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विधि विज्ञान प्रयोगशाला

फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं
महानगर, लखनऊ
फैक्स :
0522-2371232. Ph : 0522-2371232
ईमेल :
dirfsl@up.nic.in

 

जनसूचना अधिकारियों की सूची 


संक्षिप्त इतिहास

उत्तर प्रदेश में विधि विज्ञान प्रयोगशाला की स्थापना से पूर्व अपराध साक्ष्य से संबन्धित मामलों की जांच आपराधिक अन्वेषण विभाग (सीआईडी) यूपी के वैज्ञानिक अनुभाग द्वारा की जाती थी।

1967 में एक विस्तृत प्रस्ताव पेश किया गया जिसमें पहले के सभी प्रस्तावों के इतर राज्य में एक विधि विज्ञान प्रयोगशाला स्थापित करने की बात कही गई थी। अंततः 1969 में आपराधिक अन्वेषन विभाग के वैज्ञानिक अनुभाग को एक विधि विज्ञान प्रयोगशाला में परिवर्तित करने का शासनादेश जारी किया गया।

यूपी पुलिस आयोग 1970-71, ने आगरा स्थित रसायन परीक्षक प्रयोगशाला का विधि विज्ञान प्रयोगशाला, लखनऊ के साथ विलय करने और आगरा, लखनऊ व वाराणसी में तीन पूर्णकालिक विधि विज्ञान प्रयोगशालाएँ स्थापित करने की अनुशंसा की। वर्ष 1979 में आगरा की रसायन परीक्षक प्रयोगशाला का विलय विधि विज्ञान प्रयोगशाला, लखनऊ में करने और इन दोनों प्रयोगशालाओं को सभी आवश्यक आधुनिक उपकरणों के साथ पूर्णविकसित करने का एक शासनादेश जारी किया गया। इसके अलावा वाराणसी में एक पूर्ण विकसित विधि विज्ञान प्रयोगशाला स्थापित करने का भी निर्णय लिया गया।

लखनऊ व आगरा की प्रयोगशालाओं के लिए निम्नलिखित सात खंड स्वीकृत किए गए :

  • भौतिकी खंड
  • दस्तावेज़ खंड
  • रसायनशास्त्र खंड
  • विष विज्ञान खंड
  • अस्त्र-विज्ञान खंड
  • जीव विज्ञान खंड
  • सीरम विज्ञान खंड

1986 में पहली बार विधि विज्ञान प्रयोगशाला के नियमित निदेशक के लिए यूपी लोक सेवा आयोग के जरिये नियुक्ति की गई। 1986 में ही अन्य पदों के लिए यूपी लोक सेवा आयोग द्वारा विज्ञापन निकाला गया। इसबीच प्राथमिक उपकरण के अलावा प्रयोगशाला के विभिन्न खंडों के लिए आवश्यक आधुनिक विश्लेषणात्मक उपकरण प्राप्त किए गए। दोनों प्रयोगशालाओं में प्रत्येक खंड के लिए केंद्र की स्थापना की गई। पहली बार दोनों ही प्रयोगशालाओं में साक्ष्य के परीक्षण का काम 1 अप्रैल 1987 को शुरू हुआ।

विस्फोट हुये पदार्थ की जांच का काम करने के लिए एक विस्फोटक खंड भी मंजूर किया गया। इस खंड ने आगरा में वर्ष 1987 में काम करना शुरू किया। इस खंड से राज्य के सभी जिलों की जरूरतों को पूरा करने की उम्मीद की जाती है। वर्ष 1990 में लखनऊ की प्रयोगशाला में नवगठित विधि चिकित्सा (मेडिको लीगल), झूठ पकड़ना और उपस्कर विश्लेषण खंडों व आगरा प्रयोगशाला के लिए उपस्कर विश्लेषण और विस्फोटक खंड में विभिन्न पदों के लिए सरकार ने मंजूरी दी।

फील्ड यूनिट

अपराध स्थल से सुराग की सामग्री एकत्र करना प्रयोगशाला में इनकी जांच करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है। अधिकांश मामलों में प्रयोगशाला में दुबारा जांच करना तो मुमकिन होता है लेकिन अपराध स्थल एक बार बिगड़ जाये तो वहाँ से उपयुक्त भौतिक साक्ष्य हासिल कर पाना कभी संभव नहीं होता है। इसी के मद्देनजर, राज्य के हर जिले में विधि विज्ञान प्रयोगशाला की फील्ड इकाइयां स्थापित की गईं। इन फील्ड इकाइयों को जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक / पुलिस अधीक्षक के परिचालन नियंत्रण के अधीन रखा गया है। विवेचना अधिकारी कि सहायता के लिए कई जिलों में वैज्ञानिक स्टाफ रखा गया है।

उद्देश्य :

  • पुलिस, न्यायपालिका व अन्य सरकारी विभाग और उपक्रमों द्वारा इंगित अपराध संबंधी साक्ष्यों की जांच करना।
  • पुलिस कर्मियों, न्यायिक अधिकारियों और संबन्धित लोगों को अपराध विवेचना में विधि विज्ञान कि भूमिका और इसके प्रयोग की जानकारी देना।
  • विवेचना अधिकारी को अपराध विवेचना में वैज्ञानिक सहायता प्रदान करना और उसे अपराध स्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र करने, उसकी उचित पैकिंग, सील करने और जांच के लिए प्रयोगशाला भेजने में मदद करना।
  • पुलिस व अन्य विधि विज्ञान संस्थानों के कर्मचारियों को प्रशिक्षण देना।
  • पुलिस, न्यायिक व अन्य संबन्धित संस्थानों में प्रशिक्षुओं को विधि विज्ञान पर व्याख्यान देना।

संगठनात्मक ढांचा

कार्मिक :
फील्ड इकाइयों समेत कुल स्वीकृत कर्मचारी : 507
 

वर्तमान गतिविधियां

विश्लेषणात्मक आवश्यकताओं के अनुसार किसी मामले के साक्ष्यों को प्रयोगशालाओं के एक या अधिक खंडों में जांचा जाता है। विभिन्न खंडों में किस तरह की प्रकृति की जाँचें की जा सकती हैं वह इस प्रकार हैं :

भौतिकी खंड : पेंट, शीशे, मिट्टी, रस्सी, धागे, बिजली के तार, कपड़े, लॉटरी टिकट, मुहर इत्यादि की भौतिक जांच; औजारों के निशान की तुलना, मिटाये गए पहचान नंबर / अंकों को पूर्व की अवस्था में लाना, दुर्घटनावश टूटे टुकड़ों को जोड़ कर स्रोत का पता करना, प्रहार की दिशा पता करने के लिए शीशे के टूटे टुकड़ों की जांच, नकली नोटों की जांच, तुलना के लिए तत्वों का पता लगाने का विश्लेषण और साक्ष्यों की शिनाख्त।

दस्तावेज़ खंड : प्रामाणिकता या जाल-साजी को सिद्ध करने के लिए ज्ञात मानकों पर सवालिया लेखन, टाइपराइटिंग, मुद्रित सामाग्री, हस्ताक्षर की तुलना; मिटाने, परिवर्तन, बदलाव, गुप्त लेखन के लिए दस्तावेजों की जांच; गोपनीय बीजलेख वाचन; लेखन / कागज की परस्पर उम्र प्रमाणित करना; जले हुये दस्तावेजों की जांच आदि।

अस्त्र-विज्ञान खंड: आग्नेयास्त्रों की सक्षमता पता लगाने के लिए उनकी जांच। चलायी गई गोलियों, कारतूसों, छर्रों से पता करना कि क्या वह आग्नेयास्त्र शस्त्र कानून के अधीन आता है, वह कैसा और किस प्रकार का आग्नेयास्त्र है। पता करना कि क्या दो या अधिक कारतूस / कारतूसके खोल एक ही या अलग –अलग आग्नेयास्त्र से दागे गए हैं, किसी खास आग्नेयास्त्र से कारतूस/कारतूस के खोल का संबंध स्थापित करना, आग्नेयास्त्र का प्रकार स्थापित करने के मद्देनजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट / जख्म रिपोर्ट / एक्स रे प्लेट / कपड़े की जांच करना, गोलीबारी का साक्ष्य पता करने के लिए आग्नेयास्त्र की जांच, दुर्घटनावश गोली चलने की संभावना पा पता करने के लिये आग्नेयास्त्र की जांच, गोलीबारी कितनी दूर से हुयी इसका आकलन, गोलीबारी से हुये अवशिष्ठ का पता करके गोली चलाने वाले या कारतूस से हुये छेद की पहचान, गोलीबारी के स्थल के पुनर्निर्माण के लिए सामान्य जांच आदि।

रसायनशास्त्र खंड : अफीम और इसके क्षार, हेरोइन, गाँजा, भांग, चरस और अन्य नशीले द्रव्य का परीक्षण; अवैध शराब, वार्निश, पेट्रोल, डीजल, केरोसिन आदि का परीक्षण; आगजनी के संदिग्ध मामलों में ज्वलनशील तरल व ठोस पदार्थों का परीक्षण; अलकोहलयुक्त औषधियों आदि का परीक्षण; डाई, स्याही, दाग-धब्बे और अन्य जैविक व अजैविक रसायनों का परीक्षण।

विषविज्ञान खंड: वनस्पति मूल के विष (धतूरा, कनेर, अफीम, मदार ईकोनाइट, नक्स वामिका आदि), अजैविक लवण (संखिया,कॉपर सल्फेट, साइनाइड आदि), तेजाब, औषधियाँ, क्षार तत्व, कीटनाशक (डीडीटी, बीएचसी पैराथीआन, मैलाथीआन, अल्ड्रिन, ज़िंक फॉस्फेट, एल्युमिनियम फॉसफाइड आदि), एल्कोहल (मीथाइल व ईथाइल अल्कोहल आदि) तथा शीशे के पाउडर समेत अन्य सभी प्रकार के विष की जांच के लिए विसरा, पेट के द्रव, उल्टी, मूत्र व रक्त का परीक्षण।

जीव विज्ञान खंड : जैविक द्रव (वीर्य, लार, पसीना, मूत्र, मल आदि) का परीक्षण; मानव / पशु मूल के ऊतकों का परीक्षण; बाल, ऊन और रेशों का परीक्षण; उत्पत्ति, आयु, लिंग, शारीरिक बनावट स्थापित करने के लिए हड्डियों, दांतों आदि का परीक्षण; कागज के गूदे का परीक्षण; बीज, पत्तों के टुकड़े, फूल, पराग कण, लकड़ी, छाल, टहनी आदि पौधे के हिस्सों की पहचान की जांच; डायटम और अन्य सूक्ष्म जीवों फफूंद, काई, भुकड़ी जैसे अत्यंत सूक्ष्म वनस्पति तत्वों की पहचान।

सीरम विज्ञान खंड : रक्त की रसायनिक, माइक्रोस्कोपिक और स्पेक्ट्रोस्कोपिक जांच, रक्त के धब्बों व अन्य जैविक धब्बों की पहचान व ग्रुपिंग के लिए इनकी सीरम विज्ञानी जांच, रक्त के धब्बों से लिंग की पहचान, रक्त धब्बों की एंजाइम ग्रुपिंग।

विस्फोटक खंड : विस्फोटक पदार्थों का परीक्षण और विस्फोट के उपरांत विस्फोटक यंत्र के अवशेषों का परीक्षण तथा विस्फोट स्थल का परीक्षण।

चिकित्सा-विधिक खंड : पीड़ित / संदिग्ध व्यक्ति के जख्मों की जांच, शस्त्र व विषविज्ञान खंडों में विशेषज्ञों को उपयुक्त जानकारी व पोस्टमोर्टम रिपोर्ट की व्याख्या के जरिये सहायता प्रदान करना तथा चिकित्सा-विधि सलाह के लिए हड्डियों और ऊतकों का परीक्षान। यह खंड अभी स्थापना की प्रक्रिया में है।

मिथ्या-अनुसंधान खंड : संदिग्ध अपराधियों और गवाहों से पूछताछ। यह खंड स्थापना की प्रक्रिया में है।

उपस्कर विश्लेषण खंड : प्रयोगशाला के विभिन्न खंडों की जरूरतों के अनुसार विश्लेषण के आधुनिक उपस्कर तरीकों के प्रयोग से नमूनों का परीक्षण। यह खंड स्थापना की प्रक्रिया में है।

अपराध विवेचना में विज्ञान का प्रयोग कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ दिनो-दिन लोकप्रिय होता जा रहा है। विगत वर्षों में विधि विज्ञान प्रयोगशाला को संदर्भित मामलों की बढ़ती संख्या से यह एकदम स्पष्ट है। 1979 में जब उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की जांच एजेंसियों को उपलब्ध वैज्ञानिक सुविधाओं के पुनर्गठन का फैसला किया था तब आगरा और लखनऊ की प्रयोगशालाओं को संदर्भित मामलों की संख्या मात्र 7,500 थी। आज इन प्रयोगशालाओं को मिलने वाले मामलों की औसत संख्या करीब 24,000 है।

विधि विज्ञान प्रयोगशाला आगरा व लखनऊ का अधिकारक्षेत्र

लखनऊ

विधि विज्ञान प्रयोगशाला के किसी भी खंड से संबन्धित सभी प्रकार के मामले : लखनऊ, फैजाबाद, कानपुर, गोरखपुर, आजमगढ़, बस्ती, मिर्जापुर, वाराणसी और इन रेंज की जीआरपी व सीआईडी।

आगरा

विधि विज्ञान प्रयोगशाला के किसी भी खंड से संबन्धित सभी प्रकार के मामले : बरेली, सहारनपुर, आगरा, झांसी, चित्रकूटधाम, मेरठ, मुरादाबाद और इन रेंजों की जीआरपी और सीआईडी।

नोट :

  • उत्तरांचल के सभी प्रकार के मामलों का परीक्षण विधि विज्ञान प्रयोगशाला, आगरा द्वारा होता है।
  • विस्फोटकों के संबन्धित मामलों का परीक्षण सिर्फ आगरा की प्रयोगशाला द्वारा होता है।

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग :

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के यूएनएफएडीएसी परियोजना के तहत सुदृढीकरण के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला, लखनऊ का चयन किया गया था और मादक व नशीले पदार्थों के विश्लेषण व पहचान के लिए 1990 में इसे एचपीएलसी, जीएलसी और टीएलसी जैसे आधुनिक विश्लेषणात्मक उपकरण प्रदान किए गए थे। इन उपकरणों का इस्तेमाल नियमित विश्लेषणात्मक कार्यों के लिए किया जा रहा है।

12वीं इंटरपोल संगोष्ठी में पेंट व शीशे जैसे साक्ष्यों की समन्वय प्रयोगशाला के रूप में विधि विज्ञान प्रयोगशाला, लखनऊ को स्वीकृत किया गया था। 1998 में हुई संगोष्ठी में ‘साक्ष्यों के प्रकार:पेंट व शीशा’ विषय पर प्रयोगशाला के निदेशक ने एक अवलोकन पत्र प्रस्तुत किया था।

पुस्तकालय व संग्रहालय

लखनऊ स्थित प्रयोगशाला में एक पुस्तकालय स्थापित है। इस पुस्तकालय में 3039 से अधिक वैज्ञानिक पुस्तकें उपलब्ध हैं।

विदेशी पत्र-पत्रिकाएँ

क्रम संख्यापत्रिका का नाम
1. फोरेंसिक साइंस इंटेरनेशनल
2. जर्नल ऑफ फोरेंसिक साइंस
3. मेडिसिन साइंस लॉं
4. द पुलिस जर्नल
5. जर्नल ऑफ अनालिटिकल टॉक्सिकोलोजी
6. आस्ट्रेलियन जर्नल ऑफ फोरेंसिक साइंस
7. साइंस एंड जस्टिस
 8. जर्नल ऑफ कनाडियन सोसाइटी
9. मेडिकों-लीगल जर्नल
10. साइंटिफिक अमेरिकन

भारतीय पत्र-पत्रिकाएँ

क्रम संख्यापत्रिका का नाम
1. इंडियन अकादमी ऑफ फोरेंसिक साइंस
2. इंडियन जर्नल ऑफ क्रिमिनोलोजी

विधि विज्ञान संग्रहालय

विधि विज्ञान प्रयोगशाला, लखनऊ में एक पूर्ण-सुसज्जित संग्रहालय स्थापित किया गया है। चिकित्सा-विधिक मॉडल और दुर्लभ विष यहाँ प्रदर्शित किए गए हैं। इसके अलावा विधि विज्ञान संबंधी उपयोगी चार्ट भी प्रदर्शित किए गए हैं।

अन्य संस्थानों के कर्मियों को व्याख्यान / प्रशिक्षण

विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल), उत्तर प्रदेश के वैज्ञानिक विभिन्न संगठनों के प्रशिक्षुओं को व्याख्यान देते हैं। उदाहरण के लिए; नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिमिनोलोजी एंड फोरेंसिक साइंसेज, एम.एच.ए. (एनआईसीएफएस), जुड़ीशियल ट्रेनिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट, यूपी (जेटीआरआई), पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज (पीटीसी) क्राइम ब्रांच सीआईडी, यूपी, राष्ट्रीयकृत बैंक, डाइरेक्ट टैक्स रीज़नल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, नेशनल अकादमी ऑफ डाइरेक्ट टैक्सेस, पंजाबी युनिवर्सिटी पटियाला, ट्रेड टैक्स आफिसर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, लखनऊ। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिमिनोलोजी एंड फोरेंसिक साइंस, भारत सरकार के प्रशिक्षु तथा सागर विश्वविद्यालय व अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के एमएससी के छात्र व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए समय-समय पर एफएसएल, उत्तर प्रदेश से सम्बद्ध किए जाते हैं। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो, जुड़ीशियल ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, आरपीएफ अकादमी, पुलिस ट्रेनिंग कालेज, जैसे अन्य विभिन्न संगठनों से प्रशिक्षु व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला का दौरा करते हैं। प्रयोगशाला के वरिष्ठ वैज्ञानिक विभिन्न विश्वविद्यालयों के अलग-अलग पाठ्यक्रमों के लिए बाह्य परीक्षक / पेपर सेटर के रूप में भी कार्य करते हैं।

भविष्य की योजनाएँ

  • वाराणसी और मुरादाबाद में आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित पूर्णकालिक विधि विज्ञान प्रयोगशालाएँ स्थापित की जाएंगी।
  • डीएनए फिंगर प्रिंटिंग के लिए एक आधुनिक विश्लेषणात्मक खंड लखनऊ स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला में बनाया जा रहा है।

सार्वजनिक जुड़ाव (यदि हो तो) : विधि विज्ञान प्रयोगशालाएँ आपराधिक न्याय प्रणाली को सहायता देने का कार्य करती हैं और इस में गोपनीयता शामिल होती है। प्रयोगशालाएँ आम जनता से सीधे तौर पर व्यवहार नहीं करती हैं। वे पुलिस, न्यायपालिका और सरकारी विभाग व उपक्रमों द्वारा संदर्भित मामलों का ही परीक्षण करती हैं।

लोक हित की जानकारी (यदि हो तो) :विधि विज्ञान प्रयोगशाला की परीक्षण रिपोर्ट प्रभावी और निर्णायक हो इसके लिए अपराध स्थल का संरक्षण बहुत जरूरी है। प्रयोगशाला में जो जांच की जाती है वह घटनास्थल से मिले उचित सुराग सामाग्री पर ही पूरी तरह आधारित होती है। अतः आम जनता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अपराध स्थल के साथ छेड़-छाड़ न की जाये और जांच दल के आने तक वह मूल स्वरूप में ही बना रहे।

अन्य कार्य / प्रमुख बिन्दु :साक्ष्यों की सामान्य जांच के अलावा प्रयोगशाला के वैज्ञानिक साक्ष्यों की जांच के विभिन्न तरीकों से संबन्धित शोध और विकास में भी शामिल रहते हैं। अब तक 135 शोध पत्र विभिन्न गोष्ठियों में प्रस्तुत किए जा चुके हैं और विख्यात पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। विधि विज्ञान प्रयोगशाला के विभिन्न खंडों में अपराध साक्ष्यों से संबन्धित व्यावहारिक शोध कार्य एक सतत प्रक्रिया है। जो शोध कार्य विगत समय में हो चुके हैं और जो वर्तमान में जारी हैं उनमें से कुछ इस प्रकार हैं :

  • हाथ के घुमाव के अनुक्रम के माध्यम से लेखन की उम्र का निर्धारण
  • जले हुये दस्तावेजों का संरक्षण और परीक्षण
  • डियाटॉम विश्लेषण / डूबने के मामलों की विधि विज्ञान जांच के लिए डेटा बेस
  • उत्तर प्रदेश में सीरम विज्ञान की विशेषताओं का डेटा बेस
  • रक्त के सीरम विधि विज्ञान परीक्षण पर वातावरण का प्रभाव
  • यूपी में हत्याओं का स्वरूप
Mahila Samman Prakoshtha, U.P. Police

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