Your browser does not support JavaScript uppolice.gov.in| Official Website of Uttar Pradesh Police | Police Units | Special Enquiries | F.A.Q.

Frequently Asked Questions

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)

जनपदों के विशेष जाँच प्रकोष्ठों द्वारा तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (यथा संशोधित 2015 एवं 2018) एवं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) नियम, 1995 (यथा संशोधित 2016 एवं 2018) के सम्बन्ध में प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्नोत्तर-
प्रश्न 01ः- किन जनपदों में शासन द्वारा विशेष जाँच प्रकोष्ठ हेतु स्टाफ की स्वीकृति प्रदान की गई है ?
उत्तरः- उत्तर प्रदेश के निम्नांकित 20 जनपदों में शासन द्वारा विशेष जाँच प्रकोष्ठ हेतु स्टाफ की स्वीकृति प्रदान की गई है:-
1- लखनऊ 2- हरदोई 3- सीतापुर 4- रायबरेली 5- उन्नाव 6- गोण्डा 7- बहराइच 8- बाराबंकी 9- सुल्तानपुर 10- फतेहगढ़ 11- इटावा 12-बांदा 13-जालौन 14- बस्ती 15- गोरखपुर 16-आजमगढ़ 17- बदायूँ 18- मेरठ 19- वाराणसी 20- आगरा।
प्रश्न 02ः- जनपदों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 यथा संशोधित अधिनियम 2015 के अन्तर्गत पंजीकृत अभियोगों की विवेचना किस स्तर के अधिकारी द्वारा की जाती है ?
उत्तरः- कम से कम पुलिस उपाधीक्षक अथवा सहायक पुलिस आयुक्त स्तर का अधिकारी ही उक्त अधिनियम के अन्तर्गत पंजीकृत अभियोग की विवेचना कर सकता है।
प्रश्न 03ः- जनपदों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के थानाध्यक्ष/प्रभारी निरीक्षक पद पर शासनादेश के अनुसार नियुक्त हेतु क्या प्रावधान है ?
उत्तरः- उ0प्र0 के जनपदों के थानों में 21 प्रतिशत अनुसूचित जाति तथा 02 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के थानाध्यक्ष/प्रभारी निरीक्षक नियुक्त किए जाने का प्रावधान है।
प्रश्न 04:- अनुसूचित जाति एवं अनसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 2015 के अन्तर्गत ‘‘आश्रित‘‘ से क्या अभिप्रेत है ?
उत्तर:- ‘‘आश्रित‘‘ से पीड़ित का ऐसा पति या पत्नी, बालक, माता, पिता, भाई और बहन जो ऐसे पीड़ित पर अपनी सहायता और भरण पोषण के लिए पूर्णतः या मुख्यतः आश्रित अभिप्रेत है। (धारा 2 (ख ख)।
प्रश्न 05:- अधिनियम के अन्तर्गत ‘’पीड़ित’‘ से क्या अभिप्रेत है ?
उत्तर:- अधिनियम के अन्तर्गत ‘‘पीड़ित‘‘ से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो धारा 2 की उपधारा (1) के खण्ड (ग) के अधीन अनुसूचित जाति एवं जनजाति की परिभाषा के भीतर आता है और जो इस अनुसूचित जाति एवं अनसूचित जाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 2015 के अधीन किसी अपराध के होने के परिणामस्वरूप शारीरिक, मानसिक, मनोवैज्ञानिक, भावनात्मक या धनीय हानि या उसकी सम्पत्ति को हानि वहन का अनुभव करता है। जिसके अन्तर्गत उसके नातेदार विधिक संरक्षक और विधिक वारिस भी हैं।
प्रश्न 06:-अनुसूचित जाति एवं अनसूचित जनजाति के उत्पीड़न सम्बन्धी मामलों की विवेचना कितने दिनों में समाप्त हो जानी चाहिए?
उत्तरः- अनुसूचित जाति एवं अनसूचित जनजाति (अत्यचार निवारण) नियम 1995, यथा संशोधित नियम 2016, के नियम 7(2) के अनुसार विवेचक द्वारा विवेचना उच्च प्राथमिकता के आधार पर 60 दिन के भीतर पूरी की जाएगी। यदि विवेचना 60 दिन के अन्दर पूरी नहीं होती है तो अन्वेषणकारी अधिकारी द्वारा लिखित में स्पष्ट किया जायेगा।
प्रश्न 07:- अधिनियम के अन्तर्गत अपराध कारित किये जाने पर क्या लोक सेवक की गिरफ्तारी के लिए नियोक्ता प्राधिकारी की अनुमति आवश्यक है?
उत्तरः- नहीं।
प्रश्न 08:- अधिनियम के अन्तर्गत अपराध कारित करने पर क्या जन सामान्य के किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए जनपद पुलिस प्रभारी की अनुमति आवश्यक है ?
उत्तरः- नहीं ।
प्रश्न 09:- यदि अभियोग में अन्तिम रिपोर्ट प्रेषित की जाती है तो क्या प्रथम सूचना रिपोर्ट पंजीकृत होने पर प्रदान की गयी राहत राशि वापस किया जाने का कोई प्रावधान है ?
उत्तरः- नहीं।
प्रश्न 10:- ऐसे कौन से अपराध हैं जिनमें आरोप पत्र के स्तर पर ही तथा विचारण से पूर्व सम्पूर्ण सहायता राशि प्रदान किये जाने का प्रावधान है?
उत्तरः- हत्या एवं मृत्यु, एसिड फेंकने अथवा एसिड फेंकने का प्रयत्न करने के प्रकरणों में सम्पूर्ण राहत राशि प्रदान किये जाने का प्रावधान है।
प्रश्न 11:- शासन के किस विभाग द्वारा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को उत्पीड़न होने की दशा में आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है ?
उत्तरः- समाज कल्याण विभाग द्वारा।
प्रश्न 12:- अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 यथा संशोधित अधिनियम, 2015 की विवेचना में तथा अन्य संरक्षण कार्य में लोक सेवक द्वारा कर्तव्यों की उपेक्षा के लिए दण्ड का क्या प्रावधान है ?
उत्तरः- अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 यथा संशोधित अधिनियम 2015 की धारा-4 के अन्तर्गत कोई भी लोक सेवक जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है, इस अधिनियम और उसके अधीन बनाये गये नियमो के अधीन उनके द्वारा पालन किये जाने के लिए अपेक्षित अपने कर्तव्यों की जानबूझकर उपेक्षा करेगा, वह कारावास  से, जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी किन्तु जो एक वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डनीय होगा।
प्रश्न 13:- अधिनियम के अन्तर्गत लोक सेवक के कर्तव्यों में कौन से कर्तव्य सम्मिलित हैं ?
उत्तरः- अधिनियम की धारा 4(2) के अन्तर्गत लोक सेवक के कर्तव्यों में निम्नलिखित सम्मिलित होगा:-
(क) पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी द्वारा सूचनाकर्ता के हस्ताक्षर लेने से पहले मौखिक रूप से दी गई सूचना को, सूचनाकर्ता को पढ़कर सुनाना और उसको लेखबद्ध करना।
(ख) इस अधिनियम और अन्य सुसंगत उपबंधों के अधीन शिकायत या प्रथम सूचना रिपोर्ट को रजिस्टर करना और अधिनियम की उपयुक्त धाराओं के अधीन उसको रजिस्टर करना।
(ग) इस प्रकार अभिलिखित की गई सूचना की एक प्रति सूचनाकर्ता को तुरंत प्रदान करना,
(घ) पीड़ितों या साक्षियों के कथन को अभिलिखित करना,
(ङ) अन्वेषण करना और विशेष न्यायालय या अनन्य विशेष न्यायालय में साठ दिन की अवधि के भीतर आरोप पत्र फाइल करना तथा विलंब, यदि कोई हो, लिखित में स्पष्ट करना,
(छ) इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों में विनिर्दिष्ट किसी अन्य कर्तव्य का पालन करना,
इन कर्तव्यों की उपेक्षा के लिए लोक सेवक को दण्डित किये जाने का प्रावधान भी है।
प्रश्न 14:- इस अधिनियम के अन्तर्गत क्या इलेक्ट्रानिक अभिलेखों का सही रूप से तैयार अथवा विघटित करना अथवा अनुवाद करना कर्तव्य की श्रेणी में आता है ?
उत्तरः- हां।
प्रश्न 15:- अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के अन्तर्गत अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्य के प्रति मतदान सम्बन्धी किन अत्याचारों का वर्णन है ?
उत्तरः- अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3 (ठ) के अनुसार अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्य को निम्नलिखित के लिए मजबूर या अभित्रस्त या निवारित करेगा -
(अ) मतदान न करने या किसी विशिष्ट अभ्यर्थी के लिए मतदान करने या विधि द्वारा उपबंधित से भिन्न रीति से मतदान करने;
(आ) किसी अभ्यर्थी के रूप में नाम निर्देशन फाइल न करने या ऐसे नाम निर्देशन को प्रत्याहृत करने; या
(इ) किसी निर्वाचन में अभ्यर्थी के रूप में अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्य के नाम निर्देशन का प्रस्ताव या समर्थन नहीं करने;
(ड) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी ऐसे सदस्य को, जो संविधान के भाग 9 के अधीन पंचायत या संविधान के भाग 9क के अधीन नगरपालिका का सदस्य या अध्यक्ष या किसी अन्य पद का धारक है, उसके सामान्य कर्तव्यों या कृत्यों के पालन में मजबूर या अभित्रस्त या बाधित करेगा;
(ढ) मतदान के पश्चात, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को उपहति या घोर उपहति या हमला करेगा या सामाजिक या आर्थिक बहिष्कार अधिरोपित करेगा या अधिरोपित करने की धमकी देगा या किसी ऐसे लोग सेवा के उपलब्ध फायदों से, निवारित करेगा, जो उसको प्राप्त है;
(ण) किसी विशिष्ट अभ्यर्थी के लिए मतदान करने या उसको मतदान नहीं करने या विधि द्वारा उपबंधित रीति से मतदान करने के लिए अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य के विरूद्ध इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध करेगा;
प्रश्न 16:- अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के अन्तर्गत अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी स्त्री के प्रति लैंगिक अपराधों के क्रम में ‘‘सहमति ‘‘ पद से क्या अभिप्रेत है ?
उत्तरः- ‘‘सहमति‘‘पद से कोई सुस्पष्ट स्वैच्छिक करार अभिप्रेत है, जब कोई व्यक्ति शब्दों, अंगविक्षेपों, या अमौखिक संसूचना के किसी रूप में विनिर्दिष्ट कार्य में भागीदारी की रजामंदी को संसूचित करता है:
परंतु अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की कोई स्त्री, जो लैंगिक प्रकृति कि किसी कार्य में शारीरिक अवरोध नहीं करती है, केवल इस तथ्य के कारण लैंगिक क्रिया कलाप में सहमति के रूप में नहीं माना जाएगा।
परंतु यह और कि स्त्री का, अपराधी के साथ सहित, लैंगिक इतिहास, सहमति, विवक्षित नहीं करता है या अपराध को कम नहीं करता है।
प्रश्न 17:- अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के अन्तर्गत धारा 3(2)Vक की क्या महत्ता है ?
उत्तरः- अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के अन्तर्गत धारा 3(2)Vक की अनुसूची में भा0द0वि0 की धाराओं 120ए, 120बी, 141, 142, 143, 144, 145, 146, 147, 148, 217, 319, 320, 323, 324, 325, 326बी, 332, 341, 354, 354ए, 354बी, 354सी, 354डी, 359, 363, 365, 376बी, 376सी, 447, 506 अथवा 509 का विवरण अंकित किया गया है जिनके अन्र्तगत अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति नियमावली 2016 के साथ संलग्न अनुसूची के प्रस्तर 41 में पीड़ित या उसके आश्रितों को 02 लाख रूपये की राहत राशि संदाय होती है। यह सामान्यतया संदाय राशि से अधिक होती है।
प्रश्न 18:- यदि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति एक्ट के अन्तर्गत गठित होने वाले अपराध के सम्बन्ध अन्य विधियां भी लागू होती हों तो क्या किया जाना चाहिए ?
उत्तरः- अधिनियम की धारा 20 के अनुसार इस अधिनियम में जैसा अन्यथा उपबन्धित है उसके सिवाय, इस अधिनियम के उपबन्ध, तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि या किसी रूढ़ि या प्रथा या किसी अन्य विधि के आधार पर प्रभाव रखने वाली किसी लिखित में उससे असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभावी होंगे।
प्रश्न 19:- यदि कोई अभियोग अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 एवं बच्चों का लैंगिक उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम, 2013 के अन्तर्गत पंजीकृत है तो उससे सम्बन्धित कार्यवाही किस कोर्ट में होगी (पाॅक्सो एक्ट कोर्ट/एससी/एस.टी. एक्ट कोर्ट) ?
उत्तरः- यदि कोई अभियोग अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 एवं बच्चों का लैंगिक उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम, 2013 के अन्तर्गत पंजीकृत है तो दण्ड प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत अभियोग से सम्बन्धित कार्यवाही बालकों के लैंगिक उत्पीड़न निवारण अधिनियम, 2013 पर विचारण करने वाले विशेष न्यायालय (पाॅक्सो एक्ट कोर्ट) में होगी। यथा - पीड़ित/पीड़िता के धारा 164 दं0प्र0सं0 के अन्तर्गत बयान अंकित करने हेतु, गैर जमानती वारण्ट प्राप्त करने हेतु अथवा धारा 82, 83 के अन्तर्गत उद्घोषणा जारी कराने आदि हेतु पाॅक्सो एक्ट कोर्ट से प्रार्थना की जाये। पीड़ित/पीड़िता को देय राहत राशि का भुगतान अपर पुलिस महानिदेशक अपराध के पत्र सं0 डीजी-सात-एस-1(21)/2016 दिनांक 26.07.2018 में की गयी अपेक्षानुसार किया जायेगा। जिसमें अंकित है कि यदि सम्बन्धित अपराध हेतु अन्य प्रावधानों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम से अधिक राहत राशि देय है तो अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम के अन्तर्गत देय राहत राशि का भुगतान किये जाने के पश्चात शेष देय राहत राशि के भुगतान हेतु जिलाधिकारी को अलग से प्रस्ताव भेजा जायेगा।
प्रश्न 20:- अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के अन्तर्गत पंजीकृत अभियोगों की विवेचना में अभिकथन किस प्रकार अंकित किये जाने चाहिये ?
उत्तरः- अधिनियम के अन्तर्गत अंकित किये गये बयानों में अभियोग में लगायी गयी धाराओं में वर्णित अपराधों/अत्याचारों सम्बन्धी तथ्यों (INGREDIENTS) को अवश्य सम्मिलित कर लिया जाये, अन्यथा ऐसा न हो कि विचारण के समय बयान के आधार पर अपराध सृजित ही न हो। जैसे-बलात्कार के प्रकरण में यह अवश्य अंकित किया जाये कि लैंगिक सम्बन्ध: (1) पीड़िता के इच्छा के विरूद्ध (2) पीड़िता की मर्जी के बिना अथवा पीड़िता की मर्जी के बिना मृत्यु या उपहति कारित करने के भय से उसकी सहमति प्राप्त कर अथवा यदि पीड़िता 16 वर्ष से कम है तो उसकी सहमति से या सहमति के बगैर या पीड़िता के मानसिक दिव्यांग होने के कारण अथवा नशे में होने के कारण उसकी सहमति प्राप्त कर स्थापित किया गया हो, का विवरण स्पष्ट रूप से अंकित किया जाये। इसके अतिरिक्त विवेचना के दौरान यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि क्या पेनीट्रेशन/प्रवेशन आंशिक था अथवा पूर्ण, आदि जैसे तथ्य अंकित किये जाने चाहिए। इसी प्रकार लगायी गयी धाराओं में इन्ग्रेडियन्ट (INGREDIENTS) अंकित किये गये अभिकथनों में स्पष्ट रूप से शामिल होने चाहिए।
प्रश्न 21:- अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के अन्तर्गत किन धाराओं के अन्तर्गत दर्ज अभियोगो में धारा 164 सी.आर.पी.सी. का बयान अंकित किया जाना चाहिए ?
उत्तरः- जैसा कि दण्ड प्रकिया संहिता की धारा 164 (5ए) में अंकित है कि यदि अभियोग भा0द0वि0 की धारा 354 अथवा 354ए अथवा 354बी, 354सी अथवा 354डी अथवा 376(1) अथवा 376(2) अथवा 376(ए) अथवा 376(बी) अथवा 376(सी) अथवा 376(डी) अथवा 509 भा0दं0सं0 के अन्तर्गत पंजीकृत हो तो पीड़िता के बयान यथाशीघ्र न्यायिक मजिस्ट्रेट से अंकित कराये जायें। यदि पीड़िता अस्थाई अथवा स्थाई रूप से मानसिक अथवा शारीरिक रूप से अक्षम है तो मजिस्ट्रेट द्वारा द्विभाषिया (इन्टरप्रेटर) अथवा विशेष प्रबोधक (स्पेशल एजूकेटर) की मदद लेने हेतु अनुरोध किया जाये। ऐसे कथन की वीडियो फिल्म भी तैयार की जायेगी।
यदि पीड़िता द्वारा धारा 294, 354, 354ए, 354बी, 354सी, 354डी का अभियोग पंजीकृत कराया गया है तो अभियुक्त अथवा अभियुक्तों के मोबाइल फोन तत्काल प्रक्रियानुसार जब्त कर उनमें से अश्लील सामग्री बरामदगी हेतु फोरेन्सिक एक्सपर्ट को प्रेषित कर दिया जाये।
प्रश्न 22:- यदि मृतक अथवा मृतका का आश्रित स्वयं ही हत्या अथवा मृत्यु के आरोप में आरोपित किया गया हो तो ऐसी स्थिति में राहत राशि किसको प्रदान की जायेगी ?
उत्तरः- ऐसी स्थिति में राहत राशि मृतक अथवा मृतका के बच्चों अथवा बच्चे न होने की दशा में माता, पिता, भाई, बहन जो मृतक अथवा मृतका पर अपनी सहायता और भरण पोषण के लिए पूर्णतः या मुख्यतः आश्रित थे, को प्रदान की जायेगी।
प्रश्न 23:- यदि पीड़ित कोई मंदबुद्धि बालिका/बालक है तो राहत राशि का भुगतान किसको किया जायेगा (पीड़ित/पीड़िता को अथवा संरक्षक को) ?
उत्तरः- यदि पीड़ित कोई मंदबुद्धि बालिका/बालक है तो उसके वैधानिक संरक्षक के संरक्षण में बालिका/बालक का बैंक खाता खुलवाकर राहत राशि प्रदान की जायेगी।
प्रश्न 24:- बलात्कार के प्रकरणों में जांच चिकित्सा रिपोर्ट में ‘नो ओपिनियन कैन बी गिवेन अबाउट रेप’ अंकित हो, तो ऐसे मामलों में क्या राहत राशि दी जानी चाहिए, विशेषकर ऐसे अभियोगों में जिनमें आरोप पत्र प्रेषित कर दिया गया हो ?
उत्तरः- आरोप पत्र प्रेषित किये जाने से और उसका संज्ञान मा0 न्यायालय द्वारा ले लिए जाने से प्रथम दृष्ट्या स्थापित हो जाता है कि घटना घटित होने के साक्ष्य उपलब्ध है। अतः राहत राशि तत्काल प्रदान की जानी चाहिए।
प्रश्न 25:- सीवर सफाई के दौरान यदि मृत्यु बिना सुरक्षा उपकरणों के सीवर में घुसने से हुई है तो क्या किया जाना चाहिए ?
उत्तरः- यदि मृत्यु सीवर सफाई के दौरान आवश्यक सुरक्षा उपकरण न पहनने/प्रयोग के कारण हुई है तो अभियोग में ’’हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों का नियोजन प्रतिषेध अधिनियम, 2013’’ की सुसंगत धाराओं का समावेश अवश्य किया जाये।
यदि मृत्यु सीवर सफाई के दौरान बिना यथोचित सुरक्षा उपकरणों के उपलब्ध होने के कारण हुई है तो नियोक्ता से अथवा इन्श्योरेंस कम्पनी से 10 लाख रूपये राहत राशि प्रदान किये जाने हेतु आख्या जिलाधिकारी को प्रेषित की जाये।

आयोग एवं समितियां

प्रश्न 01ः- अनुसूचित जाति और अनुसूचित के सदस्यों की समस्याओं के निराकरण के लिये केन्द्र व राज्य स्तर पर किन आयोगों का गठन किया गया है ?
उत्तरः- केन्द्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग अलग-अलग गठित किये गये हैं एवं उ0प्र0 में उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग का गठन किया गया है।
प्रश्न 02ः- किस-किस स्तर पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित के सदस्यों को अधिनियम के उपबन्धों के कार्यान्वयन, पीड़ित व्यक्तियों को राहत प्रदान करने व अभियोजन आदि की माॅनीटरिंग हेतु समितियों का गठन किया जाना विधि सम्मत है ?
उत्तरः- प्रदेश में तीन स्तरों पर सतर्कता और माॅनीटरिंग समितियों का गठन किया हैं।
(1) मा0 मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय सतर्कता और माॅनीटरिंग समिति का गठन। (नियम-16 के अन्तर्गत)
(2) जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में जिला स्तरीय सतर्कता और माॅनीटरिंग समिति का गठन। (नियम-17 के अन्तर्गत)
(3) उपखण्ड मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में उपखण्डों स्तरीय सतर्कता और माॅनीटरिंग समिति का गठन। (नियम-17 (क) के अन्तर्गत)
प्रश्न 03ः- राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग कब गठित हुआ ? आयोग कहाँ पर स्थित है ?
उत्तर:- राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का गठन दिनांक 19.02.2004 में हुआ। आयोग में अध्यक्ष के अतिरिक्त 01 उपाध्यक्ष तथा 03 सदस्य हैं। आयोग पंचम तल, लोकनायक भवन, खान मार्केट - नई दिल्ली - 110003 में स्थित है।
प्रश्न 04ः- राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग कब गठित हुआ ? आयोग कहाँ पर स्थित है ?
उत्तर:- राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का गठन दिनांक 19.02.2004 में हुआ। आयोग में अध्यक्ष के अतिरिक्त 01 उपाध्यक्ष तथा 03 सदस्य हैं। आयोग षष्ठम तल, बी विंग, लोकनायक भवन, खान मार्केट - नई दिल्ली - 110003 में स्थित है।
प्रश्न 05ः- उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का क्षेत्रीय कार्यालय कहाँ है ?
उत्तर:- उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का क्षेत्रीय कार्यालय, पंचमतल केन्द्रीय भवन सेक्टर-एच अलीगंज लखनऊ - 226024 में स्थित है।
प्रश्न 06ः- राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का क्षेत्रीय कार्यालय कहाँ हैै ?
उत्तर:- राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का क्षेत्रीय कार्यालय, 14, न्यू ए.जी. को-आपरेटिव कालोनी, कदरू, रांची, झारखण्ड-834002 में स्थित है, जिसके द्वारा उत्तर प्रदेश राज्य का भी कार्य देखा जाता है।
WPL
Women Power line
Control Room

Control Room

Fire Brigade

101

Fire Brigade

Ambulance

108

Ambulance

Download Mobile App

Download Mobile App

Child Helpline

1098

Child Hepline