में फीचर उपलब्ध रहेगा।


1.1.3 अन्वेषण सेवाएं

ए) एफआईआर दर्ज करने के दौरान मैंने कुछ कानून और धाराएं जोड़ दी। जमा करने के बाद इसे कैसे बदल सकते हैं?

उपयोगकर्ता इस बदलाव को मॉडिफिकेशन ऑफ सेक्शन (मेमो में बदलाव) मॉड्यूल के द्वारा कर सकता है।

बी) अपराध का विवरण जमा करने से पहले मैं अरेस्ट मेमो जोड़ना चाहता हूं। क्या ऐसा करना संभव होगा?

हां, उपयोगकर्ता अपराध का विवरण देने से पहले अरेस्ट मेमो को भर सकता है।

सी) अपराध का विवरण जमा करने से पहले मैं जब्ती मेमो जोड़ना चाहता हूं। क्या एेसा करना संभव होगा?

हां, अपराध का विवरण भरने से पहले यह मेमो भर सकते हैं।

डी) मैंने एक अधिकारी को जांच अधिकारी के रूप में नियुक्त किया लेकिन उसका ट्रांसफर हो गया। इसी केस को दूसरे जांच अधिकारी को कैसे फिर से जिम्मा दे सकते हैं।

उपयोगकर्ता उस केस को दूसरे जांच अधिकारी को “री-एसाइनमेंट ऑफ केस” मॉड्यूल से फिर से सौंप सकता है।

ई) पहले के केस डायरी को मैं कैसे देख सकता हूं?

पूर्व में भरे गए केस डायरी को देखने के लिए सर्च एंड व्यू का ऑप्शन है।

एफ) क्या अंतिम फॉर्म में गवाह या आरोपी का विवरण भी जोड़ना पड़ेगा?

वर्तमान में सभी जानकारी जैसे अारोपी, गवाह की जानकारी जिसे अपराध के विवरण फॉर्म के साथ जोड़ना है, वह स्वत: ही अंतिम फॉर्म (फाइनल फॉर्म) में आ जाएगा। मौजूदा प्रावधानों में गवाह/आरोपी का विवरण अपराध के विवरण फॉर्म में जोड़ा जा सकता है, जो स्वत: ही अंतिम फॉर्म में चला जाएगा। सीधे अंतिम फॉर्म में ये विवरण जोड़ना का फीचर सीएएस एप्लीकेशन के अगले वर्जन में उपलब्ध करवाया जाएगा।

जी) असंज्ञेय अपराध में अभियोजन पक्ष की रिपोर्ट का प्रावधान उपलब्ध नहीं करवाया गया है।
सीएएस में असंज्ञेय अपराध और बचाव की कार्रवाई के लिए निम्न शब्दावली का उपयोग किया जाता है।
इसके अतिरिक्त सीएएस की शब्दावली और ओडिशा राज्य का खाका नीचे संलग्न है
निवारक कार्यवाही- केस जहां दर्ज होगा, जांच और अभियोजन के लिए धारा 109 सीआरपीसी, 110 सीआरपीसी, 151 सीआरपीसी आदि के तहत होगा जो निवारक धारा के रूप में व्यवहार होता है। ओडिशा राज्य में इसे एनसीआर (असंज्ञेय अपराध दर्ज) का नाम दिया गया है।
असंज्ञेय अपराध की रिपोर्ट – असंज्ञेय अपराध से संबंधित केस में पुलिस जांच से इंकार कर सकती है। ओडिशा राज्य के एनसीआर (दर्ज असंज्ञेय अपराध) को लेकर भ्रमित नहीं होना चाहिए कि वहां इस संबंध में निवारण के लिए कार्रवाई होती है। अभियोजन पक्ष की रिपोर्ट (ओडिशा राज्य के लिए) सीएएस एप्लीकेशन में ”प्रीवेंशन एक्शन सेक्शन” के तहत उपलब्ध करवाई जाती है।

एच) िगरफ्तारी के लिए एफआईआर/निराकरण कार्रवाई जरूरी है

हां, सीएएस एप्लीकेशन एफआईआर या निराकरण कार्रवाई दर्ज करने के लिए अरेस्ट मेमो को भी भरना पड़ता है। एक बार एफआईआर या निराकरण कार्रवाई पंजीयन की प्रक्रिया पूरा होने के बाद रेफरेंस नंबर का उपयोग अरेस्ट मेमो में प्रयोग कर सकते हैं।

आई) क्या यह संभव है कि उपयोगकर्ताओं एक ही यूजर आईडी से एक साथ कई स्क्रीन पर काम कर सके। इसकी जरूरत उन केस में पड़ती है जब उपयोगकर्ता कई केस में एक साथ काम करना चाहता हो या जांच के दौरान अन्य मामलों का उल्लेख देखना चाहे। इन मामलों में उपयोगकर्ता कई स्क्रीन या पर काम कर सकता है या आ-जा सकता है।

हां, उपयोगकर्ता एक साथ कई स्क्रीन पर काम कर सकता है जहां प्रत्येक स्क्रीन काम करेगा। ब्राउजर में एक ही आईडी से कई टैब खोलकर इसे किया जा सकता है और प्रत्येक टैब का उपयोग अलग क्षेत्र/कार्य के लिए सीएएस एप्लीकेशन में कर सकते हैं। हालांकि यह कई विंडो या अलग ब्राउजर खोल कर करना संभव नहीं है।

आई) केस डायरी का प्रिंट प्रीव्यू उपलब्ध नहीं होता

सीएएस के अगले वर्जन में यह फीचर जोड़ा जाएगा। चूंकि प्रत्येक राज्य में केस डायरी का फॉर्मेट अलग है, केस डायरी का एक डिफॉल्ट फॉर्मेट लागू किया जाएगा जिसे राज्य जरूरत के अनुसार परिवर्तित कर सकते हैं।

के) सीएएस एप्लीकेशन में, ईओ/जांच अधिकारी को अरेस्ट मेमो को लेकर कोई विशेषाधिकार नहीं है

सीएएस एप्लीकेशन के माध्यम से, जांच अधिकारी उसे जारी किए गए सभी केस का अरेस्ट मेमो जमा कर सकता है। इसी तरह ईओ भी केस के निवारक कार्रवाई के दौरान अरेस्ट मेमो जमा कर सकता है। हालांकि सीएएस ने प्रावधान किया है कि ईओ या जांच अधकारी की विशिष्ट भूमिका के लिए दिए गए अधिकारों को संशोधित कर सकता है। यही सीएएस के एडमिनिस्ट्रेशन मॉड्यूल में सीएएस एडमिन मॉड्यूल के माध्यम से किया जा सकता है - > मॉडिफाई यूजर फंक्शनलिटी।

एल) सीएएस एसएचओ द्वारा केस डायरी भरने की अनुमति नहीं देता है।

एसएचओ उन सभी मामलों के केस डायरी को भर सकता है जिसे खुद अपने लिए जारी किया हो। जांच अधिकारी का पर्यवेक्षक अधिकारी होने के नाते जांच अधिकारी को जानकारी उपलब्ध करवा सकता है सीएएस के "व्यू क्राइम डाइजेस्ट एंड एड इंस्ट्रक्शन/कमेंट” फंक्शन से। हालांकि ये निर्देश केस डायरी का हिस्सा नहीं होंगे। किसी मामले में थाना प्रभारी केस डायरी को अपडेट कर सकता है इसके बाद सिस्टम में जांच अधिकारी को बदलकर उस केस को अपने पास जारी कर लेगा। इसके बाद वह केस डायरी में प्रविष्टि डालने में सक्षम होगा।

एम) कई मामलों में जो जरूरी कार्रवाई होती है केस डायरी के कई पन्नों में रहता है जबकि सीएएस के फील्ड में अक्षर की सीमा रहती है

इसके लिए अक्षर सीमा को बढ़ाकर 8000 अक्षर सीएएस एप्लीकेशन के अगले वर्जन में किया जाएगा। विवरण अक्षर सीमा से अधिक होने पर निम्न कदम उठा सकते हैं:

- वर्ड डॉक्यूमेंट खोलें
- इस डॉक्यूमेंट में सभी विवरण को दर्ज करें डॉक्यूमेंट को सेव करें
- सीएएस एप्लीकेशन के केस डायरी के अटैचमेंट में इस डॉक्यूमेंट को जोड़ें
फिलहाल सीएएस एप्लीकेशन में अटैचमेंट का यह प्रावधान उपलब्ध है जिसे ऐसे केस रजिस्टर करने के दौरान उपयोग किया जा सकता है।

एन) थाना प्रभारी के अनुमोदन के बाद इंक्वायरी रिपोर्ट को नहीं देखा जा सकता है

टेस्टिंग के दौरान फील्ड में काम करने वाले उपयोगकर्ताओं ने इस कमी के बारे में बता दिया है। अभी यह कमी बरकरार है और सीएएस एप्लीकेशन के अलगे वर्जन में उपलब्ध होगा।

ओ) प्रत्येक अंतिम फॉर्म जो जमा किया जाता है उसे एक नंबर 01 दिया जाता है। एक केस विशेष में, पहला फॉर्म जिस दिन जमा किया जाता है जारी क्रम में उसका नंबर जाएगा जो पिछले दिन के फॉर्म के आगे का होगा

विशेष दिन ए, बी, सी और आगे के नंबर जारी किए जाते हैं। यह जरूरी है कि केस डायरी को रोजाना क्रम में नंबर जारी किया जाए जैसे पहले दिन केस डायरी को 01 नंबर दिया गया और उसी दिन अगले केस डायरी को 1ए, 1बी, 1सी आैर आगे इसी तरह दिया जाएगा। अगले दिन पहले केस डायरी को 02 नंबर दिया जाएगा और उसके बाद के दूसरे दिन के केस डायरी को 2ए, 2बी, 2सी और इसी तरह आगे। इत्तेफाक से एक अलग जांच अधिकारी जांच करता है और उसकी एंट्री की एक दिन ही जरूरत है, तो उपयोगकर्ता तारीख का चयन कर और उस तारीख का केस डायरी जमा कर सकता है और उसका नाम 1डी दे सकता है।

वर्तमान में सीएएस एप्लीकेशन में पहला फॉर्म जो जमा किया जाता है उसे 01 नाम दिया जाता है, इसका मतलब होता है "ऑरिजनल” जब उसी केस का उसके आगे का फॉर्म जमा करेंगे तो उसे 1ए, 1बी और इसी तरह आगे का नाम दिया जाएगा जिसका मतलब है कि ये "पूरक” फॉर्म हैं। काउंटर को रोजाना शून्य पर सेट किया जाएगा जिसे आगे चलकर सीएएस एप्लीकेशन के अगले वर्जन में सुधार दिया जाएगा।

पी) जांच अधिकारी जांच के सिलसिले में 2-3 दिन बाहर है तो दैनिक केस डायरी कैसे भरा जाएगा

इसके लिए निम्न कदम उठाने की जरूरत है:

ए) उपयोगकर्ता केस के जांच की रिकॉर्ड को उस फील्ड में भर सकता है।
बी) उपयोगकर्ता तारीख के साथ विवरण के फील्ड में लिख सकता है। हालांकि इस डाटा को सिस्टम जमा करने के बाद वर्तमान तारीख में ले लेता है।
सी) उपयोगकर्ता फील्ड में हुई जांच को स्कैन करने के बाद सीएएस एप्लीकेशन में अपलोड कर सकता है।
वर्तमान में स्कैन इमेज की कानूनी पहलू को लेकर कोर्ट में चर्चा हो रही है, इसके बाद जरूरी बदलाव सीएएस एप्लीकेशन में किया जाएगा (अगर जरूरी हुआ तो)।

क्यू) आईआईएफ2 फॉर्म में सेव का बटन उपलब्ध नहीं है

जांच के दौरान, प्रत्येक जानकारी रिसीव और रिकॉर्ड की जा रही है, अपराध का विवरण जमा करने के लिए एक फॉर्म सीएएस एप्लीकेशन एक विशिष्ट नंबर देगा। अपराध विवरण फॉर्म में रिकॉर्ड किया गया विवरण आगे एडिटिंग करने के लिए उपलब्ध होगा। चूंकि हर बार केस में संलग्न एक नया फॉर्म में "सेव" फीचर की जरूरत आईआईएफ2 फॉर्म में नहीं पड़ेगी

1.2 मास्टर डाटा प्रबंधन

ए) पुलिस स्टेशन में कॉन्फिगरेशन के लिए उपयोगकर्ता, भूमिका, अधिकारों का उपयोग, रेंज, जोन और सर्किल की जानकारी आदि, किस तरह का डाटा उपलब्ध करवाया जाएगा और इसे कहां से निकाला जा सकता है?

उपयोगकर्ता, भूमिका, अधिकारों के उपयोग, रेंज, जोन और सर्किल आदि से संबंधित सभी डाटा सीएएस डाटाबेस के मास्टर टेबल में है। उपयोगकर्ता के इंटरफेस स्क्रीन सीएएस स्टेट को मास्टर डाटा का प्रबंधन करने के लिए उपलब्ध करवाया गया है।

बी) ड्रॉपडाउन में कुछ मास्टर देखन में सक्षम नहीं हूं?

कृपया सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर से मास्टर्स में सुधार के लिए संपर्क करें

2 तकनीकी

2.1 ऑपरेटिंग सिस्टम सपोर्ट

ए) किस फेडोरा प्लेटफॉर्म (प्रकार, संस्करण आदि) में सीएएस ऑफलाइन का टेस्ट किया गया?

फेडोरे-16-i686-लाइव-डेस्कटॉप में इसे टेस्ट किया गया था।

2.2 हार्डवेयर की जरूरत

ए) हार्डवेयर जरूरत के लिए क्या यह संभव है कि दोनों ही स्पार्क और इंटेल सर्वर का उपयोग किया जाए?
केवल स्पार्क सर्वर का उपयोग किया जाए।

बी) कोई एसएसओ 8.0, एलडीएच 6.3 और एजेंट 3.0आदि एक सर्वर में खोलने पर समस्या का सामना करे तो क्या करना चाहिए?
इन सभी को एक सर्वर में इंस्टॉल करने में कोई समस्या नहीं है। कृपया यह सुनिश्चित कर लें कि सर्वर पर्याप्त क्षमता का है। सॉफ्टवेयर को इंस्टॉल करने की जिम्मेदारी उस राज्य के सिस्टम इंटीग्रेटर की है।


2.3 कोर एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर

2.3.1 दस्तावेजीकरण

ए) एसआरएस, एचएलडी, एलएलडी और अन्य संबंधित दस्तावेज हम कहां से ले सकते हैं?

एनसीआरबी की वेबसाइट पर सभी दस्तोवज नोडल ऑफिसर सेक्शन के अंतर्गत है। आपको अपने राजय के नोडल अधिकारी के संपर्क में रहना होगा जो आपके लिए इन्हें डाउनलोड करेगा।

2.3.2 डिजाइन

ए) एमवीपी और एमवीसी पैटर्न का कब उपयोग करना है?

सामान्यत: एमवीसी को उपयोग वेब आधारित एप्लीकेशन में किया जाता है, वहीं एमवीपी फॉर्म आधारित एप्स के लिए है। सीएएस के लिए दोनों ही लागू होते हैं।

बी) अनुक्रम डायग्राम अनुरोध के लिए, कोई कब प्रजेंटर और कंट्रोलर का उपयोग करेगा?

यह सेवा के कार्यात्मकता और कार्यक्षमता के जरूरतों के अनुसार निर्भर करता है। डिजाइन जावा और .एनईटी प्लेटफॉर्म के समान है।

सी) लॉग किए गए फाइलों को कहां रखा जाता है? डाटाबेस या फाइल सिस्टम में

दोनों जगह, लॉग किए फाइल डाटाबेस और फाइल सिस्टम में रहते हैं।

डी) चूंकि लॉग फाइल सर्वर में स्थानांतरण होता है, इन लॉग की क्या अर्काइवल अवधि है?

सर्वर का अर्काइवल पॉलिसी (डाटाबेस, लॉग, हाउसकीपिंग आदि) यह राज्य की विशिष्ट पॉलिसी होगी जो राज्य के सिस्टम इंटीग्रेटर लागू करेगा।

ई) क्या प्रत्येक राज्य का स्थानांतरण एक ही घटक होगा या कई स्थानांतरण घटक भार साझा करने के लिए लगाए जाएंगे

केवल एक ही स्थानांतरण घटक पूरे राज्य में लगाया जाएगा।

एफ) स्क्रीन के लिए क्या डिफॉल्ट रिजोल्यूशन होगा

1024 * 768


2.3.3 इंस्टॉल करना

ऑफलाइन

ए) सीएएस ऑफलाइन एप्लीकेशन को कैसे इंस्टॉल करते हैं?

साझा किए गए इंस्टॉलेशन गाइड पर जाइए।

बी) ऑफलाइन स्थापना के लिए इंस्टॉलेशन सीडी में, हमें दो डायरेक्टरी सर्वर मिलते हैं सीसीटीएनएस एप्लीकेशन और क्लाइंट सीसीटीएनएस एप्लीकेशन, इनमें क्या अंतर है और इनमें से कौन सा उपयोग करना है?

पुलिस स्टेशन में सेटअप के लिए केवल एक ही मशीन में सर्वर सीसीटीएनएस एप्लीकेशन होगा और अन्य मशीन में क्लाइंट सीसीटीएनएस एप्लीकेशन होगा। इन सभी सिस्टम में लोकल लेन होगा। जिस सिस्टम में आप सीसीटीएनएस ऑफलाइन सर्वर बनाना चाहते हैं, उसमें सर्वर सीसीटीएनएस इंस्टॉल करना होगा बाकी सभी मशीन में क्लाइंट सीसीटीएनएस एप्लीकेशन इंस्टॉल किया जाएगा।

सी) सर्वर सीसीटीएनएस एप्लीकेशन इंस्टॉल करने के दौरान एमवाईएसक्यूएल इंस्टॉल करने में समस्या आ जाती है, यह सेवा शुरू करने में /सिक्योरिटी अप्लाई सेटिंग करने में असफल हो जाता है।

यह तब होता है जब मशीन में पहले से एमवाईएसक्यूएल इंस्टॉल रहता है, उस मशीन में पूरी तरह से एमवाईएसक्यूएल सिस्टम (प्रोग्राम फाइल और रजिस्ट्री) को हटाना पड़ता है, और उसके बाद फिर से एमवाईएसक्यूएल इंस्टॉल करने का प्रयास करें।

डी) जब सर्वर सीसीटीएनएस एप्लीकेशन या क्लाइंट सीसीटीएनएस एप्लीकेशन इंस्टॉल करते हैं, हमें विकल्प मिलता है कॉन्फिगर सीएएस स्टेट यूआरएल, इसका क्या महत्व है।

सीएएस स्टेट यूआरएल राज्य में स्थापित ऑनलाइन एप्लीकेशन का एड्रेस है, इसको सही तरीके से कॉन्फिगर किया जाना चाहिए जब सीएएस ऑफलाइन को इंस्टॉल करते हैं (क्लाइंट और सर्वर दोनों ही), यदि बाद में बदलाव की जरूरत हो तो इसे एप्लीकेशन के फोल्डर में फाइल डाटाबेस. प्रोपर्टीज (ऑनलाइन यूआरएल के साथ लाइन की शुरुआत) में कर सकते हैं।

ई) ऑफलाइन एप्लीकेशन इंस्टॉल करने के बाद डेस्कटॉप पर आईकॉन नहीं आते।

अगर आप आईकॉन नहीं पाते हैं तो आप इसे इन चरणों का पालन कर बना सकते हैं

एप्लीकेशन के फोल्डर (साधारणत: C:\CCTNSApplication\CCTNSApplication) में जाकर सीसीटीएनएस_ऑफलाइन_एप्लीकेशन.जार फाइल में जाकर राइट क्लिक करें और सेंड टू चयन करें, इसके बाद डेस्कटॉप (शार्टकट बनाएं) पर क्लिक करें जैसा नीचे दिखाया गया है।

एफ) जब हम ऑफलाइन एप्लीकेशन को खाेलने का प्रयास करते हैं तो एरर “डाटाबेस के साथ कनेक्ट करने में अक्षम” बताता है।

यह समस्या तब आती है जब आप डाटाबेस की सेटिंग गलत करते हैं, इसे जांच/बदल सकते हैं एप्लीकेशन फोल्ड के फाइल डाटाबेस.प्रोपर्टीज (डीबी.यूआरएल, डीबी.यूजर, डीबी.पासवर्ड के मूल्य को चेक/बदलने की जरूरत है)।

जी) कनेक्टिविटी अलर्ट: “सीएएस ऑनलाइन का कनेक्शन उपलब्ध है, सीएएस ऑफलाइन उपलब्ध नहीं होगा”। यह क्यों आता है?

यह अलर्ट तब अाता है जब कोई ऑफलाइन एप्लीकेशन को खोलने का प्रयास करता है लेकिन ऑनलाइन एप्लीकेशन उपलब्ध होता है। आॅफलाइन एप्लीकेशन तभी उपयोग किया जा सकता है जब ऑनलाइन एप्लीकेशन उपलब्ध न हो (नेटवर्क या अन्य कारण से)

एच) ऑफलाइन एप्लीकेशन में उपयोगकर्ता कैसे बनाए जाते हैं।

ऑफलाइन एप्लीकेशन में उपयोगकर्ता नहीं बना सकते, उपयोगकर्ता केवल ऑनलाइन एप्लीकेशन में ही बना सकते हैं, और एप्लीकेशन को सिक्रोनाइज कर उपयोगकर्ता ऑफलाइन में स्थानांतरित किया जाता है। इसलिए अगर कोई उपयोगकर्ता बनाना चाहता है, तो यह ऑनलाइन एप्लीकेशन में ही बनाया जा सकता है, बाद में उसे सिंक्रोनाइज कर ऑफलाइन एप्लीकेशन में उपयोगकर्ता जा सकता है।

आई) ऑफलाइन एप्लीकेशन का सेटअप होने के बाद, लॉगइन के लिए क्या परिचय-पत्र की जरूरत पड़ेगी ऑफलाइन सिस्टम में।

उपयोगकर्ता ऑनलाइन एप्लीकेशन में ही बनता है, कोई भी उन उपयोगकर्ताओं की जानकारी संबंधित व्यक्ति से लेकर एप्लीकेशन का उपयोग कर सकता है।

जे) ऑनलाइन सिस्टम में जब जीडी बनाने की कोशिश करते हैं, वह कहता है “ऑफलाइन एप्लीकेशन इस पुलिस स्टेशन में कॉन्फिगर नहीं किया गया है”, इसका क्या मतलब होता है?

यह निम्न कारणों से होता है।

ऑफलाइन इस सिस्टम में कॉन्फिगर नहीं किया गया है: यह कॉन्फिगर पुलिस स्टेशन में काम करने के लिए किया जा सकता है।
ऑफलाइन सिस्टम कॉन्फिगर किया गया है लेकिन नेटवर्क डाउन या नहीं है: यह सिस्टम तैयार है पुलिस स्टेशन में काम के लिए प्रयोग हो रहा है।

के) ऑफलाइन सिस्टम में हिन्दी लॉगइन में होम पेज पर दिखाता है कि पहचानने योग्य अक्षर नहीं हैं।

यह एमवाईएसक्यूएल के गलत इंस्टॉलेशन के कारण होता है। एमवाईएसक्यूएल को डाटाबेस से हटाकर फिर से कॉन्फिगर कर इसे ठीक किया जा सकता है। इसका ध्यान रखना होगा कि इसे करने वक्त कहीं पूरा डाटा क्लियर न हाे जाए। जब फिर से कॉन्फिगर करेंगे निम्न ऑशन हरे रंग में हाईलाइट होगा, उसे जरूर सलेक्ट करें।

एल) हिन्दी लॉगइन से ऑफलाइन सिस्टम में लॉग करने के बाद मैं कैसे हिन्दी में टाइप कर सकता हूं।

इसके लिए सिस्टम में हिन्दी कीबोर्ड की सेटिंग को चालू करना पड़ेगा, इसे कंट्रोल पैनल से किया जा सकता है, विंडो 7 के मामले में यह आसान है लेकिन विंडो एक्सपी में ऑपरेटिंग सिस्टम की सीडी की जरूरत पड़ेगी।

एम) कई बार जब आप ऑफलाइन सिस्टम में लॉग करते हैं और पावर चले जाने के कारण सिस्टम बंद हो जाता है, अब यदि आप फिर से लॉगइन करने का प्रयास उसी उपयोगकर्ता के रूप में करना चाहेंगे तो, ऑफलाइन में आपको एक एरर बताएगा कि “उपयोगकर्ता पहले से लॉग किया हुआ है”

इसके निराकरण के लिए स्थानीय सीएएस के प्रतिनिधि से संपर्क करना होगा या सीएएस हेल्पडेस्क पर कॉल करना होगा।

एन) सीएएस एप्लीकेशन ऑफलाइन में जाने के बाद हमें एरर प्राप्त होता है “डाटाबेस से जुड़ने में अक्षम”?

यूजर नेम लिखने के बाद स्पेस देने से बचें, इसी कारणवश उपयोगकर्ता जुड़ने में अक्षम होता है।

ओ) सीएएस ऑफलाइन वर्सन इंस्टॉल करने के बाद लॉग करने के दौरान यदि कोई अवैध उपयोगकर्ता का संदेश पाता है?

 

 


 

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